क्या ताजमहल का नाम बदल जाएगा? संसद में पूछे गए सवाल का सरकार ने दिया जवाब

Taj Mahal Name Change Issue: संसदीय कार्यवाही के दौरान गुरुवार को एक बड़ा प्रश्न उठा- क्या ताजमहल का नाम बदलने का विचार कर रही है सरकार? केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इसका जवाब दिया। 

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड12 Mar 2026, 06:12 PM IST
राज्यसभा में उठा ताजमहल के नाम बदलने को लेकर प्रश्न।
राज्यसभा में उठा ताजमहल के नाम बदलने को लेकर प्रश्न।

Taj Mahal News in Hindi: उत्तर प्रदेश के आगरा में वैश्विक आकर्षण का केंद्र ताजमहल तरह-तरह से चर्चा में बना रहता है। एक पक्ष ताजमहल को लेकर प्रश्न खड़ा करते हैं कि वह एक मंदिर को गिराकर बनाया गया है। उनका दावा है कि ताजमहल के नीचे आज भी मंदिर के अवशेष हैं। उनका दावा यह है कि दरअसल ताजमहल और कुछ नहीं प्राचीन तेजोमहालय मंदिर पर बना हुआ है। इन्हीं चर्चाओं के बीच आज संसद में भी ताजमहल को लेकर एक प्रश्न पूछ लिया गया, जिसका सरकार ने जवाब भी दिया।

राज्यसभा में जॉन ब्रिटास ने ताजमहल पर किया प्रश्न

संसद के उच्च सदन राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने यह सवाल किया। उन्होंने पूछा कि क्या ताजमहल का नाम बदलने की सरकार की कोई योजना है? ब्रिटास ने उच्च सदन में प्रश्नकाल के पूरक प्रश्न के रूप में ये पूछा। केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने जॉन ब्रिटास के इस प्रश्न का उत्तर दिया। उन्होंने राज्यसभा में कहा कि ताजमहल का नाम बदलने का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है। शेखावत ने कहा, 'नाम बदलने का मंत्रालय का कोई विचार नहीं है।

ऐतिहासिक स्थलों के उत्खनन पर सरकार का ध्यान

संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सदन को बताया कि मोदी सरकार ने 10 वर्षों में ऐतिहासिक स्थलों के उत्खनन पर पिछली सरकारों के 10 वर्षों की तुलना में दोगुनी राशि खर्च की है। इस पर, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद सुखेंदु शेखर राय ने जानना चाहा कि क्या पश्चिम बंगाल में और ऐतिहासिक स्थलों का उत्खनन करने की योजना है।

इस पर शेखावत ने कहा कि उत्खनन एक सतत प्रक्रिया है और यह उपलब्ध मानव संसाधनों पर निर्भर करता है। मंत्री ने कहा, 'मोदी सरकार उत्खनन को लेकर गंभीर है। पिछले 10 वर्षों में उत्खनन गतिविधियों पर लगभग दोगुनी धनराशि खर्च की गई है।' उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार का सहयोग उत्खनन गतिविधियों को तेज करने में सहायक होगा।

पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण पर दोगुना हुआ खर्च

संरक्षण कार्यों के बारे में शेखावत ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में संरक्षण गतिविधियों पर 3,713 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि 2004-2014 के दौरान केवल 1,310 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। मंत्री ने कहा कि मंत्रालय ने संरक्षण गतिविधियों में कॉरपोरेट सेक्टर को शामिल करने की योजना भी शुरू की है और इस पर उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है।

पश्चिम बंगाल के पुरातात्विक स्थलों के संबंध में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में शेखावत ने कहा कि राज्य में 135 स्मारक और राष्ट्रीय महत्व के पुरातात्विक स्थल हैं और इन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिम बंगाल में एएसआई के तहत चार संरक्षित स्मारकों पर प्रवेश शुल्क लिया जाता है।

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