Exclusive Interview : चिप डिजाइन से AI तक, वैश्विक मंच पर कैसे उभर रहा है भारत? वायव्या लैब्स के दीपक सामगा से जानिए

वायव्या लैब्स के वीपी दीपक समागा बता रहे हैं कि कैसे भारतीय डीप-टेक कंपनियां चिप डिजाइन, एम्बेडेड सॉफ्टवेयर और सिस्टम इंजीनियरिंग में वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन को मजबूत कर रही हैं और आत्मनिर्भर भारत के तकनीकी सपने को साकार कर रही हैं।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड17 Mar 2026, 05:57 PM IST
वायव्या लैब्स के वाइस प्रेसिडेंट दीपक समागा- भारतीय सेमीकंडक्टर इंजीनियरिंग पर मिंट हिंदी से बातचीत
वायव्या लैब्स के वाइस प्रेसिडेंट दीपक समागा- भारतीय सेमीकंडक्टर इंजीनियरिंग पर मिंट हिंदी से बातचीत

India Semiconductor Mission: जब सेमीकंडक्टर की चर्चा जोर नहीं पकड़ रही थी, तभी भारत चुपचाप एक बड़ी तैयारी कर रहा था। आज भारतीय इंजीनियर केवल आईटी सेवाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे उन चिप्स को डिजाइन, वैलिडेट और सॉफ्टवेयर से लैस कर रहे हैं जो दुनिया भर के स्मार्टफोन, कारों और डेटा सेंटर्स में धड़कते हैं।

कर्नाटक के बेलगावी स्थित वायव्या लैब्स इसी बदलाव की एक जीवंत मिसाल है। 2006 में स्थापित यह कंपनी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच की खाई को पाटने का काम करती है और अपने एआई-सहायता प्राप्त प्लेटफॉर्म 'त्वष्टा' के जरिए उत्पाद विकास को नई रफ्तार दे रही है। मिंट हिंदी ने कंपनी के बिजनेस डेवलपमेंट वीपी दीपक समागा से जाना कि भारतीय डीप-टेक कैसे वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर अपनी छाप छोड़ रहा है।

प्रश्न : भारतीय डीप-टेक कंपनियां वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन को कैसे मजबूत कर रही हैं?

दीपक समागा : भारतीय डीप-टेक कंपनियां सेमीकंडक्टर उद्योग के कई स्तरों पर अपनी इंजीनियरिंग क्षमता के जरिए अहम भूमिका निभा रही हैं। पिछले करीब दो दशकों में भारत ने चिप डिजाइन सपोर्ट, वेरिफिकेशन, एम्बेडेड सॉफ्टवेयर और सिस्टम इंटीग्रेशन जैसे क्षेत्रों में मजबूत विशेषज्ञता विकसित की है। आज सेमीकंडक्टर सिस्टम पहले की तुलना में अधिक सॉफ्टवेयर-केंद्रित हो गए हैं।

सिलिकॉन, फर्मवेयर, ऑपरेटिंग सिस्टम और एप्लिकेशन के बीच तालमेल पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे में वे इंजीनियरिंग टीमें ज्यादा मूल्यवान हो रही हैं जो इन सभी स्तरों को एक साथ समझती हैं। हमारे अनुभव में भारतीय कंपनियां वैश्विक सेमीकंडक्टर प्रोग्राम्स में शुरुआती आर्किटेक्चर एक्सप्लोरेशन से लेकर सॉफ्टवेयर विकास और सिस्टम वैलिडेशन तक महत्वपूर्ण सहयोग देती हैं। यह योगदान केवल संख्या या स्केल का नहीं है, बल्कि जटिल होते प्लेटफॉर्म्स में सिस्टम-स्तरीय इंजीनियरिंग विशेषज्ञता का है।

प्रश्न : वर्ष 2006 में स्थापना के बाद से वायव्या लैब्स हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के बीच पुल बनाने पर काम कर रही है। यह दृष्टिकोण समय के साथ कैसे विकसित हुआ?

दीपक समागा : शुरुआत में हमने देखा कि हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर टीमें अक्सर अलग-अलग चरणों में काम करती थीं। जैसे-जैसे सिस्टम जटिल होते गए, इससे विकास में देरी होने लगी। इसी अंतर को कम करना हमारे काम का मुख्य उद्देश्य रहा है। एआई टूल्स की मौजूदा लहर से पहले भी हमें लगा था कि बढ़ती इंजीनियरिंग जटिलता के साथ ऑटोमेशन जरूरी होगा।

इसलिए हमने ऐसे टूल्स, फ्रेमवर्क और डेवलपमेंट वातावरण विकसित किए जो इंजीनियरों को स्पेसिफिकेशन का विश्लेषण करने, कंपोनेंट्स बनाने और शुरुआती चरण में ही सिस्टम को वैलिडेट करने में मदद करें। आज यह दृष्टिकोण सिस्टम मॉडलिंग, शुरुआती सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट वातावरण और एआई-सहायता प्राप्त इंजीनियरिंग वर्कफ्लो तक फैल चुका है। उद्देश्य वही है- हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर टीमों को शुरुआत से ही साथ काम करने में सक्षम बनाना।

प्रश्न : सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के प्रयासों के बीच स्थानीय इंजीनियरिंग कंपनियों के लिए सबसे बड़े अवसर कहां हैं?

दीपक समागा : सेमीकंडक्टर उद्योग में बड़ी वैल्यू केवल फैब्रिकेशन में नहीं होती। डिजाइन सेवाएं, वेरिफिकेशन, एम्बेडेड सॉफ्टवेयर, फर्मवेयर विकास और सिस्टम इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्र भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इन क्षेत्रों में भारत के पास पहले से मजबूत इंजीनियरिंग प्रतिभा मौजूद है। स्थानीय कंपनियां चिप डिजाइन प्रोग्राम्स का समर्थन कर सकती हैं, वैलिडेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित कर सकती हैं और जटिल सिस्टम्स के इंटीग्रेशन में योगदान दे सकती हैं।

इसके अलावा इंजीनियरिंग प्रोडक्टिविटी टूल्स भी एक उभरता हुआ अवसर हैं- ऐसे प्लेटफॉर्म जो सेमीकंडक्टर विकास की बढ़ती जटिलता को संभालने में मदद करें। यदि भारत इंजीनियरिंग प्रतिभा और रिसर्च सहयोग में निवेश जारी रखता है, तो स्थानीय कंपनियाँ वैश्विक कार्यक्रमों में और गहरी भूमिका निभा सकती हैं।

कई सेमीकंडक्टर प्रोग्राम्स में देरी हार्डवेयर डिजाइन, एम्बेडेड सॉफ्टवेयर और सिस्टम वैलिडेशन के बीच समन्वय की कमी के कारण होती है। हमारा प्रयास इसी अंतर को कम करना है। हम ग्राहकों को कई स्तरों पर सहायता देते हैं, जैसे एम्बेडेड सॉफ्टवेयर विकास, ड्राइवर इम्प्लीमेंटेशन, सिस्टम मॉडलिंग और वैलिडेशन फ्रेमवर्क्स, जिससे टीमें शुरुआती चरण में ही सिस्टम के व्यवहार का परीक्षण कर सकें।- दीपक सामगा, वीपी, वायव्या लैब्स

प्रश्न : एम्बेडेड सिस्टम्स में कौन-से उभरते ट्रेंड्स अगली पीढ़ी के कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स को आकार देंगे?

दीपक समागा : पिछले दशक में एम्बेडेड सिस्टम्स काफी हद तक सॉफ्टवेयर-आधारित हो गए हैं। आज डिवाइस से उम्मीद होती है कि वे कनेक्टेड, सुरक्षित और अपने पूरे जीवनकाल में सॉफ्टवेयर अपडेट्स के जरिए बेहतर होते रहें। एक महत्वपूर्ण बदलाव हेटेरोजीनियस कंप्यूटिंग की ओर भी है। आधुनिक कंज्यूमर डिवाइस अब CPU, GPU और विशेष एक्सेलेरेटर्स को साथ लेकर चलते हैं, जिससे सिस्टम सॉफ्टवेयर और भी जटिल हो जाता है।

इसके अलावा विकास प्रक्रिया भी बदल रही है। अब सिमुलेशन और डिजिटल मॉडल्स के जरिए सॉफ्टवेयर टीमें हार्डवेयर उपलब्ध होने से पहले ही काम शुरू कर सकती हैं। साथ ही इंजीनियरिंग ऑटोमेशन भी तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है, जो विकास प्रक्रिया को तेज और अधिक कुशल बनाता है।

यह भी पढ़ें | गोते लगाते बाजार में डूब रहा पैसा? वेल्थ मैनेजर अरुण पटेल की निवेश पर सटीक सलाह

प्रश्न : वैश्विक ग्राहकों के साथ काम करने वाली एक मेड-इन-इंडिया डीप-टेक कंपनी के रूप में इनोवेशन और इंजीनियरिंग क्वॉलिटी को साथ-साथ बनाए रखने की कुंजी क्या है?

दीपक समागा : हमारे लिए इसकी कुंजी हमेशा मजबूत इंजीनियरिंग कल्चर रही है। डीप-टेक क्षेत्र में विश्वसनीयता लगातार कठिन तकनीकी समस्याओं को हल करने से बनती है। हम ऐसी टीमों के निर्माण में निवेश करते हैं जो सिलिकॉन इंटरफेस से लेकर एम्बेडेड सॉफ्टवेयर और सिस्टम व्यवहार तक कई स्तरों को समझती हैं। यही गहराई इंजीनियरों को जटिल प्रोग्राम्स में सीमाओं के पार काम करने में सक्षम बनाती है।

वैश्विक ग्राहकों के साथ काम करना भी हमें उच्च मानक बनाए रखने में मदद करता है। क्वॉलिटी, प्रोसेस मैच्योरिटी और क्रेडिबलिटी को लेकर उनकी अपेक्षाएं हमें लगातार बेहतर बनने के लिए प्रेरित करती हैं। साथ ही, हम इंजीनियरिंग टूल्स और ऑटोमेशन के आसपास इंटरनल इनोवेशन को प्रोत्साहित करते हैं जो काम करने के तरीके को बेहतर बनाते हैं।

सेमीकंडक्टर उद्योग में बड़ी वैल्यू केवल फैब्रिकेशन में नहीं होती। डिजाइन सेवाएं, वेरिफिकेशन, एम्बेडेड सॉफ्टवेयर, फर्मवेयर विकास और सिस्टम इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्र भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इन क्षेत्रों में भारत के पास पहले से मजबूत इंजीनियरिंग प्रतिभा मौजूद है।- दीपक सामगा, वीपी, वायव्या लैब्स

प्रश्न : पोर्टेबल स्टिमुलस या ओपन सिनेरियो जैसे वैश्विक मानकों में भागीदारी से कंपनी को क्या लाभ मिलता है?

दीपक समागा : वैश्विक मानकों से जुड़ी पहलों में भाग लेना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कंपनियों को यह तय करने में योगदान देने का अवसर मिलता है कि उद्योग आगे किस दिशा में विकसित होगा। ऐसे मंचों पर नए इंजीनियरिंग दृष्टिकोणों पर चर्चा होती है, उन्हें परखा और बेहतर बनाया जाता है, और बाद में वे पूरे उद्योग में अपनाए जाते हैं।

इन पहलों में सक्रिय भागीदारी से हम अपने व्यावहारिक इंजीनियरिंग अनुभव को भी चर्चा का हिस्सा बना पाते हैं और उन तकनीकों के विकास में योगदान दे सकते हैं जो आगे चलकर व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले मानक बन सकती हैं।

साथ ही, इससे हमारे इंजीनियरों को नई उभरती पद्धतियों और फ्रेमवर्क्स का शुरुआती अनुभव भी मिलता है। समय के साथ यह हमें उद्योग के रुझानों से एक कदम आगे बनाए रखने में मदद करता है। यह कंपनी को ऐसे संगठन के रूप में स्थापित करता है जो केवल दूसरे द्वारा तय मानकों को अपनाने वाला नहीं, बल्कि पूरे इकोसिस्टम के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने वाला है।

प्रश्न : अगले दशक में आप एआई, सेमीकंडक्टर्स और कनेक्टेड डिवाइसेस के बीच संबंध को कैसे विकसित होते देखते हैं? इस बदलाव में इंजीनियरिंग ऑटोमेशन क्या भूमिका निभा सकता है?

दीपक समागा : एआई, सेमीकंडक्टर्स और कनेक्टेड डिवाइस तेजी से एक-दूसरे से जुड़ते जा रहे हैं। एआई वर्कलोड्स पहले से ही सेमीकंडक्टर आर्किटेक्चर को प्रभावित कर रहे हैं, जबकि कनेक्टेड डिवाइस वह डेटा पैदा करते हैं जो इन सिस्टम्स को चलाता है। लेकिन इसके साथ-साथ इन प्लेटफॉर्म्स को डिजाइन और वैलिडेट करने की जटिलता भी बढ़ रही है। यही वह जगह है जहां इंजीनियरिंग ऑटोमेशन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

एआई इंजीनियरों की मदद कर सकता है, जैसे स्पेसिफिकेशन का विश्लेषण करना, सॉफ्टवेयर कंपोनेंट्स तैयार करना और विकास प्रक्रिया के शुरुआती चरण में ही इंटीग्रेशन से जुड़ी समस्याओं की पहचान करना। भविष्य में एआई केवल सेमीकंडक्टर्स पर चलेगा ही नहीं, बल्कि उन्हें डिजाइन और वैलिडेट करने में भी मदद करेगा।

प्रश्न : वायव्या लैब्स सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को उत्पाद विकास तेज करने में कैसे मदद करती है?

दीपक समागा : कई सेमीकंडक्टर प्रोग्राम्स में देरी हार्डवेयर डिजाइन, एम्बेडेड सॉफ्टवेयर और सिस्टम वैलिडेशन के बीच समन्वय की कमी के कारण होती है। हमारा प्रयास इसी अंतर को कम करना है। हम ग्राहकों को कई स्तरों पर सहायता देते हैं, जैसे एम्बेडेड सॉफ्टवेयर विकास, ड्राइवर इम्प्लीमेंटेशन, सिस्टम मॉडलिंग और वैलिडेशन फ्रेमवर्क्स, जिससे टीमें शुरुआती चरण में ही सिस्टम के व्यवहार का परीक्षण कर सकें।

इसके अलावा हम ऐसे इंजीनियरिंग टूल्स भी विकसित करते हैं जो स्पेसिफिकेशन का विश्लेषण करने, विकास के कुछ हिस्सों को ऑटोमेट करने और जटिल सॉफ्टवेयर स्टैक्स में निरंतरता बनाए रखने में मदद करते हैं। हाल ही में हमने त्वष्टा (Tvastaa) जैसे प्लैटफॉर्म के जरिए एआई समर्थित इंजीनियरिंग पहलों की भी खोज शुरू की है। कुल मिलाकर हमारा लक्ष्य सरल है, इंजीनियरिंग टीमों को तेजी से काम करने में मदद करना, साथ ही सिस्टम की गुणवत्ता बनाए रखना।

Get Latest real-time updates

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

होमट्रेंड्सExclusive Interview : चिप डिजाइन से AI तक, वैश्विक मंच पर कैसे उभर रहा है भारत? वायव्या लैब्स के दीपक सामगा से जानिए
More