
Iran-US War: अमेरिका और इजरायल के हमलों के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। खबर है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के खुफिया संगठन के प्रमुख मेजर जनरल माजिद खादेमी की अमेरिका-इजरायल के हमले में मौत हो गई है।
ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर' (IRGC) ने सोमवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर इस खबर की पुष्टि की है कि उनके खुफिया संगठन के प्रमुख, मेजर जनरल माजिद खादेमी, अब नहीं रहे। बताया जा रहा है कि सोमवार की सुबह अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए एक संयुक्त हमले में उनकी मौत हो गई। खादेमी ईरान की सुरक्षा रणनीति के सबसे अहम किरदारों में से एक थे, और उनकी मौत को ईरान के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
आईआरजीसी ने अपने बयान में इस हमले को 'अमेरिकी-जायोनी साजिश' करार दिया है। इस घटना के बाद ईरान के भीतर और उसके समर्थक गुटों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
माजिद खादेमी ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर' (IRGC) के एक बेहद ताकतवर ब्रिगेडियर जनरल थे। वे सिर्फ एक फौजी नहीं थे, बल्कि उन्होंने नेशनल सिक्योरिटी और डिफेंस साइंस में डॉक्टरेट भी की थी। उनकी काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब IRGC के इंटेलिजेंस विंग का गठन हुआ, तभी से उन्हें इसके अगले मुखिया के तौर पर देखा जाने लगा था।
खादेमी 2014 तक IRGC की खुफिया यूनिट से गहराई से जुड़े रहे। मई 2018 में उन्हें ईरान के रक्षा मंत्रालय के 'सूचना सुरक्षा संगठन' का प्रमुख बनाया गया, जहां उन्होंने 2022 तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2022 में उन्हें IRGC के 'इंटेलिजेंस प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशन' की कमान सौंपी गई। दिलचस्प बात यह है कि 2022 से 2025 के बीच वे ईरान की दो सबसे बड़ी खुफिया इकाइयों को एक साथ संभाल रहे थे। जून 2025 में जब '12-दिनों के युद्ध' के दौरान इजरायली हवाई हमले में मोहम्मद काजमी की मौत हुई, तब खादेमी को IRGC के खुफिया संगठन का नया चीफ नियुक्त किया गया।
इजरायली डिफेंस फोर्सेस (IDF) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के जरिए मेजर जनरल माजिद खादेमी की मौत की पुष्टि की है। IDF ने लिखा, "खत्म: माजिद खादिमी, IRGC इंटेलिजेंस के प्रमुख।" इजरायल के मुताबिक, खादेमी IRGC के सबसे वरिष्ठ कमांडरों में से एक थे और उन्हें सैन्य रणनीति का लंबा अनुभव था। इजरायली सेना ने उन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि खादेमी न केवल दुनिया भर में आतंकी हमलों की योजना बनाने में शामिल थे, बल्कि ईरान के भीतर विरोध प्रदर्शनों को कुचलने और आम नागरिकों पर कड़ी निगरानी रखने के भी जिम्मेदार थे। उनकी मौत को इजरायल ने अपनी एक बड़ी सैन्य सफलता बताया है।
यह हमला कोई इकलौती घटना नहीं है। दरअसल, 28 फरवरी 2026 से ही अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं। संघर्ष के पहले ही दिन दक्षिण ईरान में एक बालिका विद्यालय (Girls School) को निशाना बनाया गया था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी निंदा हुई थी। इसी संघर्ष के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की भी मौत की खबरें सामने आई थीं, जिसने ईरान की सत्ता को हिला कर रख दिया था।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, इन हमलों में अब तक 1,300 से अधिक आम नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि 20,000 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं। अस्पताल घायलों से पटे पड़े हैं और बुनियादी सुविधाओं का अकाल पड़ गया है।
ईरान इस हमले को चुपचाप सहन नहीं कर रहा है। जवाब में ईरान ने इजरायली क्षेत्रों और पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागनी शुरू कर दी हैं। इस तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाली आवाजाही लगभग ठप हो गई है। यह रास्ता खाड़ी देशों से पूरी दुनिया तक तेल और एलपीजी (LNG) सप्लाई करने का सबसे प्रमुख रूट है। इसका सीधा नतीजा यह है कि ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कमी होने लगी है और कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं।
Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.
Oops! Looks like you have exceeded the limit to bookmark the image. Remove some to bookmark this image.