
1875 में लिखे गए राष्ट्र गीत वंदे मातरम् पर संसद में चर्चा की शुरूआत के साथ पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव का एजेंडा सेट होता नजर आ रहा है। वंदे मातरम् गीत में काट-छांट करने का आरोप लगाते हुए पीएम मोदी कांग्रेस पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद से समझौते कर राष्ट्र गीत वंदे मातरम को मुस्लिम लीग और जिन्ना को खुश करने के लिए काट दिया गया और इसी काट-छांट से देश के बंटवारे की नींव पड़ी। उन्होंने कांग्रेस को INC को MMC बताते हुए तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए तंज कसा, जिसे जानकार पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की राजनीति पर भी निशना मान रहे हैं।
INC यानी इंडियन नेशनल कंग्रेस और MMC यानी मुस्लिम लीगी माओवादी कांग्रेस, ये नाम देकर पीएम मोदी ने कांग्रेस पर आजादी के पहले से ही कंग्रेस पर सत्ता के लिए तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया। पार्टी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी TMC को भी इसी मुद्दे पर घेर रही है। बीजेपी, कांग्रेस और ममता बनर्जी की राजनीति में लंबे समय से समानता बताती आ रही है, पार्टी बंगाल की बदहाली के लिए टीएमसी सरकार को जिम्मेदार ठहराती आ रही है।
राष्ट्र गीत के निर्माता बंकिंम चंद्र चट्टोपाध्याय की पीएम मोदी ने संसद में संबोधन के दौरान खूब तारीफ की, उन्हें आधुनिक बंगाल का संस्थापक बताते हुए कांग्रेस पर जमकर निशना साधा। राजनीति के जानकारों का मानना है कि पीएम मोदी ने वंदे मातरम् और गुरु बंकिंम चंद्र चट्टोपाध्याय का गुणगान कर पश्चिम बंगाल को राष्ट्रवाद और हिन्दुत्व के एजेंटे पर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की है। वंदे मातरम् और देश के विभाजन के साथ जिन्ना और मुस्लिम लीग का जिक्र कर बंगाल के विभाजन की टीस को भी कुरेदने की कोशिश के कयास लाए जा रहे हैं।
पीएम मोदी ने इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय से MMC का जिक्र कर कांग्रेस को घेरा था, इसी दिन बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे। मोदी ने कांग्रेस को MMC यानी मुस्लिम लीगी माओवादी कांग्रेस कहकर संबोधित किया था। मोदी ने 14 नवंबर को कहा था कि बिहार के लोगों ने गर्दा उड़ा दिया, लगे हाथ ये भी कहा कि बिहार से होकर ही मां गंगा बंगाल जाती हैं। संकेत साफ था, बिहार की प्रचंड जीत की गंगा बीजेपी इस बार बंगाल में बहाना चाहती है।
टीएमसी के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल में पहले ही बाबरी मस्जिद की नींव रखकर सूबे का सियासी तापमान बढ़ा दिया है। 6 दिसंबर को अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी के दिन हुमायूं ने मुर्शीदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखकर ध्रुवीकरण का मैदान तैयार कर दिया है। इसमें हुमायूं कबीर के साथ हैदराबाद वाली पार्टी AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी को भी अवसर नजर आ रहा है। लेकिन पश्चिम बंगाल की राजनीति को करीब से जानने वालों की मानें तो बंगाल की सियासी पिच बीजेपी के लिए मुफीद नजर आ रही है। हालांकि जीत का चौका लगाने की ताक में बाठीं ममता बनर्जी के किले में सेंध लगाना इतना आसान नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इसी महीने 20 दिसंबर को पश्चिम बंगाल में रैली होने वाली है, वो नादिया जिले के राणाघाट में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। ये रैली 2026 में होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए बीजेपी की तैयारियों को तेज करने के प्रयासों का एक हिस्सा है, और इस दौरान वो बीजेपी के बंगाल नेतृत्व के साथ संगठनात्मक रणनीति पर भी बैठक करेंगे। अमित शाह भी बंगाल में बीजेपी की होने वाली परिवर्तन रैली की रूप रेखा तैयार करने के लिए पश्चिम बंगाल जाने वाले हैं।
Oops! Looks like you have exceeded the limit to bookmark the image. Remove some to bookmark this image.