किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके आधार नंबर को निष्क्रिय (डीएक्टिवेट) करना बहुत जरूरी है, ताकि पहचान की चोरी, धोखाधड़ी या सरकारी लाभों के गलत इस्तेमाल को रोका जा सके। यह जानकारी पीआईबी (PIB) की ओर से जारी की गई है।
यूआईडीएआई (UIDAI) ने पिछले वर्ष myAadhaar पोर्टल पर परिवार के सदस्य की मृत्यु की सूचना देने की सुविधा भी शुरू की थी। इस सुविधा के तहत परिवार का कोई सदस्य अपनी पहचान सत्यापित करने के बाद मृतक का आधार नंबर, मृत्यु पंजीकरण संख्या (Death Registration Number) और अन्य आवश्यक व्यक्तिगत जानकारी पोर्टल पर दर्ज कर सकता है।
परिवार द्वारा दी गई जानकारी की जांच और सत्यापन के बाद यूआईडीएआई मृत व्यक्ति के आधार नंबर को निष्क्रिय करने या न करने का निर्णय लेता है।
देश में पहचान संबंधी धोखाधड़ी को रोकने और सरकारी लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। आधार धारक अपने बायोमेट्रिक डेटा को लॉक कर सकते हैं, जिससे कोई भी अनधिकृत व्यक्ति आधार का उपयोग नहीं कर सकेगा। इसके अलावा, फेस ऑथेंटिकेशन में मौजूद लाइवनेस डिटेक्शन तकनीक यह सुनिश्चित करती है कि लेन-देन के समय लाभार्थी स्वयं मौजूद हो और किसी नकली तरीके से पहचान न की जाए।
यूआईडीएआई सुरक्षित पहचान सत्यापन के लिए आधार सिक्योर क्यूआर कोड, पेपरलेस ऑफलाइन ई-केवाईसी, ई-आधार और आधार आधारित ऑफलाइन सत्यापन सुविधाओं को बढ़ावा दे रहा है। साथ ही, यूआईडीएआई किसी भी स्थिति में आधार धारकों की मूल बायोमेट्रिक जानकारी साझा नहीं करता।
सभी संबंधित संस्थाओं के लिए आधार नंबरों को एन्क्रिप्टेड (सुरक्षित) रूप में संग्रहीत करने हेतु आधार डेटा वॉल्ट का उपयोग अनिवार्य किया गया है। मृत व्यक्तियों के आधार नंबरों की नियमित जांच कर उन्हें निष्क्रिय किया जाता है। इसके अलावा, आधार धारक की व्यक्तिगत जानकारी (डेमोग्राफिक डिटेल्स) में बदलाव केवल यूआईडीएआई द्वारा निर्धारित दस्तावेजों के आधार पर ही किया जा सकता है।
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