लोकसभा के प्रश्नकाल के दौरान उस समय एक अप्रत्याशित स्थिति बन गई जब केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी कांग्रेस सांसद शशिकांत सेंथिल के सवाल का जवाब दे रहे थे। जवाब देते हुए पुरी ने अपना हाथ जेब में डाल रखा था, तभी स्पीकर ओम बिरला ने उन्हें बीच में ही रोकते हुए कहा कि माननीय मंत्री जी, जेब में हाथ डालकर जवाब न दें। स्पीकर की यह नसीहत सुनते ही पुरी ने तुरंत हाथ बाहर निकाल लिया और स्थिति कुछ पलों के लिए असहज हो गई।
मुस्कराकर जवाब दीजिए, स्पीकर ने दी सलाह
पुरी जैसे ही संभले, स्पीकर ने उन्हें यह भी कहा कि वे आराम से और मुस्कराकर जवाब दें तथा अनावश्यक क्रोध या तनाव न दिखाएं। इस पर केंद्रीय मंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि यह उनकी सामान्य शैली है जिस तरह वे प्रश्नकाल में उत्तर देते हैं। स्पीकर ने स्पष्ट किया कि उनकी अपेक्षा है कि मंत्री सीधे सदस्यों से संवाद करने के बजाय आसन के माध्यम से जवाब दें, ताकि सदन की गरिमा और प्रक्रिया बेहतर तरह से बनी रहे।
प्रश्नकाल की मर्यादा पर फिर जोर
ओम बिरला ने दोहराया कि प्रश्नकाल में सदस्यों को संक्षिप्त प्रश्न पूछना चाहिए और मंत्री भी संक्षिप्त उत्तर दें ताकि अधिक से अधिक सांसदों को मौका मिल सके। उन्होंने कहा कि वे नए और पहली बार चुने गए सांसदों को प्राथमिकता से पूरक प्रश्न पूछने का अवसर देने का प्रयास करते हैं। गौरतलब है कि बिरला पहले भी प्रश्नकाल के दौरान मंत्रियों को जेब में हाथ नहीं डालने, सदस्यों से सीधे बातचीत नहीं करने, सदस्यों से हाथ मिलाते हुए सदन से नहीं जाने, संक्षिप्त उत्तर देने आदि की नसीहत देते रहे हैं।