AC on Mileage Rules: जितना बताया उतना नहीं है माइलेज? अब सरकार ला रही है नया नियम, जानें क्या बदलेगा

AC on Mileage Rules: गाड़ियों के असली माइलेज को ज्यादा भरोसेमंद बनाने के लिए सरकार जल्द ही नए नियम लाने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही कार सेफ्टी से जुड़े मानकों में भी आने वाले समय में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

Priya Shandilya
अपडेटेड16 Jan 2026, 05:20 PM IST
गाड़ियों के माइलेज को लेकर जल्द बनेंगे नए नियम (सांकेतिक तस्वीर)
गाड़ियों के माइलेज को लेकर जल्द बनेंगे नए नियम (सांकेतिक तस्वीर)

Car Mileage New Rules: गाड़ी खरीदते वक्त हर कोई सबसे पहले माइलेज पूछता है। लेकिन अक्सर जो आंकड़े कंपनी बताती है, वो सड़क पर चलाने पर खरे नहीं उतरते। खासतौर पर तब, जब एसी ऑन हो। इसी फर्क को कम करने के लिए सरकार अब माइलेज टेस्टिंग के तरीके में बड़ा बदलाव करने जा रही है, ताकि ग्राहकों को सही आंकड़े मिल सकें।

क्या बदलने जा रहा है?

यूनियन रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री ने प्रस्ताव दिया है कि 1 अक्टूबर 2026 से भारत में बिकने वाली सभी पैसेंजर कारों का माइलेज टेस्ट एसी ऑन करके किया जाएगा। अभी तक अधिकतर टेस्ट बिना एसी के होते हैं, जिससे कंपनियों के बताए गए आंकड़ों और असली सड़क के माइलेज में बड़ा अंतर रह जाता है।

ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, M1 कैटेगरी यानी पैसेंजर गाड़ियों के लिए माइलेज टेस्ट अब AIS-213 स्टैंडर्ड के तहत होगा। इसमें कार का एसी चालू रहेगा और उसी स्थिति में फ्यूल एफिशिएंसी मापी जाएगी। आज के समय में ज्यादातर लोग बिना एसी गाड़ी नहीं चलाते, ऐसे में यह बदलाव ग्राहकों को ज्यादा भरोसेमंद माइलेज डेटा देगा और कंपनियों पर सख्त कंप्लायंस लागू करेगा। सरकार ने इस ड्राफ्ट पर 30 दिन तक आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं।

सेफ्टी नियम भी होंगे सख्त

सरकार ने Bharat NCAP 2 के तहत गाड़ियों की सेफ्टी रेटिंग्स को भी नया रूप देने का प्रस्ताव रखा है। ये नए सेफ्टी नियम 1 अक्टूबर 2027 से लागू होंगे। नई व्यवस्था में गाड़ियों की रेटिंग अब पांच पैमानों पर होगी- क्रैश प्रोटेक्शन, पैदल यात्रियों की सुरक्षा, सेफ ड्राइविंग फीचर्स, क्रैश अवॉयडेंस और हादसे के बाद की सुरक्षा। पहली बार यूरोपियन स्टैंडर्ड्स की तरह पैदल यात्रियों और दोपहिया सवारों की सुरक्षा को भी अहमियत दी जाएगी। इसमें वल्नरेबल रोड यूजर्स (VRU) की सुरक्षा को 20% वेटेज दिया गया है, जो यूरोपियन स्टैंडर्ड के करीब है।

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित भट्ट ने कहा कि 10–15 साल पहले एसी हर गाड़ी में नहीं होता था और लोग कम इस्तेमाल करते थे। लेकिन अब एसी आम हो गया है। इसलिए टेस्टिंग भी उसी हिसाब से होनी चाहिए ताकि लैब और असली सड़क के नतीजे में फर्क न रहे।

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