
देश में युवाओं की अचानक मौत एक डरावनी सच्चाई बन गई है। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हैं जिनमें कोई नाचते हुए तो कोई जिम में वर्कआउट करते हुए गिर जा रहे हैं। लोग अक्सर इसे कोविड वैक्सीन या स्ट्रेस से जोड़कर देखते हैं। इसी रहस्य से पर्दा उठाने के लिए दिल्ली एम्स ने एक विस्तृत अध्ययन किया। इस स्टडी के नतीजे चौंकाने वाले हैं और बताते हैं कि आखिर क्यों फिट दिखने वाले युवा भी अचानक दम तोड़ रहे हैं।
देश में अचानक होने वाली मौतों का कोई नेशनल डेटा उपलब्ध नहीं है। इसलिए एम्स के फॉरेंसिक और पैथोलॉजी विभाग ने मई 2023 से अप्रैल 2024 के बीच हुए 2,214 पोस्टॉर्टम का बारीकी से विश्लेषण किया। इस रिसर्च में केवल बाहरी जांच ही नहीं, बल्कि अंगों के सैंपल, माइक्रोस्कोपिक जांच और रेडियोलॉजिकल इमेजिंग का भी सहारा लिया गया। साथ ही उनके परिजनों से बातचीत कर पुरानी बीमारियों और लाइफस्टाइल की जानकारी भी जुटाई गई।
जांच में 180 केस ऐसे मिले जो 'सडन डेथ' की परिभाषा में फिट बैठते थे। इनमें से 57.2 प्रतिशत मौतें 18 से 45 साल की उम्र के लोगों की थीं। मरने वालों में पुरुषों की संख्या सबसे ज्यादा थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से अधिकतर लोग मरने से कुछ समय पहले तक बिल्कुल स्वस्थ दिख रहे थे। उनकी मौत घर पर, सफर के दौरान या नींद में ही हो गई।
स्टडी के अनुसार, युवाओं में अचानक होने वाली 42.6 प्रतिशत मौतों का कारण दिल की बीमारियां थीं। फॉरेंसिक जांच में पाया गया कि इन युवाओं की धमनियों में 70 प्रतिशत से ज्यादा ब्लॉकेज था। इसे 'कोरोनरी आर्टरी डिजीज' कहा जाता है। सबसे ज्यादा ब्लॉकेज 'लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग आर्टरी' (LAD) में मिला, जिसे मेडिकल भाषा में जानलेवा माना जाता है। डराने वाली बात यह है कि इनमें से किसी को भी अपनी इस बीमारी का पहले से पता नहीं था।
करीब 21.3 प्रतिशत केस ऐसे भी थे, जहां शरीर के सभी अंगों की गहन जांच के बाद भी मौत की कोई ठोस वजह सामने नहीं आई। इसे 'नेगेटिव ऑटोप्सी' कहा जाता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसी मौतें दिल की धड़कन बिगड़ने (Electrical disorders) की वजह से होती हैं। यह समस्या जेनेटिक हो सकती है, जो शरीर की बनावट में कोई बदलाव नहीं करती, इसलिए पोस्टमार्टम में पकड़ में नहीं आती।
अचानक होने वाली मौतों के पीछे सिर्फ दिल ही इकलौता कारण नहीं है। स्टडी के मुताबिक...
सांस की बीमारी: 21.3 प्रतिशत मौतें टीबी और निमोनिया जैसी बीमारियों के कारण हुईं।
अल्कोहल का असर: ज्यादा शराब पीने वालों में नींद के दौरान उल्टी के फेफड़ों में फंसने (Asphyxia) से भी मौतें हुईं।
अन्य कारण: पेट में इन्फेक्शन (Pancreatitis), इंटरनल ब्लीडिंग और महिलाओं में प्रेग्नेंसी से जुड़ी जटिलताएं भी अचानक मौत की वजह बनीं।
आंकड़ों के मुताबिक 55 प्रतिशत मौतें घर पर हुईं, जबकि 30 प्रतिशत लोग सफर के दौरान अपनी जान गंवा बैठे। लगभग 40 प्रतिशत मामले रात या तड़के सुबह के हैं, जब मरीज को समय पर मदद नहीं मिल सकी। हफ्ते के दिनों में बुधवार और गुरुवार को सबसे ज्यादा मौतें दर्ज की गईं। लक्षणों की बात करें तो सिर्फ सीने में दर्द ही नहीं, बल्कि बेहोशी, सांस फूलना और एसिडिटी जैसे लक्षण भी हार्ट अटैक का संकेत निकले।
इस स्टडी ने एक बड़े भ्रम को भी दूर कर दिया है। एम्स के शोधकर्ताओं ने पाया कि अचानक होने वाली इन मौतों का कोविड संक्रमण या उसकी वैक्सीन से कोई सीधा संबंध नहीं है। वैक्सीनेशन का डेटा चेक करने पर पाया गया कि जिन लोगों ने वैक्सीन ली थी और जिन्होंने नहीं ली थी, दोनों में रिस्क एक जैसा ही था।
पीएसआरआई (PSRI) हार्ट इंस्टीट्यूट के डॉ. केके तलवार का कहना है कि यह स्टडी युवाओं में बढ़ती हार्ट डिजीज की गंभीर चेतावनी है। उनका सुझाव है कि अगर परिवार में किसी की अचानक मौत हुई है, तो अन्य सदस्यों को अपनी जेनेटिक जांच और रेगुलर हेल्थ चेकअप जरूर कराना चाहिए। फिट महसूस करने का मतलब यह नहीं है कि आप अंदर से पूरी तरह स्वस्थ हैं।
Disclaimer: यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। स्वास्थ्य संबंधी कोई भी निर्णय प्रमाणित चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सुझाव के आधार पर ही लें। आपके किसी भी कार्य या निर्णय के लिए मिंट हिंदी तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।
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