
उत्तर प्रदेश में साल 2017 का विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने मिलकर लड़ा था, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में यूपी के दो लड़कों का साथ यानी राहुल गांधी और अखिलेश यादव की जोड़ी टूट गई। साल 2024 का लोकसभा चुनाव दोनों पार्टियों ने मिलकर लड़ा और यूपी में उन्हें उम्मीद से ज्यादा कामयाबी मिली। अब तैयारी 2027 की है लेकिन अभी तक ये साफ नहीं है कि दोनों पार्टियां एक साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगी या अलग-अलग?
यूपी में साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं जिसमें अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और राहुल गांधी की कांग्रेस पार्टी क्या मिलकर चुनाव लड़ेंगे? इस सवाल का जवाब फिलहाल मिलता नजर नहीं आ रहा है। लेकिन दोनों पार्टियों का रुख इस बात की ओर इशारा जरूर कर रहा है कि आगे क्या होने वाला है। हालांकि दोनों पार्टियां एक साथ विधानसभा चुनाव लड़ने का दावा जरूर कर रही हैं।
यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले अगले साल 2026 में एमएलसी और पंचायत चुनाव होने हैं, इन चुनावों में कांग्रेस और सपा दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया है। यही वजह है कि कांग्रेस यूपी में अपने संगठन के विस्तार और उसे मजबूत करने पर जोर दे रही है। उधर, अखिलेश यादव अपनी पार्टी की साख बचाए रखने के लिए रणनीति बनाने में जुटे हैं।
बिहार में महागठबंधन में शामिल होकर कांग्रेस ने विधानसभा का चुनाव लड़ा और पार्टी की वहां बुरी हार हुई। 61 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस को महज 6 सीटों पर जीत मिली थी। बिहार में कांग्रेस का एक धड़ा अकेले चुनाव लड़ने के पक्ष में था, कुछ वैसा ही यूपी में भी देखने को मिल रहा है। कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस यूपी की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में अपना संगठन मजबूत करने पर ध्यान दे रही है।
एक तरफ कांग्रेस यूपी में अपना संगठन विस्तार पर जोर दे रही है तो दूसरी तरफ पंचायत चुनाव और एमएसी चुनाव में समाजवादी पार्टी अपनी पकड़ कमजोर नहीं पड़ने देना चाहती। यही वजह है कि अखिलेश यादव इस वक्त गठबंधन से ज्यादा अपनी पारंपरिक सीटों को किसी भी कीमत पर बरकरार रखने पर जोर दे रहे हैं।
भले ही कांग्रेस पूरे उत्तर प्रदेश में अपना संगठन मजबूत करने पर जोर दे रही है और समाजवादी पार्टी अपनी एमएलसी की सीटें बरकरार रखने पर जोर दे रही है, इसके बावजूद दोनों दलों की तरफ से गठबंधन बरकरार रखने का दावा किया जा रहा है। लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार ने यूपी में समीकरण बदल दिए हैं। दोनों दलों के बीच एक-दूसरे पर भरोसे की कमी साफ नजर आ रही है।
इसी साल 8 और 9 अप्रैल को गुजरात में कांग्रेस का 84वां राष्ट्रीय अधिवेशन हुआ था, जहां से राहुल गांधी ने पार्टी को पूरे देश में एकला चलो का संदेश दिया था। गुजरात अधिवेशन में राहुल गांधी समेत पार्टी के आला नेताओं ने कांग्रेस को राष्ट्रीय स्तर पर अपने दम पर खड़ा करने पर जोर दिया था। पार्टी के भविष्य को ध्यान में रखते हुए गठबंधन से ज्यादा अपने संगठन के विस्तार की बात कही गई थी।
कुल मिलाकर अभी तक ये साफ नहीं है कि यूपी में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस विधानसभा चुनाव एक साथ मिलकर लड़ेंगे या अलग-अलग राह पकड़ेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस और सपा अगर यूपी में तालमेल को बचाए रखना चाहते हैं, तो उन्हें बिहार की हार के बाद बने माहौल को जल्द संभालना होगा, वरना 2027 की राह दोनों के लिए मुश्किल हो सकती है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली कामयाबी दोनों को साथ चुनाव लड़ने के लिए एक बार फिर एक मंच पर ला सकती है।
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