Navratri 2025 colours: नवरात्रि के 9 दिन और 9 रंग, जानिए माता रानी के 9 स्वरूपों के बारे में

नवरात्रि का नौ दिन का पावन त्योहार 22 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर तक मनाया जाएगा और इसका समापन विजयदशमी या दशहरे के साथ होगा। इस दौरान भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड23 Sep 2025, 03:08 PM IST
1/11

पूजा किए जाने वाले नौ स्वरूप मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कूष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री हैं। हर दिन एक देवी को समर्पित होता है और उससे जुड़ा एक विशेष रंग माना जाता है, जिसका आध्यात्मिक महत्व होता है।

2/11

पहला दिन – सफेद (मां शैलपुत्री): सफेद रंग पवित्रता और मासूमियत का प्रतीक है। इसे पहनने से मन को शांति और सुरक्षा मिलती है।

3/11

दूसरा दिन – लाल (मां ब्रह्मचारिणी): लाल रंग प्रेम, ऊर्जा और जोश का प्रतीक है। यह वही रंग है जो अक्सर देवी को चढ़ाई जाने वाली चुनरी का होता है।

4/11

तीसरा दिन – नीला (मां चंद्रघंटा): नीला रंग गहराई, शांति और सम्पन्नता का प्रतीक है। इस दिन इसे पहनकर विवाहित रूपी पार्वती यानी मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है।

5/11

चौथा दिन – पीला (मां कूष्मांडा): पीला रंग सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह बढ़ाता है। यह सौंदर्य और शांति का प्रतीक है।

6/11

पांचवां दिन – हरा (मां स्कंदमाता): हरा रंग नई शुरुआत, प्रकृति और शांति का प्रतीक है। इसे पहनने से मां कूष्मांडा सुख-शांति का आशीर्वाद देती हैं।

7/11

छठा दिन – धूसर/ग्रे (मां कात्यायनी): ग्रे रंग संतुलन और विनम्रता का प्रतीक है। इसे पहनकर मां स्कंदमाता की पूजा करने से मन स्थिर रहता है।

8/11

सातवां दिन – नारंगी (मां कालरात्रि): नारंगी रंग ऊर्जा, गर्मजोशी और उत्साह से भरा होता है। इसे पहनने से जीवन में सकारात्मकता आती है।

9/11

आठवां दिन – मोरपंखी हरा (मां महागौरी): यह रंग अनोखापन, करुणा और ताजगी का प्रतीक है।

10/11

नौवां दिन – गुलाबी (मां सिद्धिदात्री): गुलाबी रंग प्रेम, स्नेह और सामंजस्य का प्रतीक है। इसे पहनने से रिश्तों में अपनापन और करुणा बढ़ती है।

11/11

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)