आखिर क्यों पड़ती है डायलिसिस की जरूरत? डॉक्टर से जानिए किडनी को हेल्दी रखने के टिप्स

डॉ. नम्रता राव ने CME कार्यक्रम में प्रतिभागियों का धन्यवाद किया। कार्यक्रम में डायलिसिस तकनीशियनों की व्यावहारिक दक्षता पर जोर दिया गया। स्वास्थ्यकर्मी उत्साह से उपस्थित रहे और किडनी की देखभाल में डायलिसिस की भूमिका पर चर्चा की गई।

Manali Rastogi( विद इनपुट्स फ्रॉम वार्ता)
पब्लिश्ड3 Nov 2025, 04:40 PM IST
आखिर क्यों पड़ती है डायलिसिस की जरूरत? डॉक्टर से जानिए किडनी को हेल्दी रखने के टिप्स
आखिर क्यों पड़ती है डायलिसिस की जरूरत? डॉक्टर से जानिए किडनी को हेल्दी रखने के टिप्स

लखनऊ: डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के नेफ्रोलॉजी विभाग में रविवार देर शाम “ऑप्टिमाइजिंग डायलिसिस” विषय पर एक सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन विभागाध्यक्ष डॉ. अभिलाष चंद्रा ने किया।

डायलिसिस की अहम भूमिका

कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. अभिलाष चंद्रा ने बताया कि जब हमारे गुर्दे (किडनी) काम करना बंद कर देते हैं, तो शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने के लिए डायलिसिस की जरूरत पड़ती है।

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उन्होंने कहा कि आज के समय में मानसिक तनाव, अनियमित दिनचर्या, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियाँ किडनी रोगों का मुख्य कारण बन रही हैं। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि किडनी को स्वस्थ रखने के लिए:

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं,
  • नमक का सेवन कम करें,
  • और ताजे फल व सब्जियां रोजाना खाएं।

डॉ. चंद्रा ने यह भी कहा कि डायलिसिस तकनीशियन किडनी रोगियों की देखभाल की रीढ़ की हड्डी (बैकबोन) हैं। उनका निरंतर प्रशिक्षण ही बेहतर इलाज और रोगी देखभाल की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करता है।

जीवनशैली में सुधार से किडनी रोगों से बचाव

कार्यक्रम में डॉ. नम्रता राव ने अपने वक्तव्य में बताया कि यदि व्यक्ति अपने खान-पान और रहन-सहन में सुधार करे, तो किडनी की बीमारियों से बचाव संभव है। उन्होंने कहा कि लोगों को:

  • नशे, शराब, सिगरेट, बीयर और तंबाकू से दूर रहना चाहिए,
  • अधिक तेल और मसाले वाले भोजन से परहेज करना चाहिए।
  • डायलिसिस इलाज नहीं, जीवन को बनाए रखने की प्रक्रिया

डॉ. जगत पाल वर्मा ने कहा कि डायलिसिस कोई स्थायी इलाज नहीं है, बल्कि यह किडनी रोगियों के जीवन को सुचारू रूप से चलाने की एक आवश्यक प्रक्रिया है। इसके माध्यम से शरीर से विषैले पदार्थों को हटाकर रोगी को स्वस्थ रखा जाता है।

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वहीं, डॉ. विशाल पूनिया ने कहा कि मरीजों को हमेशा विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में ही डायलिसिस कराना चाहिए और समय-समय पर डॉक्टर से परामर्श लेते रहना चाहिए।

मेदांता अस्पताल के निदेशक डॉ. आर.के. शर्मा ने सत्र में डायलिसिस की गुणवत्ता और मानकों पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. रंजीत गंगवार, डॉ. शैलेंद्र, डॉ. संत पांडे, डॉ. राजेश जायसवाल और डॉ. नेहल अग्रवाल ने की।

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कार्यक्रम के अंत में आयोजन सचिव डॉ. नम्रता राव एस. ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि ऐसे सीएमई कार्यक्रमों से डायलिसिस तकनीशियनों में व्यावहारिक दक्षता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होता है। इस अवसर पर विभिन्न केंद्रों से आए डायलिसिस तकनीशियन और स्वास्थ्यकर्मी बड़ी संख्या में मौजूद रहे और उन्होंने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।

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