
Banke Bihari Temple Treasure: मथुरा-वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में दशकों से बंद पड़ा तोशाखाना (खजाना) जब पिछले महीने खुला, तो भक्तों की सांसें थम गईं। माना जाता था कि यहां राजाओं और भक्तों की ओर से चढ़ाए गए अनमोल खजाने रखे हैं। लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट-नियुक्त कमेटी की देखरेख में ये तिजोरी खोली गई, तो सिर्फ एक सोने की और तीन चांदी की सिल्लियां मिलीं।
इस तिजारी को लेकर कहा जाता था कि इसमें भरतपुर, करौली और ग्वालियर के राजाओं के दिए हुए गहने और जमीन के दस्तावेज रखे हैं। मगर अब जब तिजोरी खुली, तो न कोई रेकॉर्ड मिला और न दानकर्ताओं की लिस्ट मिली। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर की पूरी संपत्ति का ऑडिट शुरू करने के आदेश दिया है।
धनतेरस के दिन सुबह पुरोहित और वन विभाग और सुरक्षा अधिकारी की मौजूदगी में लोहे की छेनी से दरवाजा काटा गया। उसके बाद जब अधिकारी अंदर गए, तो उन्हें वहां कुछ भी खास नहीं मिला। अधिकारियों के आंखों के सामने सिर्फ लकड़ी का बक्सा, एक सोने की और तीन चांदी की सिल्लियां, पीतल के बर्तन थे।
मंदिर की व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर दायर जनहित याचिकाओं के बाद उच्च न्यायालय के पूर्व जज अशोक कुमार की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई थी। मगर खजाना खुलने के बाद अब जांच और गहराई तक जा रही है। कहा जा रहा है कि मंदिर की संपत्ति करीब 350 से 400 करोड़ रुपये की है, जो मथुरा और वृंदावन की अलग-अलग बैंकों में जमा है। अब कमेटी ने आदेश दिया है कि इन पैसों को अच्छी ब्याज दर वाले फिक्स्ड डिपॉजिट में बदला जाए और सभी बैंक खातों व जमीनों का पूरा ब्यौरा तैयार किया जाए।
मंदिर की सेवा संभालने वाले गोसाईं समुदाय ने कहा कि गलतफहमियां फैल रही हैं। उनके मुताबिक कुछ गहने और बहुमूल्य धरोहरें अब भी स्टेट बैंक की शाखा में सुरक्षित हैं, बस उन्हें खोलने का आदेश नहीं मिला। मंदिर के सदस्य शैलेंद्र गोसाईं ने कहा कि हमारा मंदिर राजाओं ने नहीं, भक्तों ने बनाया था। सब कुछ पारदर्शी है। जो करना है, जांच कर लें, हमारे पास छिपाने को कुछ नहीं है।
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