Bengal Chunav Results Ratna Debnath: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज का दिन ऐतिहासिक है। रुझानों में जिस तरह से बदलाव दिख रहा है, उसने पुराने समीकरणों को हिला कर रख दिया है। एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य की 294 सीटों में से 200 से अधिक पर बढ़त बनाकर सत्ता की दहलीज पर खड़ी है, वहीं दूसरी ओर ममता के गढ़ में एक ऐसी महिला की गूंज सुनाई दे रही है, जिसकी कहानी ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
हम बात कर रहे हैं आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड की शिकार हुई बेटी की मां, रत्ना देबनाथ की। पानीहाटी सीट से चुनाव लड़ रहीं रत्ना देबनाथ ने अपने पहले ही चुनावी मुकाबले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पसीने छुड़ा दिए हैं।
टीएमसी का गढ़, अब बदलता समीकरण
पानीहाटी सीट, जो लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ मानी जाती थी, इस बार पूरी तरह बदलती नजर आ रही है। ताजा रुझानों के मुताबिक, यहां से बीजेपी उम्मीदवार रत्ना देबनाथ करीब 20,000 वोटों से आगे चल रही हैं। उनके मुकाबले में टीएमसी के तीर्थंकर घोष हैं, जबकि CPI(M) तीसरे स्थान पर है। यह सीट दमदम लोकसभा क्षेत्र के तहत आती है और 2009 से लगातार टीएमसी का कब्जा रहा है, लेकिन इस बार हालात अलग हैं।
कौन हैं रत्ना देबनाथ जिसने राजनीति में एंट्री ली?
रत्ना देबनाथ कोई पेशेवर राजनेता नहीं हैं। उनकी उम्र 54 साल है और उनके पति का नाम शेखर रंजन देबनाथ है। चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनके पास करीब 74 लाख रुपये की संपत्ति है। लेकिन रत्ना की असली पहचान उनकी संपत्ति या राजनीति नहीं, बल्कि उनकी वो लड़ाई है जो उन्होंने अपनी बेटी के लिए शुरू की थी। 2024 में कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में उनकी डॉक्टर बेटी के साथ जो दरिंदगी हुई, उसने रत्ना को घर की दहलीज से निकालकर राजनीति के मैदान में खड़ा कर दिया।
रत्ना ने चुनाव लड़ने का फैसला इसलिए किया ताकि वे उस व्यवस्था को चुनौती दे सकें जिसने उनकी बेटी को सुरक्षा नहीं दी। मिडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी ने करीब छह महीने पहले उनसे संपर्क किया था, और काफी सोच-विचार के बाद उन्होंने चुनावी दंगल में उतरने का साहस जुटाया।
न्याय की लड़ाई से चुनावी मैदान तक
रत्ना देबनाथ का पूरा चुनावी अभियान एक ही मुद्दे के इर्द-गिर्द घूमता रहा- महिलाओं की सुरक्षा और न्याय। उन्होंने खुलकर राज्य सरकार और ममता बनर्जी पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि उनकी बेटी का मामला अकेला नहीं है, बल्कि राज्य में ऐसे कई केस हैं जहां लोगों को न्याय नहीं मिल पा रहा।
एनडीटीवी को दिए एक बयान में उन्होंने कहा था, “मेरी मुख्य दुश्मन ममता बनर्जी हैं, क्योंकि वह स्वास्थ्य मंत्री हैं और मेरी बेटी स्वास्थ्य विभाग में काम करती थी। ममता बनर्जी ने मेरी बेटी को क्यों नहीं बचाया?” उन्होंने आगे कहा, “इस राज्य में लोगों ने न्याय मिलने की उम्मीद खो दी है… मैं इन पीड़ितों, उनके परिवारों और इस राज्य के लोगों को एक आवाज देना चाहती हूं।”
एक घटना जिसने बदल दिया माहौल
2024 में सरकारी अस्पताल में हुई इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश पैदा किया था। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और बंगाल की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे। बीजेपी ने इसी मुद्दे को चुनाव में प्रमुखता से उठाया और महिलाओं की सुरक्षा को बड़ा चुनावी एजेंडा बनाया। रत्ना देबनाथ को टिकट देना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना गया, जिसने जनता के बीच गहरी छाप छोड़ी।
जब स्मृति ईरानी और पीएम मोदी खुद बने रत्ना की आवाज
रत्ना देबनाथ के चुनाव प्रचार को बीजेपी ने पूरी ताकत दी। जब उन्होंने नामांकन भरा, तो पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी उनके साथ खड़ी थीं। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल को पानीहाटी में उनके लिए रैली की।
बंगाल में भगवा लहर
रुझानों को देखें तो बंगाल में इस बार 'भगवा क्रांति' आती दिख रही है। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और खासकर महिला सुरक्षा के मुद्दों ने हवा का रुख बदल दिया है। अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो ममता बनर्जी का 15 साल का अखंड शासन समाप्त हो जाएगा। बीजेपी ने आरजी कर कांड के दर्द को बंगाल की हर महिला के दिल तक पहुंचाया, जिसका चेहरा बनकर रत्ना देबनाथ आज जीत की ओर बढ़ रही हैं।