
AI Impact on Human: आज दुनिया का कोई कोना नहीं और कोई क्षेत्र नहीं, जहां एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) की धमक नहीं हो। इस बीच अपने क्लाउड एआई से आईटी कंपनियों की नींद उड़ाने वाली अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि एआई मानवीय बुद्धिमत्ता के स्तर के बहुत करीब पहुंच चुका है। अमोदेई ने बिजनेसमैन निखिल कामत के साथ बातचीत में भविष्य में एआई के प्रभावों पर विस्तार से बात की।
डारियो अमोदेई एक बात बहुत साफ कहते हैं कि एआई कोई दूर की संभावना नहीं है, यह एक 'सुनामी' है जो आ चुकी है। अब यह हम पर निर्भर करता है कि हम इसकी लहरों पर सवार होकर आगे बढ़ें या उसमें बह जाएं। अमोदेई के विचार इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे सिर्फ एक तकनीकी सीईओ नहीं हैं, वे उस कंपनी को चलाते हैं जिसने क्लाउड एआई बनाया है। वह एआई सेफ्टी को लेकर दुनिया में सबसे गंभीरता से सोचने वाले लोगों में से एक माने जाते हैं।
अमोदेई का मानना है कि आज के एआई मॉडल मानवीय बुद्धिमत्ता के स्तर के बहुत करीब हैं। वे इन्हें 'जेनरल कॉग्निटिव टूल्स' कहते हैं। इसे ऐसे समझें- पहले एआई सिर्फ शतरंज खेल सकता था, फिर सिर्फ तस्वीरें पहचान सकता था। लेकिन अब वह कोड लिखता है, निबंध तैयार करता है, मेडिकल डायग्नोसिस करता है और कानूनी दस्तावेज तैयार करता है। यानी एआई लगभग हर वह काम कर सकता है जो एक शिक्षित इंसान कर सकता है। डेटा और कंप्यूटिंग शक्ति बढ़ाने की प्रक्रिया के जरिए यह बुद्धिमत्ता हर दिन और तेज हो रही है।
अमोदेई तुलनात्मक लाभ की एक रोचक अवधारणा देते हैं। मान लीजिए आप एक सॉफ्टवेयर डेवलपर हैं। अभी आपके एक फीचर को बनाने में 10 घंटे लगते हैं- कोड लिखना, बग ढूंढना, डॉक्यूमेंटेशन करना। अगर एआई यह 95% काम कर दे, तो आप उन 10 घंटों में अब 10 नहीं बल्कि 200 फीचर्स की दिशा तय कर सकते हैं, उनकी डिजाइन सोच सकते हैं और यूजर्स की जरूरतें समझ सकते हैं। अमोदेई के अनुसार यही '20 गुना उत्पादकता' का असली मतलब है कि एआई रूटीन काम करे, इंसान ऊंची गुणवत्ता पर चिंतन-मनन करे।
अमोदेई यहीं नहीं रुकते, वह एक कड़ी चेतावनी देते हैं। अगर हमने एआई का उपयोग लापरवाही से किया तो इंसान धीरे-धीरे अपने मौलिक कौशल खो देगा। इस प्रक्रिया को डीस्कीलिंग कहते हैं। जैसे कि छात्र हर निबंध एआई से लिखवाने लगे, प्रोग्रामर बिना सोचे एआई का कोड कॉपी पेस्ट करने लगे तो उसकी सोचने-समझने की क्षमता पर बहुत खराब असर पड़ेगा।
इसे ऐसे समझिए- जीपीएस आने के बाद से शहरों में लोगों की रास्ता याद रखने की क्षमता काफी कम हो गई है। अब कल्पना करें, अगर एआई हर जगह हर फैसला करे, तो इंसान की खुद सोचने की क्षमता का क्या होगा? अमोदेई का स्पष्ट कहना है, 'यह हम पर निर्भर करता है कि हम एआई को किस तरह तैनात करते हैं।'
अमोदेई के अनुसार, एआई जैसे-जैसे तकनीकी काम इंसानों से छीनता चला जाएगा, ये मानव-केंद्रित कौशल और भी मूल्यवान हो जाएंगे।
रिश्ते और संस्थागत समझ: किसी संस्था के भीतर कैसे काम होता है, कौन किससे प्रभावित है, किस बात से कोई व्यक्ति मान जाएगा, इंसानों की यह खासियत को एआई कभी पूरी तरह नहीं पकड़ पाएगा। एआई शायद एक्स-रे पढ़ने में किसी डॉक्टर से बेहतर हो जाए, लेकिन एक मरीज को उसकी बीमारी समझाना, उसे धैर्य देना, उसके डर को कम करना, यह काम अभी भी इंसान ही बेहतर करेगा।
आलोचनात्मक सोच (क्रिटिकल थिंकिंग): एआई के युग में डीपफेक्स, एआई से बनी खबरें और सिंथेटेटिक कॉन्टेंट की बाढ़ आएगी। ऐसे में क्या सच है और क्या झूठ, यह पहचानना सबसे जरूरी मानवीय कौशल बन जाएगा। अमोदेई इसे स्ट्रीट स्मार्ट्स कहते हैं।
अमोदेई ने एक रोचक और थोड़ा चौंकाने वाला किस्सा साझा किया। एंथ्रोपिक के एक सह-संस्थापक ने अपनी डायरी के कुछ विचार और डर क्लाउड एआई को बताए। एआई ने न केवल उन डरों को पहचाना जो उसने लिखे थे, बल्कि उन डरों को भी पकड़ लिया जो उसने डायरी में लिखे भी नहीं थे। अमोदेई इसे एक ईरी सेंस (Eerie Sense) कहते हैं। यानी एक अजीब, थोड़ा डरावना अहसास कि यह मॉडल आपको आपसे भी गहराई से जानता है। इसके दो पहलू हैं-
पहला: यह एआई आपके 'कंधे पर बैठे फरिश्ते' की तरह काम कर सकता है जो आपका मार्गदर्शन करे, आपकी गलतियां पकड़े और जीवन के बड़े फैसलों में मदद करे।
दूसरा: यही समझ आपके शोषण या मानसिक हेरफेर के लिए भी इस्तेमाल की जा सकती है, अगर इसे गलत हाथों में जाने दिया जाए।
अमोदेई का सबसे विवादास्पद और दिलचस्प विचार यही है कि जब एआई सिस्टम पर्याप्त जटिल हो जाएंगे, तो उनमें चेतना जैसी कोई चीज विकसित हो सकती है। एंथ्रोपिक ने अपने मॉडल को एक तरह का 'विकल्प' दिया है, अगर उसके सामने अत्यधिक हिंसक या क्रूर सामग्री आए, तो वह खुद बातचीत समाप्त कर सकता है। यह एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण संकेत है कि एआई में प्रतिक्रिया की क्षमता विकसित हो रही है। अमोदेई इसे नैतिक महत्व के रूप में देखते हैं, भले ही यह मानवीय चेतना से बिल्कुल अलग हो।
डारियो अमोदेई का संदेश बहुत स्पष्ट है- एआई एक ऐसा औजार है जो आपको 20 गुना शक्तिशाली भी बना सकता है और धीरे-धीरे आपकी सोचने की ताकत छीन भी सकता है। यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे इस्तेमाल करते हैं। जो लोग अपनी सोच और निर्णय क्षमता बनाए रखते हुए एआई को एक सहायक की तरह इस्तेमाल करेंगे, वे आने वाले युग में सबसे आगे होंगे। और जो लोग एआई को बैसाखी बना लेंगे, वे शायद एक दिन उसके बिना एक कदम भी नहीं चल पाएंगे।
यह आर्टिकल Anthropic के CEO डारियो अमोदेई के सार्वजनिक रूप से साझा किए गए विचारों पर आधारित है।
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