गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन दिवाली और लक्ष्मी पूजा के अगले दिन आता है। इस वर्ष यह 22 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा करके कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। नीचे इस पावन दिन के कुछ महत्वपूर्ण नियम और परंपराएं दी गई हैं।
सुबह जल्दी उठकर तेल से मालिश करें और स्नान करें। फिर पूजा स्थल पर जाकर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करें।
भगवान श्रीकृष्ण और माता प्रकृति (गोवर्धन पर्वत) को प्रसन्न करने के लिए 56 प्रकार के व्यंजन (छप्पन भोग) का भोग लगाएं।
पूजा शुरू करने से पहले घर के बाहर गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाएं।
घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में दीपक जलाएं। यह परिवार में सुख, शांति और समृद्धि लाता है।
गोवर्धन पूजा पूरे परिवार के साथ मिलकर करनी चाहिए। अलग-अलग करना अशुभ माना जाता है।
अन्नकूट और गोवर्धन पूजा बंद कमरे में नहीं करनी चाहिए।
खास ध्यान रखें कि भोजन की बर्बादी न हो, विशेषकर अन्नकूट के प्रसाद की।
इस दिन चांद को देखना अशुभ माना जाता है, इसलिए ऐसा करने से बचें। यह पूजा भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, प्रकृति के प्रति सम्मान और परिवार की एकता का प्रतीक है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
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