रूखे और बेजान बालों से हैं परेशान? जानिए फ्रिजी हेयर कंट्रोल करने के 5 असरदार तरीके

मौसम में बदलाव, बढ़ती नमी, प्रदूषण और गलत हेयर केयर के कारण बाल फ्रिज़ी हो सकते हैं। इससे बचने के लिए सल्फेट-फ्री शैंपू, नारियल या आर्गन ऑयल, माइक्रोफाइबर तौलिया, संतुलित आहार और पर्याप्त पानी का सेवन फायदेमंद है। सही स्कैल्प केयर और कम हीट स्टाइलिंग भी जरूरी है।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड16 Jun 2026, 01:45 PM IST
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मौसम में अचानक बदलाव, बढ़ती नमी और वायु प्रदूषण ऐसे आम कारण हैं जिनकी वजह से बाल अचानक रूखे और बेजान होकर फ्रिज़ी (उलझे और फूले हुए) दिखाई देने लगते हैं। डैंड्रफ और हेयर फॉल के बाद फ्रिज़ी हेयर भारत में बालों से जुड़ी सबसे आम समस्याओं में से एक है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। खासकर मानसून के दौरान हवा में मौजूद नमी बालों की बाहरी परत (क्यूटिकल) को उठा देती है, जिससे बाल अधिक फ्रिज़ी दिखने लगते हैं। मौसम बदलने के दौरान अचानक होने वाली बारिश भी बालों की बनावट पर असर डाल सकती है।

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बालों की बनावट में यह बदलाव अक्सर स्कैल्प और उसकी संवेदनशील त्वचा से जुड़ा होता है। तापमान में अचानक होने वाले बदलाव स्कैल्प को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि मौसम एक बड़ा कारण है, लेकिन आपका खान-पान और रोजाना इस्तेमाल किए जाने वाले हेयर प्रोडक्ट्स भी फ्रिज़ को बढ़ा सकते हैं। सर्दियों में शुष्क हवा बालों को रूखा बना देती है और स्टैटिक पैदा करती है। इसके अलावा ऊनी टोपी या स्टोल से बालों को बार-बार ढकने से भी समस्या बढ़ सकती है। वहीं, शहरों का प्रदूषण बालों को कमजोर बनाकर उन्हें अधिक फ्रिज़ी बना सकता है।

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यदि आप ऐसे शैंपू का इस्तेमाल करते हैं जिनमें सल्फेट होता है, तो आपकी स्कैल्प सूखी हो सकती है। यह रूखापन फ्रिज़ी हेयर का कारण बन सकता है। इसलिए कई लोगों के लिए सल्फेट-फ्री शैंपू फायदेमंद हो सकते हैं क्योंकि ये बालों के प्राकृतिक तेल को बनाए रखने में मदद करते हैं। हालांकि हर व्यक्ति के बाल अलग होते हैं, इसलिए यह जरूरी नहीं कि सल्फेट-फ्री शैंपू सभी पर समान रूप से असर करें। यदि आप जानना चाहते हैं कि यह आपके लिए सही है या नहीं, तो कम से कम एक सप्ताह तक इसका इस्तेमाल करें और बालों की बनावट में होने वाले बदलाव पर ध्यान दें। जिन लोगों को सल्फेट से एलर्जी होती है, उनके बाल अधिक फ्रिज़ी हो सकते हैं।

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फ्रिज़ी बालों के लिए नारियल तेल या आर्गन ऑयल का इस्तेमाल भी लाभदायक माना जाता है। नारियल तेल बालों के अंदर तक जाकर उन्हें मजबूती और नमी देता है, जबकि आर्गन ऑयल बालों की सतह पर एक परत बनाकर उन्हें मुलायम और चमकदार बनाता है। नारियल तेल बालों में प्रोटीन की कमी को कम करने में मदद करता है, जबकि आर्गन ऑयल में मौजूद विटामिन ई और फैटी एसिड बालों की लोच बढ़ाते हैं और फ्रिज़ कम करते हैं। आप नारियल तेल को स्प्रे बोतल में भरकर आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं। बालों की लंबाई के अनुसार इसकी मात्रा तय करें और चाहें तो किसी अन्य कैरियर ऑयल के साथ मिलाकर भी लगा सकते हैं। तेल को ठंडी और नम जगह पर रखने से बचें।

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बाल धोने के बाद उन्हें सुखाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला तौलिया भी फ्रिज़ का कारण बन सकता है। सामान्य कॉटन तौलिये से होने वाला घर्षण बालों की बाहरी परत को नुकसान पहुंचाता है, जिससे वे अधिक उलझे और टूटने लगते हैं। इसके बजाय माइक्रोफाइबर तौलिया इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है क्योंकि यह मुलायम होता है और पानी जल्दी सोख लेता है। माइक्रोफाइबर तौलिये को पहचानने के लिए उसके टैग पर लिखी सामग्री देखें। उपयोग के बाद इसे धूप में अच्छी तरह सुखाना चाहिए ताकि इसमें बैक्टीरिया या फंगस न पनपें।

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फ्रिज़ी बाल कभी-कभी इस बात का संकेत भी हो सकते हैं कि आपके शरीर को बेहतर पोषण की जरूरत है। बाल मुख्य रूप से केराटिन नामक प्रोटीन से बने होते हैं और उन्हें स्वस्थ बनाए रखने के लिए ओमेगा-3, ओमेगा-6 और ओमेगा-9 फैटी एसिड, विटामिन ए, सी, डी, ई, बायोटिन, आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। भारत में आयरन और विटामिन डी की कमी काफी आम है, जिसका असर बालों की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। यदि आपको लगता है कि पोषण की कमी इसकी वजह हो सकती है, तो ब्लड टेस्ट करवाकर अपने पोषक तत्वों का स्तर जांच सकते हैं और किसी न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह ले सकते हैं। यदि पोषण सही होने के बावजूद बाल फ्रिज़ी रहते हैं, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहतर रहेगा।

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पर्याप्त पानी पीना और स्कैल्प की साफ-सफाई बनाए रखना भी बहुत जरूरी है। शरीर में पानी की कमी होने पर बाल सूखे और बेजान हो सकते हैं, जबकि अच्छी तरह हाइड्रेटेड बाल अधिक मुलायम और कम फ्रिज़ी होते हैं। साफ स्कैल्प प्राकृतिक तेलों को बालों में समान रूप से फैलने में मदद करती है, जिससे रूखापन कम होता है। जरूरत से ज्यादा हीट स्टाइलिंग और हेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल बालों की बाहरी परत को नुकसान पहुंचाकर फ्रिज़ बढ़ा सकता है। इसलिए नियमित रूप से पर्याप्त पानी पिएं और अपने बालों के प्रकार तथा मौसम के अनुसार हेयर वॉश का रूटीन बनाएं। सर्दियों में सप्ताह में एक या दो बार बाल धोना अधिकांश लोगों के लिए पर्याप्त होता है।

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कुछ घरेलू उपाय और जीवनशैली में बदलाव भी फ्रिज़ी बालों को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। एलोवेरा जेल और मेथी से बना हेयर मास्क स्कैल्प को पोषण देकर बालों की जड़ों को मजबूत बना सकता है। अत्यधिक हीट स्टाइलिंग से बचना चाहिए और मौसम के अनुसार ऐसे हेयरस्टाइल अपनाने चाहिए जो बालों को नुकसान से बचाएं। मानसून और मौसम बदलने के दौरान बालों की अतिरिक्त देखभाल करना जरूरी होता है। सही हेयर केयर रूटीन और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेकर फ्रिज़ी बालों की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।