Adani Embraer Deal: देश का दिग्गज अडानी ग्रुप और ब्राजील की एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनी एम्ब्रेयर ने एक बड़ी साझेदारी की है। इस रणनीतिक सहयोग का मकसद भारत में ही रीजनल एयरक्राफ्ट के लिए एक माडर्न मैन्युफैक्चरिंग फैसिल्टी बनाना है। इस पार्टनरशिप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि दोनों कंपनियां भारत में ही फाइनल असेंबली लाइन'(FAL) स्थापित करने जा रही हैं। इसका मतलब है कि अब भारत में ही कमर्शियल एयरक्राफ्ट बनाए जाएंगे। दोनों कंपनियों के बीच यह डील मेड इन इंडिया की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आइए इस साझेदारी को 5 पॉइंट्स में सझते हैं।
1.छोटे शहरों में हवाई यात्रा होगी आसान
एम्ब्रेयर 70-140 सीट्स वाले एयरक्राफ्ट बनाने में महारत रखती है। ऐसे विमान छोटे शहरों की कनेक्टिविटी के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। अडानी ग्रुप के इस कदम से टियर-2 और टियर-3 शहरों के बीच हवाई यात्रा आसान और सस्ती होने की उम्मीद है।
2.माडर्न टेक्नोलॉजी सीखेंगे भारतीय इंजीनियर्स
नागर विमानन सचिव समीर कुमार सिन्हा ने साफ किया है कि यह पार्टनरशिप केवल पुर्जों को जोड़ने तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और स्किल डेवलपमेंट भी शामिल है। इसका मतलब है कि भारतीय इंजीनियरों को एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग की सबसे माडर्न टेक्नोलॉजी सीखने का मौका मिलेगा।
3.किस राज्य मेें लगेगा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट
इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए निवेश के वित्तीय आंकड़ों का खुलासा नहीं किया गया है। लेकिन अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के डायरेक्टर जीत अडानी ने संकेत दिए हैं कि कई संभावित जगहों पर विचार चल रहा है। अगले कुछ महीनों में यह साफ हो जाएगा कि भारत का यह विमान विनिर्माण संयंत्र किस राज्य में लगाया जाएगा।
4.दूसरे देशों में भी निर्यात होंगे विमान
नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने इस साझेदारी को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि भारत में निवेश करने का यह सबसे सही समय है। दिलचस्प बात यह है कि यहां बनने वाले विमानों का इस्तेमाल न केवल भारत में होगा, बल्कि इन्हें दक्षिण एशियाई देशों के बाजारों में भी निर्यात किया जा सकता है।
5.20 सालों में 500 विमानों की जरूरत
एम्ब्रेयर के लिए भारत कोई नया बाजार नहीं है। साल 2005 से ही इसके विमान भारतीय वायु सेना और स्टार एयर जैसी कंपनियों की सेवा में हैं। कंपनी का अनुमान है कि अगले 20 सालों में भारत को 80 से 146 सीटों वाले कम से कम 500 नए विमानों की जरूरत होगी। इसी डिमांड को देखते हुए अडानी के साथ यह एग्रीमेंट किया गया है।