Story of the day : आज मनुष्य जीवन को नियंत्रित करना चाहता है, पर अंत के क्षण से आंखें मूंद लेता है। भीष्म का संदेश सीधा है कि जो अपने भीतर के राजा को साध ले, बाहर की कोई पराजय उसे विचलित नहीं कर सकती। प्रश्न यह नहीं कि मृत्यु कब आएगी। प्रश्न यह है कि जब वह आए, तब क्या आप उसके स्वामी होंगे या दास?
2 min read10:21 AM ISTStory of the day : यह कथा केवल अतीत की नहीं। हर वह व्यक्ति जो दायित्व के भार से थककर 'सब छोड़ देता हूं' कहता है, किसी न किसी रूप में युधिष्ठिर है। क्या यह सचमुच वैराग्य है, या केवल थका हुआ पलायन?
2 min read17 May 2026Story of the day : कृष्ण इस महायुद्ध के सबसे बड़े रणनीतिकार थे। जब अभियोग उन पर आया, उन्होंने तर्क की ढाल नहीं उठाई, न दोष किसी और पर डाला। नेतृत्व की सबसे कठिन परीक्षा यही है कि परिणाम का भार अपने कंधे पर लेना। जो शिखर पर बैठकर निर्णय लेता है, उसे परिणाम की पीड़ा से मुख नहीं मोड़ना चाहिए।
3 min read16 May 2026Story of the day : महाभारत का यह प्रसंग एक प्रश्न छोड़ जाता है कि क्या हमारी विजयें भी ऐसी ही रिक्त सिंहासन तो नहीं, जहां बैठने वाला हो, पर देखने वाला कोई न हो?
3 min read15 May 2026Story of the day : आधुनिक जीवन में अश्वत्थामा बहुत हैं। क्रोध में अनुचित करते हुए बहुत सुख प्राप्त होता है। परंतु उस क्षण का सुख क्षणिक होता है। वह वचन, वह संदेश, वह चाल भीतर सदा घूमती रहती है। यही अश्वत्थामा का शाप है। मनुष्य उसे अपने भीतर वहन करता है, और जानता तक नहीं।
3 min read13 May 2026Story of the day : महाभारत में दुर्योधन का अंत यह सिखाता है कि इतिहास केवल विजेताओं को नहीं, गरिमापूर्ण हारने वालों को भी स्मरण करता है। कर्ण की तरह, भीष्म की तरह, दुर्योधन भी उन पात्रों में है जो पराजित हुए, पर विस्मृत नहीं हुए।
3 min read12 May 2026Story of the day : धर्म केवल बाहर नहीं होता, वह भीतर भी एक रथ चलाता है। और जिस दिन वह रथ जमीन पर उतर आए, उस दिन जानना चाहिए कि कुछ टूट गया।
3 min read11 May 2026Story of the day : हम प्रायः देखते हैं कि सेवानिवृत्ति, रोग, या वृद्धावस्था आते ही व्यक्ति अपने को निरर्थक मान लेता है। भीष्म का शरशैया-प्रसंग उस सोच को चुनौती देता है। ज्ञान की आयु नहीं होती। अनुभव की समाप्ति नहीं होती। जब तक श्वास है, जब तक चेतना है, तब तक देने का सामर्थ्य भी है।
3 min read10 May 2026Story of the day : कर्ण की मृत्यु यह प्रश्न छोड़ जाती है कि क्या व्यवस्था से लड़ने का मार्ग असत्य का सहारा लेना है, या सत्य के साथ उस व्यवस्था को ही बदलने का साहस?
4 min read9 May 2026Story of the day : कर्ण के रथ-चक्र का धंसना एक रूपक है। वह रथ-चक्र हर उस मनुष्य का है जो जीवन-पथ पर तब तक सरपट दौड़ता है, जब तक उसके अपने अकृत्य उसे धरती की ओर खींचने न लगें।
3 min read4 May 2026Oops! Looks like you have exceeded the limit to bookmark the image. Remove some to bookmark this image.