इस साल करवा चौथ शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। शुभ करवा चौथ पूजा मुहूर्त शाम 5:58 से 7:11 बजे तक रहेगा। व्रत सूर्योदय के समय सुबह 6:08 बजे शुरू होगा और रात में चांद निकलने के बाद 8:36 बजे समाप्त होगा।
इस दिन विवाहित महिलाएं सूर्योदय से लेकर चांद निकलने तक बिना खाना-पानी के व्रत रखती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि महिलाएं चांद और अपने पति को छलनी से क्यों देखती हैं? और इस साल पूजा करते समय वह कौन सी एक गलती है जिसे बिल्कुल नहीं करना चाहिए?
करवा चौथ का व्रत छलनी के बिना अधूरा है। जैसे ही चांद निकलता है, महिलाएं पहले छलनी से चांद को देखती हैं, फिर उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखकर व्रत तोड़ती हैं। लेकिन आखिर छलनी ही क्यों?
छलनी साफ़-सफाई और एकाग्रता का प्रतीक मानी जाती है। जैसे छलनी मोटे और बारीक दानों को अलग करती है और अशुद्धियों को हटाती है, वैसे ही करवा चौथ की छलनी बुरे विचारों और विकर्षणों को हटाकर सिर्फ शुद्धता दिखाती है। चांद को छलनी से देखना देवता से आशीर्वाद लेने का संकेत है, और उसी छलनी से पति को देखना उस पवित्र ऊर्जा को वैवाहिक बंधन में जोड़ने का प्रतीक है।
एक मान्यता यह भी है कि पुराने समय में महिलाएं सीधे पुरुषों की ओर नहीं देखती थीं, इसलिए वे घूंघट का इस्तेमाल करती थीं। करवा चौथ की पूजा में चंद्र देव की आराधना होती है, इसलिए यहां भी एक तरह का घूंघट जरूरी माना गया। छलनी उस घूंघट की तरह काम करती है – हल्की, पारदर्शी लेकिन सीधी नजर से बचाने वाली। कुछ घरों में पूजा के समय छलनी पर दीपक भी रखा जाता है।
कई बार महिलाएं उत्साह में पहले सीधे चांद को देख लेती हैं, लेकिन ऐसा करना परंपरा के अनुसार ठीक नहीं माना जाता। सही क्रम इस प्रकार है – पहले चांद को अर्घ्य (जल) अर्पित करें, फिर छलनी से चांद को देखें, उसके बाद उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखें और अंत में पति के हाथ से पानी या खाना लेकर व्रत खोलें।
अगर यह क्रम बिगड़ जाए तो पूजा का धार्मिक महत्व कम हो जाता है। इसलिए इस बार ध्यान रखें कि हर कदम सही तरीके से पूरा हो ताकि आपका करवा चौथ व्रत शुभ और पूर्ण हो।
पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए कुछ आसान सुझाव – व्रत से एक दिन पहले खूब पानी, नारियल पानी, फल और हल्का भोजन लें ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे। पारंपरिक लेकिन आरामदायक कपड़े पहनें, खासकर लाल, मरून या गुलाबी रंग शुभ माने जाते हैं। शाम को सामूहिक पूजा में ज़रूर शामिल हों, जहां सब मिलकर कथा सुनते हैं और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)
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