Amavasya kab ki hai: 16 या 17 अप्रैल...कब है वैशाख अमावस्या? जानिए सही तिथि, स्नान-दान मुहूर्त और पूजा विधि

वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन सुबह स्नान, पूजा, सूर्य को जल अर्पण और पितरों के लिए तर्पण करना महत्वपूर्ण माना जाता है। दान-पुण्य का विशेष महत्व है। नए काम या खरीदारी से बचकर यह दिन पूजा, शांति और आत्मचिंतन में बिताया जाता है।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड16 Apr 2026, 07:35 AM IST
वैशाख अमावस्या
वैशाख अमावस्या(PTI)

अमावस्या के दिनों को लोग आमतौर पर थोड़ा ज्यादा गंभीरता से लेते हैं। इस दिन माहौल थोड़ा शांत और सोच-विचार वाला होता है। यह दिन उत्सव से ज्यादा उन धार्मिक कामों के लिए माना जाता है जो संतुलन, शांति और दान से जुड़े होते हैं।

वैशाख अमावस्या भी ऐसा ही एक खास दिन है। हिंदू धर्म में इसे विशेष महत्व दिया जाता है, खासकर पितरों से जुड़े कर्म, शुद्धि और दान के लिए। इस साल तारीख को लेकर थोड़ी उलझन थी, तो पहले उसे साफ कर लेते हैं और फिर जानते हैं कि इस दिन क्या करना चाहिए।

वैशाख अमावस्या 2026: तारीख और समय

  • हिंदू पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 16 अप्रैल को रात 8:11 बजे शुरू होगी और 17 अप्रैल को शाम 5:21 बजे समाप्त होगी।
  • सूर्योदय के आधार पर व्रत और पूजा की तिथि तय होती है, इसलिए वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी।

शुभ मुहूर्त (स्नान और दान के लिए)

  • इस दिन सुबह का समय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:25 बजे से 5:09 बजे तक रहेगा, जो स्नान और पूजा के लिए बहुत शुभ होता है।
  • र्योदय सुबह 5:54 बजे होगा।
  • अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:55 बजे से 12:47 बजे तक रहेगा, जो पूजा और दान के लिए अच्छा समय माना जाता है।

वैशाख अमावस्या पर क्या करें?

  • दिन की शुरुआत जल्दी करें और स्नान करें।
  • यदि संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करें, नहीं तो घर पर नहाते समय पानी में गंगाजल मिलाया जा सकता है।
  • साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें।
  • तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल अर्पित करें।
  • पितरों के लिए तर्पण करना इस दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे पितृ दोष कम होता है और उन्हें शांति मिलती है।
  • जरूरतमंद लोगों को भोजन और कपड़े दान करें। यह सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि भावना से किया जाने वाला काम है।

इस दिन क्या न करें?

  • इस दिन कोई नया काम शुरू करने या बड़ी खरीदारी करने से बचें।
  • यह दिन नई शुरुआत के बजाय पूजा, चिंतन और दान के लिए होता है।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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