दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों गर्मी तेजी से बढ़ रही है। तापमान लगातार ऊपर जा रहा है और लोगों को मार्च की शुरुआत में ही गर्मी का असर महसूस होने लगा है। मौसम विभाग के मुताबिक आज दिल्ली-एनसीआर में अधिकतम तापमान करीब 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान लगभग 19 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।
बीते 24 घंटों में लगभग 17 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं, लेकिन इसके बावजूद गर्मी से राहत नहीं मिल सकी। हालांकि अब मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।
मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में दिल्ली-एनसीआर के मौसम में हल्का बदलाव देखने को मिल सकता है। कुछ इलाकों में हल्की बारिश होने की संभावना है, जिससे तापमान में थोड़ी गिरावट आ सकती है और लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है।
मार्च के महीने में जहां तेज धूप और गर्म हवाएं लोगों को परेशान कर रही हैं, वहीं संभावित बारिश मौसम को कुछ हद तक सुहावना बना सकती है। इस बारिश को लेकर तारीखों का संकेत भारत मौसम विज्ञान विभाग और स्काईमेट वेदर की ओर से दिया गया है।
स्काईमेट वेदर प्राइवेट लिमिटेड के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. महेश पलावत के अनुसार देश के कई हिस्सों में इस समय तेज गर्मी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि जल्द ही प्री-मानसून गतिविधियां शुरू हो सकती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी बढ़ने के आसार हैं।
साथ ही 15 मार्च के आसपास हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र समेत पूर्वी और दक्षिण भारत के कई राज्यों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है।
इसी बीच दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों विजिबिलिटी कम होने और हवा में धूल बढ़ने को लेकर भी चर्चा हो रही है। डॉ. महेश पलावत ने बताया कि इसकी मुख्य वजह पश्चिम दिशा से चलने वाली तेज हवाएं हैं। ये हवाएं 5 से 7 मार्च के बीच बलूचिस्तान, मध्य पाकिस्तान और थार मरुस्थल की धूल को अपने साथ लेकर उत्तर भारत और दिल्ली तक पहुंचा रही थीं।
उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दो दिनों से हवाओं की गति कम हो गई है, जिसके कारण हवा में मौजूद धूल नीचे बैठने लगी है। कुछ लोग यह दावा कर रहे हैं कि ईरान की किसी रिफाइनरी पर हुई बमबारी का धुआं भारत तक पहुंच रहा है, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह दावा सही नहीं है। मौजूदा हवा की दिशा ऐसी नहीं है कि वह धुआं दिल्ली तक ला सके। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंचाई पर चल रही हवाएं उस धुएं को चीन और रूस की दिशा में ले जा सकती हैं।