Amla Navami Katha in hindi: क्यों की जाती है आंवले की पूजा? आज जरूर पढ़ें आंवला नवमी की ये कथा

Amla Navami Katha in hindi: आज आंवला नवमी है। कार्तिक शुक्ल नवमी को आंवले के पेड़ की पूजा, दीपदान और कथा सुनने का विशेष महत्व है। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए लोग आंवले के नीचे पूजा करते हैं।

Priya Shandilya
अपडेटेड31 Oct 2025, 07:53 AM IST
क्यों की जाती है आंवले की पूजा? जानें आंवला नवमी की कथा
क्यों की जाती है आंवले की पूजा? जानें आंवला नवमी की कथा

Amla Navami Katha in hindi: कार्तिक मास वैसे ही धार्मिक माना जाता है, ऊपर से आज आंवला नवमी है, तो भक्ति का रंग और गहरा हो गया है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने का बड़ा महत्व बताया गया है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

आज पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06:37 से 10:04 तक है। यानी लगभग 3 घंटे 25 मिनट तक आप आंवले के पेड़ के नीचे पूजा, भजन-कीर्तन और दीपदान कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस समय पूजा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों की विशेष कृपा मिलती है।

क्यों होता है आंवले के पेड़ का पूजन?

आंवला भगवान विष्णु को बेहद प्रिय माना जाता है। इसलिए कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी को आंवले की पूजा करने की परंपरा बनी। आज के दिन लोग आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर पूजा करते हैं, खाना बनाते हैं, ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं और फिर स्वयं प्रसाद ग्रहण करते हैं। कहते हैं आंवला नवमी का भोजन, सौभाग्य और सुख देता है।

चूहे से दिव्य पुरुष बनने की कथा

बहुत समय पहले कावेरी नदी के किनारे देवशर्मा नाम के एक विद्वान ब्राह्मण रहते थे। उनका बेटा बहुत उद्दंड और बात न मानने वाला था। देवशर्मा ने उसे कार्तिक महीने में स्नान, दान, व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने को कहा। लेकिन बेटे ने गुस्से में पिता को अपशब्द कहे और पूजा न करने की बात कही।

क्रोधित पिता ने उसे श्राप दिया कि वह चूहा बन जाए। डरकर बेटे ने क्षमा मांगी। बेटे की विनती पर पिता ने कहा- जब तुम कार्तिक मास और उसके महत्व की कथा सुनोगे, तब तुम्हें मुक्ति मिलेगी। इसके बाद श्राप के कारण देवशर्मा का बेटा चूहा बन गया और सालों तक वन में भटकता रहा।

एक दिन कार्तिक मास में विश्वामित्र अपने शिष्यों के साथ आंवले के पेड़ के नीचे पूजा कर रहे थे। वे कार्तिक महीने की महिमा सुना रहे थे कि एक शिकारी आया। ऋषियों के दर्शन से उसका मन बदल गया और उसने भी कथा सुनी। शिकारी ने उत्सुकतावश ब्राह्मणों से उनके यहां आने का कारण पूछा। इसपर विश्वामित्र बोले- कार्तिक मास सब महीनों में श्रेष्ठ बताया जाता है। इस महीने में जो कर्म किया जाता है, वह बरगद के बीज की तरह बढ़ता है। कार्तिक मास का महात्मय और कथा सुनते ही वो चूहा भी चूहे का शरीर छोड़ कर दिव्य रूप में आ गया और स्वर्ग चला गया। और शिकारी भी तब से कार्तिक व्रत करने लगा।

माता लक्ष्मी की कथा

एक कथा के अनुसार माता लक्ष्मी पृथ्वी पर घूमने आईं और उन्हें एक साथ भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा करने का विचार आया।

सोचने पर उन्हें समझ आया कि तुलसी (विष्णु प्रिय) और बेल पत्र (शिव प्रिय) दोनों के गुण आंवले में हैं। इसलिए उन्होंने आंवला वृक्ष की पूजा की, भोजन बनाया और विष्णु-शिव को भोग लगाया। उस दिन कार्तिक शुक्ल नवमी थी, तभी से यह दिन आंवला नवमी के रूप में मनाया जाता है। माता लक्ष्मी से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु और शिव प्रकट हुए और आंवले के वृक्ष के पूजन की परंपरा शुरू हुई।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथों, पंचांगों और सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य सिर्फ आपको जागरूक करना है, मिंट हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है। कृपया कोई निर्णय लेने से पहले अपनी श्रद्धा और विवेक से काम लें।

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़ट्रेंड्सAmla Navami Katha in hindi: क्यों की जाती है आंवले की पूजा? आज जरूर पढ़ें आंवला नवमी की ये कथा
More
बिजनेस न्यूज़ट्रेंड्सAmla Navami Katha in hindi: क्यों की जाती है आंवले की पूजा? आज जरूर पढ़ें आंवला नवमी की ये कथा