19 Minute Viral Clip MMS: पिछले कुछ महीनों से सोशल मीडिया पर अजीबोगरीब ट्रेंड देखने को मिल रहा है। पहले 19 मिनट वायरल वीडियो फिर 7 मिनट वायरल वीडियो और अब एक नया कीवर्ड 9 मिनट MMS ट्रेंड कर रहा है। इन सभी कीवर्ड के साथ ही लिंक भी शेयर हो रहे हैं। कुछ लोग उत्सुकता में इन लिंक पर क्लिक कर दे रहे हैं और फिर यहां से साइबर ठगी के असली खेल की शुरुआत हो रही है।
अब साइबर ठगों ने एक नया हथकंडा अपनाया है, जिसमें वो लोगों को ऐसे कीवर्ड के साथ एक लिंक शेयर कर रहे हैं। अगर कोई इस लिंक पर क्लिक करता है, तो उसकी पूरी डिटेल साइबर ठगों के पास पहुंच जा रही है और फिर वो लोगों की डिटेल चुरा लेते हैं।
कैसे साइबर ठगों के जाल में फंस रहे लोग?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आए दिन कोई न कोई वीडियो वायरल होता है। उसमें दावा किया जाता है कि सेलिब्रिटी, नेता या आम शख्स का निजी वीडियो लीक हुआ है। जैसे ही कोई लिंक पर क्लिक करता है, तो वो उसे एक फर्जी वेबसाइट पर ले जाता है। वहां पर एक थमनेल लगा होता है। जैसे ही यूजर उस थमलेन पर क्लिक करता है, तो उस फिशिंग लिंक से ठग यूजर का डिवाइस हैक कर लेता है। उसके बाद साइबर ठग सारी डिटेल डिवाइस से निकालता है और फिर यूजर का बैंक अकाउंट साफ कर देता है। कई बार साइबर ठग डिवाइस से निजी जानकारी चुराकर ब्लैकमेल भी करते हैं।
क्यों चुना जाता है ‘19 मिनट’ या ‘7 मिनट’?
साइबर विशेषज्ञ बताते हैं कि वीडियो की सटीक अवधि लिखने से लोगों को लगता है कि यह असली है। जैसे 19:34 मिनट का वीडियो या 7:11 मिनट का MMS। ये मनोवैज्ञानिक ट्रिक है, जब कोई चीज बहुत सटीक लगती है, तो लोग उसे सच मानने लगते हैं।यही कारण है कि ठग इन अजीबो-गरीब टाइम ड्यूरेशन का इस्तेमाल करते हैं।