US-Iran Peace Talks: इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता, 40 दिनों के संघर्ष के बाद स्थाई युद्धविराम की कोशिश

US-Iran Peace Talks: अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचे हैं, जहां शांति वार्ता शुरू होने की उम्मीद है। यह वार्ता अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान के संघर्ष के बाद युद्धविराम को स्थायी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Anuj Shrivastava( विद इनपुट्स फ्रॉम वार्ता)
पब्लिश्ड11 Apr 2026, 04:49 PM IST
इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता
इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता

US-Iran Peace Talks: अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंच गए हैं, जहां कुछ ही घंटों में शांति वार्ता शुरू होने की उम्मीद है। यह वार्ता 40 दिनों तक अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान के विनाशकारी संघर्ष के बाद घोषित दो सप्ताह के नाजुक युद्धविराम को स्थायी बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शनिवार को इस्लामाबाद पहुंचे। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर शामिल हैं।

ईरान की ओर से 71 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पहुंचा है, जिसमें वार्ताकार, तकनीकी विशेषज्ञ, मीडिया प्रतिनिधि और सुरक्षा अधिकारी शामिल हैं। इस दल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ कर रहे हैं, जबकि विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी इसमें शामिल हैं।रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी पक्ष 15 सूत्री प्रस्ताव के साथ वार्ता में शामिल हो रहा है, जिसमें ईरान से परमाणु हथियारों का त्याग करने, उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार सौंपने, रक्षा क्षमताओं पर सीमाएं स्वीकार करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने जैसी मांगें शामिल हैं।

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क्या सफल होगी वार्ता?

ईरान को अमेरिका पर गहरा अविश्वास है, विशेषकर विटकॉफ को लेकर। उन्होंने पूर्व वार्ताओं का नेतृत्व किया था, लेकिन वे वार्ताएं 2025 और इस वर्ष की शुरुआत में अमेरिकी-इजरायली हमलों के कारण बाधित हो गयी थीं। वार्ता कई दिनों तक चल सकती है और युद्धविराम को औपचारिक रूप देने का तरीका अभी स्पष्ट नहीं है। दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं, खासकर लेबनान को लेकर। ईरान लेबनान में युद्धविराम को अपने 10 सूत्री प्रस्ताव का हिस्सा बताता है, जबकि अमेरिका इससे इनकार करता रहा है।

जेडी वेंस की 'साइलेंट डिप्लोमेसी

वेंस इस बात पर चिंता जताते रहे हैं कि यह संघर्ष बेकाबू होकर और ज़्यादा बढ़ सकता है, और उन्होंने इस्लामाबाद वार्ता को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वह शुरू से ही ईरान पर हमला करने को लेकर संशय में थे। उन्होंने हफ़्तों तक चुपचाप कूटनीतिक समाधान की दिशा में काम किया है।वार्ता से पहले ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर ईरानी रियाल में शुल्क लेने का प्रस्ताव रखकर अपनी रणनीतिक स्थिति स्पष्ट की है।

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ईरान के संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख ने संकेत दिया कि एक संसदीय प्रस्ताव के तहत, जलडमरूमध्य से होने वाले सभी ट्रांजिट शुल्क का भुगतान ईरान की राष्ट्रीय मुद्रा में किया जाएगा। यह जानकारी मुंबई स्थित ईरान के महावाणिज्य दूतावास द्वारा एक्स पर की गयी एक पोस्ट में दी गयी है। एक बयान में कहा गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और सतत विकास के लिए बनायी गयी रणनीतिक कार्य योजना के अंतर्गत, सरकार आवश्यकता पड़ने पर ओमान के साथ एक समझौता कर सकती है। यह एक गौण प्रावधान है, न कि मुख्य योजना का हिस्सा है।"

पाकिस्तान ने इस्लामाबाद वार्ता के लिए दो दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है और शहर में लगभग 10,000 सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। इस मध्यस्थता प्रयास में सेना प्रमुख आसिम मुनीर की महत्वपूर्ण भूमिका बतायी जा रही है।विश्लेषकों के अनुसार, इन वार्ताओं की सफलता या विफलता पाकिस्तान की वैश्विक कूटनीतिक स्थिति पर भी असर डाल सकती है।

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