संसद का शीतकालीन सत्र आज शुरू हो रहा है, और इसके दौरान कई विवादित मुद्दों पर टकराव होने की संभावना है। इनमें मतदाता सूची का संशोधन और बंगाल में एक चुनाव अधिकारी की मौत जैसे मुद्दे शामिल हैं।
नेशनल हेराल्ड केस को लेकर कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और सोनिया गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर भी इस सत्र में बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकती है। सरकार और बीजेपी के साथ इस पर कांग्रेस की तीखी बहस होने की संभावना है।
विपक्ष ने पूरे देश में चल रही मतदाता सूची की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) पर चर्चा की मांग की है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी इस पर बहस की मांग की है।
पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया बिना पर्याप्त योजना के चलाई जा रही है, जिससे चुनाव आयोग के कर्मचारियों पर अधिक दबाव पड़ रहा है। पश्चिम बंगाल में एक चुनाव अधिकारी की मौत को तृणमूल कांग्रेस "ज्यादा काम का दबाव" बताकर इस मुद्दे को जोर से उठाने की तैयारी में है।
सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में शामिल 36 पार्टियों ने 10/11 दिल्ली ब्लास्ट और उसके बाद पैदा हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की मांग भी की। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में बेहद खराब वायु गुणवत्ता को देखते हुए, प्रदूषण पर चर्चा की मांग भी उठी है। कांग्रेस ने सुरक्षा और पर्यावरण प्रदूषण दोनों मुद्दों पर बहस की मांग की है।
सरकार ने सत्र में भारी हंगामे की संभावना को कम बताया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में किसी भी पार्टी ने यह नहीं कहा कि वह सदन में व्यवधान डालेगी। हालांकि कुछ नेताओं ने SIR को लेकर शोर-शराबा करने की बात कही है, लेकिन सरकार विपक्ष की बात सुनने के लिए तैयार है।
रिजिजू ने कहा, “संसद सबकी है, देश की है। संसद में हर मुद्दे पर चर्चा करने का नियम और परंपरा है।” शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर को खत्म हो सकता है और इसमें 19 दिनों में 15 बैठकें होंगी। इस दौरान सरकार 13 विधेयक (बिल) और 1 वित्तीय बिल पेश करने की तैयारी में है।
SIR पर सत्र के पहले दिन लोकसभा में दिया स्थगन प्रस्ताव
लोकसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन कांग्रेस के सांसद मणिकम टैगोर ने एसआईआर (SIR) मुद्दे पर विशेष चर्चा कराने की मांग की। इसके लिए उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को स्थगन प्रस्ताव दिया।
टैगोर ने कहा कि एसआईआर को एकतरफा और अव्यवस्थित तरीके से लागू किया गया है। इस पर न तो संसद में चर्चा हुई, न किसी से सलाह ली गई, न राज्यों से बातचीत हुई और न ही लोगों की समस्याओं पर ध्यान दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीएलओ (BLO) लगातार दिन-रात काम कर रहे हैं। कई शिक्षक कक्षाओं और चुनावी काम के बीच संतुलन नहीं बिठा पा रहे हैं। कुछ बीएलओ बेहोश हो चुके हैं, कई की मौत हो गई है और कुछ ने आत्महत्या भी की है।
इसके बावजूद चुनाव आयोग ने न तो जांच कराई, न कोई आंकड़े जारी किए और न ही राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में हुई ऐसी घटनाओं को स्वीकार किया है। टैगोर ने कहा कि यह एक बहुत गंभीर मुद्दा है, इसलिए लोकसभा में इस पर विशेष चर्चा होना जरूरी है।