अपनी बीमारियों को जड़ से ठीक करें और त्वचा से जुड़ी समस्याओं का मूल कारण दूर करके बेहतर स्वास्थ्य पाएं। आयुर्वेदिक स्किनकेयर भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति पर आधारित है, और इसके नुस्खे अलग-अलग त्वचा प्रकार और जरूरतों के अनुसार बनाए जाते हैं। आयुर्वेद और गट हेल्थ कोच डॉ. डिंपल जांघड़ा ने अपने हाल के इंस्टाग्राम पोस्ट में कुछ भरोसेमंद आयुर्वेदिक स्किनकेयर उपाय साझा किए।
कफ त्वचा की देखभाल: कफ प्रकृति वालों की त्वचा मुलायम और तैलीय होती है। उनकी स्किनकेयर दिनचर्या में सफाई और मॉइस्चराइजिंग ज़रूर शामिल होना चाहिए। चने के आटे और दूध से बने घरेलू फेस स्क्रब का इस्तेमाल करके पोर्स को साफ रखा जा सकता है।
उपाय: उबटन जैसे चने का आटा, मुल्तानी मिट्टी और औषधीय पाउडर से सूखी मालिश (उद्वर्तन) करें। इसके अलावा, ड्राई ब्रशिंग से त्वचा के नीचे जमी चर्बी को कम करने में मदद मिलती है। पानी-आधारित मॉइस्चराइज़र का इस्तेमाल करें।
पित्त त्वचा की देखभाल: पित्त प्रकृति वालों को सख्त स्किनकेयर रूटीन की ज़रूरत होती है। चेहरे पर तेल-आधारित या ऐसे उत्पादों से मालिश करें जो त्वचा का pH संतुलन बनाए रखें और अतिरिक्त तेल को नियंत्रित करें।
उपाय: ऐसा एक्सफोलिएटर चुनें जो हल्का हो और त्वचा पर रगड़ न पहुंचाए। यह पोर्स में जमा बैक्टीरिया और सीरम को हटाने में मदद करे। उसके बाद गुलाबजल जैसे कसैले तत्व से पोर्स बंद करें और फिर पानी-आधारित मॉइस्चराइज़र लगाएं।
वात त्वचा की देखभाल: वात प्रकृति वालों की त्वचा और बाल बहुत सूखे और रूखे होते हैं, इसलिए तेल या घी से शरीर की मालिश फायदेमंद रहती है। सप्ताह में 2-3 बार पूरे शरीर पर एक घंटे पहले तेल की मालिश करें।
उपाय: त्वचा पर कोल्ड-प्रेस्ड तेल या घी का प्रयोग करें। कठोर क्लेंज़र से बचें। कभी-कभी उबटन को दही के साथ मिलाकर लगा सकते हैं। अंत में तेल-आधारित मॉइस्चराइज़र जरूर लगाएं।
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