
Khamenei killed: ईरान पर इजरायल और अमेरिका के संयुक्त सैन्य हमले में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। इस खबर की टाइमिंग ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। खासकर इजरायल के नजरिए से देखें तो इस सैन्य कार्रवाई का 'पुरीम' (Purim) के त्योहार से ठीक पहले होना महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक गहरा प्रतीकात्मक संदेश माना जा रहा है। जानिए पुरीम का इतिहास, इसका ईरान से कनेक्शन और वर्तमान युद्ध में इसका महत्व।
पुरीम यहूदी समुदाय का एक प्रमुख त्योहार है, जो हिब्रू कैलेंडर के अदार महीने की 14 तारीख को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह 2 मार्च की शाम से शुरू होकर 3 मार्च की शाम तक रहेगा। इस पर्व की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि प्राचीन फारसी साम्राज्य (आज का ईरान) से जुड़ी है। यह त्योहार यहूदियों के विनाश की साजिश से बचने और उनके अस्तित्व की रक्षा की स्मृति में मनाया जाता है।
बाइबल के ग्रंथ बुक ऑफ एस्थर के अनुसार, फारसी साम्राज्य के मंत्री हामन ने साम्राज्य में रहने वाले सभी यहूदियों को खत्म करने की योजना बनाई थी। लेकिन रानी एस्थर और उनके चाचा मोर्दकै के हस्तक्षेप से यह साजिश नाकाम हुई। आखिर में हामन को दंड मिला और यहूदी समुदाय बच गया। इसलिए पुरीम को बुराई पर अच्छाई की जीत और अस्तित्व की रक्षा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
जब खामेनेई के मारे जाने की खबर पुरीम से ठीक पहले सामने आई, तो कुछ विश्लेषकों ने इसे ऐतिहासिक प्रतीकवाद के संदर्भ में देखा। चूंकि पुरीम की कथा प्राचीन फारस से जुड़ी है और आधुनिक ईरान उसी भूभाग का उत्तराधिकारी माना जाता है, इसलिए कुछ टिप्पणीकार इसे ऐतिहासिक समानता के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
इजरायल के राजनीतिक भाषणों में भी अतीत के संदर्भों का उपयोग होता रहा है, विशेषकर ईरान को लेकर। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी सैन्य कार्रवाई के समय को सीधे धार्मिक कैलेंडर से जोड़ने के लिए कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है।
रिपब्लिकन ज्यूइश कोएलिशन के नेशनल चेयरमैन नॉर्म कोलमैन और सीईओ मैट ब्रूक्स ने कहा कि अमेरिका ने “आधुनिक दौर के हमान” को खत्म कर दिया है, और यह सब यहूदी त्योहार पुरिम की पूर्व संध्या पर हुआ। उनका इशारा पुरिम की ऐतिहासिक कहानी की ओर था, जिसमें हमान को यहूदियों के विनाश की साजिश रचने वाला माना जाता है।
संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के राजदूत डैनी डैनन ने यूएन सुरक्षा परिषद में कहा कि “इस हफ्ते दुनिया भर के यहूदी परिवार पुरिम मनाएंगे।” उन्होंने कहा कि कई इजरायली इस बार बम शेल्टर में रहकर त्योहार मनाएंगे। डैनन ने याद दिलाया कि पुरिम की कहानी 2,500 साल पहले प्राचीन फारस में हुई थी, जब एक मंत्री हमान ने यहूदी समुदाय को मिटाने की कोशिश की थी।
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य अभियानों की योजना आमतौर पर रणनीतिक, खुफिया और सुरक्षा कारणों से बनाई जाती है, न कि धार्मिक तिथियों के आधार पर। ऐतिहासिक प्रतीकों का इस्तेमाल राजनीतिक बयानबाजी में किया जा सकता है, लेकिन किसी भी सैन्य कार्रवाई को धार्मिक उद्देश्य से जोड़ने के लिए ठोस प्रमाण आवश्यक होते हैं।
कुछ विश्लेषकों के अनुसार, यदि टाइमिंग को प्रतीकात्मक रूप से देखा जाए, तो यह ईरान के लिए एक मनोवैज्ञानिक संदेश हो सकता है। दूसरी ओर, आलोचकों का तर्क है कि ऐसे प्रतीकात्मक अर्थ निकालना अतिरंजित भी हो सकता है और इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है। इसलिए फिलहाल इसे एक संभावित व्याख्या के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि स्थापित तथ्य के रूप में।
पुरीम का ऐतिहासिक संबंध प्राचीन फारस से है, और इसलिए ईरान-इजरायल तनाव के बीच इसकी चर्चा स्वाभाविक है। लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि सैन्य कार्रवाई का समय धार्मिक प्रतीकवाद से प्रेरित था या यह महज रणनीतिक परिस्थितियों का परिणाम था। इतिहास और वर्तमान राजनीति के इस संगम को समझने के लिए संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है क्योंकि मध्य पूर्व की राजनीति में प्रतीक, शक्ति और रणनीति अक्सर एक-दूसरे से गहराई से जुड़े होते हैं।
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