
हिंदी पत्रकारिता में पंडित युगल किशोर शुक्ल की स्मृति हम पर गहरा प्रभाव डालती है। हमारे पुरखा संपादकों की कुर्बानी हमें यश और सम्मान दिलाती है। पत्रकारिता का इतिहास हमें इसका भविष्य बनाने की ताकत देता है। हमें 'उदन्त मार्तण्ड' की तरह हितैषी बनना होगा। 'प्रताप' समाचार पत्र की तरह लोक जागरण के लिए काम करना होगा। ये बातें राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने दिल्ली विश्वविद्यालय के रामलाल आनंद महाविद्यालय में कहीं।
दिग्गज पत्रकार रह चुके हरिवंश ने रामलाल आनंद महाविद्यालय के हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष होने के उपलक्ष्य में 'भारत बोध और हिंदी पत्रकारिता : 200 वर्षों की यात्रा' विषयक संगोष्ठी में भाग लिया। शनिवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ। इस अवसर पर समापन सत्र के मुख्य अतिथि हरिवंश ने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना लोक जागरण के अभियान को और आगे लेकर जाएगी। इससे हम भारत का नवनिर्माण करेंगे। इसके लिए हमें सचेत रहना होगा।
उन्होंने कहा, 'देश की अर्थव्यवस्था, स्वस्थ ऊर्जा और डिजिटल क्रांति के प्रति अपना योगदान देना होगा। यही अवधारणा विकसित भारत की सार्वभौमिक सत्यता को दर्शाती है। ऐसे में अगर हम समस्या का समाधान नहीं ढूंढेंगे तो हमारा भविष्य बेहतर नहीं होगा।' हरिवंश ने चाणक्य नीति को संदर्भित करते हुए विकसित भारत की दिशा में अर्थ की मजबूती पर जोर दिया। साथ ही 'उदन्त मार्तण्ड' के कलकता से निकलने की पीछे की वजह को रेखांकित किया। उपसभापति ने कहा कि देश की राजधानी देश की दिशा और दशा तय करती है। 'उदन्त मार्तण्ड' हिंदुस्तानियों के हित के हेतु निकाला गया था।
उपसभापति हरिवंश ने कानपुर से प्रकाशित 'प्रताप' पत्र के बारे में बताते हुए गणेश शंकर विद्यार्थी की पहली संपादकीय का जिक्र किया। उन्होंने विद्यार्थियों को उनका पहला संपादकीय पढ़ने की अनिवार्यता बताई, साथ ही बाबूराव विष्णु पराड़कर की पत्रकारिता का उल्लेख किया। उन्होंने अपने लिखे हुए एक लेख ‘भारत का भविष्य’ का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि भारत डिजिटल, वैक्सीन, रेल, मेट्रो नेटवर्क, डीबीटी, रक्षा आदि क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बन रहा है। स्टार्टअप की दिशा में नित नए प्रयोग कर रहा है। आज कर्मयोगी पद्म पुरस्कार पा रहे हैं।
सवाल-जवाब के सत्र में पत्रकारिता के विद्यार्थी आलोक यादव और आयुष ने उपसभापति हरिवंश से पत्रकारिता से जुड़े सवाल किए। पत्रकारिता विभाग के शिक्षक डॉ. अटल तिवारी ने दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि रामलाल आनंद महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय का एकमात्र महाविद्यालय है, जिसने हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की है।
इससे पहले कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य प्रो. राकेश कुमार गुप्ता ने मुख्य अतिथि हरिवंश का अंगवस्त्र से सम्मानित किया। साथ ही संगोष्ठी में आए सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया l हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार के संयोजक प्रो. राकेश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए उपसभापति के सौम्य स्वभाव और जिम्मेदारी का उल्लेख कियाl संगोष्ठी के पहले दिन शोध पत्र वाचन करने वाले विद्यार्थी मुख्य अतिथि हरिवंश के हाथों से सम्मानित हुए। मंचल संचालन आस्था त्रिपाठी ने किया l
समापन सत्र से पहले 'भारत बोध और राष्ट्र चेतना की हिंदी पत्रकारिता' विषयक सत्र में पंजाब विश्वविद्यालय से आए वक्ता डॉ. किंशुक पाठक ने कहा कि जो समुद्र में दीप स्तंभ होता है, उस तरह से 'उदन्त मार्तण्ड' है l उसने एक तरह से पत्रकारिता की दिशा तय की। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से आए प्रो. धनंजय चोपड़ा ने कहा कि एक कनपुरिया बंगाल में जाकर अखबार निकालता है, ऐसा क्यों है?
पाठक ने कहा कि दरअसल ब्रिटिश शासन ने हमारी संस्कृति और भाषा पर वार किया था l यही सोच कर पंडित युगल किशोर ने सोचा होगा कि हम हिंदी में अखबार निकालेंगे। इसी सोच के तहत उन्होंने 30 मई, 1826 को 'उदन्त मार्तण्ड' का प्रकाशन शुरू किया था l उन्होंने गणेश शंकर विद्यार्थी की पत्रकारिता के साथ 'स्वराज' और 'सरस्वती' पत्रिका के योगदान को अपने अंदाज में रेखांकित किया। वहीं, सत्र की अध्यक्षता कर रहे दिल्ली विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय सम्बन्ध के डीन प्रो. अनिल राय ने कहा कि कलकत्ता से इसलिए पत्र निकले, क्योंकि उस समय वहीं पर छापाखाना मौजूद था l उन्होंने भारतेंदु युग से लेकर स्वतंत्रता आन्दोलन और उस समय की पत्रकारिता का विस्तार से जिक्र किया।
सत्र का संचालन अंशिका वर्मा और दिव्या ने किया तो धन्यवाद ज्ञापन की जिम्मेदारी डॉ. राजेश गौतम ने निभाई l संगोष्ठी का संयोजन डॉ. देवेन्द्रनाथ तिवारी और डॉ. विशाल शर्मा ने किया तो डॉ. सीमा भारती, डॉ. निशा सिंह, डॉ. श्वेता आर्या और रेडियो तरंग की फरजीन सुल्तान ने उसे सफल बनाया l इस मौके पर हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुरेन्द्र कुमार, डॉ. रोशनलाल मीणा, डॉ. एनी रे, डॉ. गोपाल यादव, डॉ. श्यामजीत यादव सहित कई विभागों के शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहेl
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