US Strike Syria: अमेरिका ने शनिवार को सीरिया में इस्लामिक स्टेट यानी ISIS के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब हाल के महीनों में अमेरिका लगातार अलग-अलग देशों में आतंकवादी संगठनों के खिलाफ सैन्य कदम उठा रहा है। यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर बताया कि ये हमले सीरिया के अलग-अलग हिस्सों में ISIS को निशाना बनाने के लिए किए गए।
Operation Hawkeye की शुरुआत
CENTCOM के मुताबिक ये हमले ऑपरेशन हॉकआई का हिस्सा हैं, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 दिसंबर 2025 को लॉन्च किया था। यह ऑपरेशन 13 दिसंबर को सीरिया के पलमीरा इलाके में हुए ISIS हमले के जवाब में शुरू किया गया था। उस हमले में अमेरिकी और सीरियाई बलों को निशाना बनाया गया था, जिसमें जानमाल का भारी नुकसान हुआ था।
तीन अमेरिकियों की मौत से बदला माहौल
13 दिसंबर 2025 को ISIS के एक घातक हमले में दो अमेरिकी सैनिक- सार्जेंट एडगर ब्रायन टोरेस-टोवर और सार्जेंट विलियम नथानियल हॉवर्ड मारे गए थे। इसके अलावा एक अमेरिकी नागरिक दुभाषिया अयाद मंसूर सकात की भी जान गई थी। इस घटना के बाद अमेरिका ने साफ कर दिया था कि वह इसका जवाब जरूर देगा।
जहां छिपोगे, वहां ढूंढ निकालेंगे…
CENTCOM ने अपने बयान में बेहद सख्त लहजे में कहा “अगर तुम हमारे सैनिकों को नुकसान पहुंचाते हो, तो हम तुम्हें दुनिया के किसी भी कोने से ढूंढ निकालेंगे और मार गिराएंगे।” यह बयान दिखाता है कि अमेरिका इस बार सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि एक्शन मोड में है।
ब्रिटेन और फ्रांस भी कर चुके हैं स्ट्राइक
जनवरी के इन हमलों से पहले ब्रिटेन और फ्रांस ने भी मिलकर सीरिया में ISIS के एक अंडरग्राउंड ठिकाने पर हमला किया था। बताया गया था कि इस जगह का इस्तेमाल हथियारों को छिपाने के लिए किया जा रहा था। इससे साफ है कि पश्चिमी देश मिलकर ISIS के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं।
जंग नहीं, बदले की कार्रवाई का दावा
दिसंबर में हुए अमेरिकी हमलों के बाद रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा था कि ये हमले युद्ध की घोषणा नहीं, बल्कि बदले की कार्रवाई हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका अपने नागरिकों और सैनिकों की सुरक्षा से कभी समझौता नहीं करेगा।
सीरिया का रिएक्शन
सीरिया ने दिसंबर में हुए अमेरिकी हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि इस तरह की घटनाएं दिखाती हैं कि आतंकवाद से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत है।