आधार में जन्मतिथि बदलने वालों के लिए जरूरी खबर, दूसरी बार सुधार पर होगी कड़ी जांच, जानिए UIDAI के नियम

UIDAI ने आधार में जन्मतिथि बदलने के नियम स्पष्ट किए हैं। जन्मतिथि दूसरी या उससे अधिक बार भी बदली जा सकती है, लेकिन इसके लिए विशेष प्रक्रिया और कड़ी जांच होगी। पहले दिए दस्तावेज के अनुसार जन्म प्रमाण पत्र या सुधरा दस्तावेज देना पड़ सकता है।

Manali Rastogi
अपडेटेड2 Sep 2026, 07:21 AM IST
आधार कार्ड की सांकेतिक तस्वीर
आधार कार्ड की सांकेतिक तस्वीर

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी UIDAI ने आधार में जन्मतिथि बदलने से जुड़े नियमों को स्पष्ट किया है। इसमें यह भी बताया गया है कि अगर किसी व्यक्ति को जन्मतिथि में एक से ज्यादा बार सुधार कराना हो तो क्या प्रक्रिया होगी।

UIDAI के अनुसार, जन्मतिथि में बदलाव के अनुरोधों की कोई तय संख्या निर्धारित नहीं है। हालांकि, दूसरी या उसके बाद की बार जन्मतिथि बदलने का अनुरोध सामान्य सुधार नहीं माना जाता। ऐसे मामलों में अधिक कड़ी जांच की जाती है।

यह जानकारी उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके आधार में जन्मतिथि गलत या अनुमान के आधार पर दर्ज है और वे उसमें सुधार कराना चाहते हैं।

क्या आधार में एक से ज्यादा बार जन्मतिथि बदल सकते हैं?

हां, आधार में जन्मतिथि को दोबारा बदला जा सकता है। लेकिन दूसरी या उसके बाद की बार किया गया बदलाव विशेष परिस्थिति में ही स्वीकार किया जाता है।

24 दिसंबर 2025 को जारी UIDAI की मानक प्रक्रिया के अनुसार, विशेष परिस्थितियों में आधार धारक दोबारा जन्मतिथि बदलने का अनुरोध कर सकता है। इसकी प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि पहले जन्मतिथि दर्ज कराने या बदलवाने के लिए कौन सा दस्तावेज दिया गया था।

अगर पहले जन्मतिथि किसी अन्य दस्तावेज के आधार पर दर्ज की गई थी और अब उसमें दोबारा सुधार कराना है, तो सामान्य तौर पर जन्म प्रमाण पत्र देना होगा।

वहीं, अगर पहले ही जन्म प्रमाण पत्र दिया गया था, तो अब उसी जन्म पंजीकरण संख्या वाला सुधरा हुआ जन्म प्रमाण पत्र देना होगा। यह प्रमाण पत्र उसी पंजीयक द्वारा जारी होना चाहिए। इसके साथ शपथ पत्र भी देना होगा। इसका मतलब है कि केवल कोई दूसरा पहचान दस्तावेज देकर अलग जन्मतिथि दर्ज कराना पर्याप्त नहीं हो सकता।

जन्म प्रमाण पत्र सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज

UIDAI की प्रक्रिया के अनुसार, जन्मतिथि का कानूनी प्रमाण जन्म प्रमाण पत्र है। एक बार जन्म प्रमाण पत्र को जन्मतिथि के प्रमाण के तौर पर जमा करने के बाद सामान्य परिस्थितियों में दोबारा जन्मतिथि बदलने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

अगर जन्म प्रमाण पत्र में ही गलती है, तो सुधरा हुआ जन्म प्रमाण पत्र देना होगा। उसमें वही जन्म पंजीकरण संख्या होनी चाहिए और उसे उसी पंजीयक द्वारा जारी किया गया होना चाहिए।

अगर पहले जन्मतिथि किसी दूसरे मान्य दस्तावेज, जैसे अंकपत्र या पासपोर्ट के आधार पर तय हुई थी, तो परिस्थिति के अनुसार उसी दस्तावेज का सुधरा हुआ रूप या जन्म प्रमाण पत्र देना पड़ सकता है।

अगर गलती आधार संचालक से हुई हो तो क्या होगा?

UIDAI ने आधार में हुई वास्तविक गलती और जानबूझकर जन्मतिथि बदलने के अनुरोध के बीच अंतर किया है।

मान लीजिए आधार बनवाते समय आपने जन्मतिथि के प्रमाण के तौर पर कोई दस्तावेज दिया था, लेकिन आधार में उससे अलग जन्मतिथि दर्ज हो गई। ऐसी स्थिति को आधार संचालक की गलती माना जा सकता है।

ऐसे मामलों में पहले जमा किए गए जन्मतिथि के प्रमाण की जांच की जा सकती है। अगर वह दस्तावेज मौजूदा नियमों के तहत मान्य नहीं है या आधार धारक के पास उपलब्ध नहीं है, तो UIDAI कुछ परिस्थितियों में स्वघोषणा के आधार पर भी सुधार की अनुमति दे सकता है। स्वघोषणा में यह बताया जाता है कि आधार संचालक की गलती के कारण जन्मतिथि गलत दर्ज हो गई थी।

अगर पहले जानबूझकर गलत जन्मतिथि दी गई थी तो?

UIDAI ने उन मामलों के लिए भी नियम बताए हैं, जिनमें किसी व्यक्ति ने पहले गलत या धोखे से हासिल किए गए दस्तावेज के आधार पर गलत जन्मतिथि दर्ज कराई थी। ऐसे व्यक्ति को जन्मतिथि सही कराने का अंतिम अवसर दिया जा सकता है। हालांकि, मामला सामने आने पर संबंधित आधार को निष्क्रिय किया जा सकता है।

आधार को दोबारा सक्रिय कराने के लिए वास्तविक और ऑनलाइन सत्यापन योग्य जन्मतिथि प्रमाण देना होगा। इसके साथ जरूरी शपथ पत्र भी जमा करना होगा। मामले की परिस्थितियों के आधार पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। इसमें प्राथमिकी दर्ज करना भी शामिल है।

UIDAI की प्रक्रिया का उद्देश्य वास्तविक गलतियों को सुधारने की सुविधा देना और आधार के आंकड़ों की विश्वसनीयता बनाए रखना है।

गलत उम्र बताकर आधार बनवाने पर क्या होगा?

UIDAI ने गलत उम्र की श्रेणी में आधार बनवाने के मामलों के लिए भी अलग सुरक्षा व्यवस्था रखी है। उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति ने शून्य से पांच वर्ष की उम्र वाली श्रेणी में आधार बनवाया था, लेकिन बाद में जन्मतिथि में ऐसा बदलाव मांगा गया जिससे पता चले कि आधार बनवाते समय उसकी उम्र पांच वर्ष से ज्यादा थी, तो इसे संभावित फर्जी नामांकन का मामला माना जा सकता है।

इसी तरह, अगर किसी व्यक्ति ने पांच से 18 वर्ष की उम्र वाली श्रेणी में आधार बनवाया था और बाद में जन्मतिथि में बदलाव से यह पता चलता है कि आधार बनवाते समय उसकी उम्र 18 वर्ष से ज्यादा थी, तो ऐसे मामले की भी गहन जांच हो सकती है।

ऐसे अनुरोधों को अस्वीकार किया जा सकता है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आधार निष्क्रिय किया जा सकता है और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

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