Bhai Dooj Ki Katha: भाई दूज पर इस व्रत कथा को पढ़ने से भाई को मिलेगी अपार सफलता, बढ़ेगी उम्र और बना रहेगा प्यार

भाई दूज इस वर्ष 23 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। बहनें इस दिन अपने भाइयों की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और उन्हें तिलक करती हैं। यमराज और यमुना की कथा से जुड़ा यह त्योहार भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक है।

Manali Rastogi
अपडेटेड23 Oct 2025, 07:24 AM IST
Bhai Dooj Ki Katha: भाई दूज पर इस व्रत कथा को पढ़ने से भाई को मिलेगी अपार सफलता, बढ़ेगी उम्र और बना रहेगा प्यार
Bhai Dooj Ki Katha: भाई दूज पर इस व्रत कथा को पढ़ने से भाई को मिलेगी अपार सफलता, बढ़ेगी उम्र और बना रहेगा प्यार

भाई दूज का पावन त्योहार, जो भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक है, इस वर्ष गुरुवार, 23 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। इसे भाऊ बीज, यम द्वितीया, भात्र द्वितीया, भाई द्वितीया या भातृ द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है, जो दीवाली के ठीक बाद आती है।

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इस साल यह भ्रम था कि भाई दूज 22 अक्टूबर को है या 23 अक्टूबर को। हिंदू पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि 22 अक्टूबर रात 8:16 बजे से शुरू होकर 23 अक्टूबर रात 10:46 बजे तक रहेगी। इसलिए सही दिन 23 अक्टूबर को ही भाई दूज मनाना होगा। इस दिन का शुभ समय (अपराह्न काल) 12:40 बजे दोपहर से 2:59 बजे दोपहर तक रहेगा, और तिलक मुहूर्त 1:13 बजे से 3:28 बजे तक रहेगा।

जानिए जरूरी तिथियों के बारे में

  • यम द्वितीया तिथि: गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025
  • द्वितीया तिथि प्रारंभ: 22 अक्टूबर, रात 8:16 बजे
  • द्वितीया तिथि समाप्त: 23 अक्टूबर, रात 10:46 बजे
  • ब्रह्म मुहूर्त: 4:05 से 4:55 सुबह
  • अभिजीत मुहूर्त: 11:08 से 11:54 दोपहर
  • विजय मुहूर्त: 1:26 से 2:12 दोपहर
  • निशीथ मुहूर्त: 11:06 से 11:56 रात

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भाई दूज के दिन बहनें सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं, नए कपड़े पहनती हैं और अपने भाइयों की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। शुभ मुहूर्त में वे अपने भाई के माथे पर तिलक लगाती हैं, आरती करती हैं और मिठाई या भोजन अर्पित करती हैं। बदले में भाई उन्हें उपहार, कपड़े या पैसे देते हैं और स्नेह प्रकट करते हैं।

भाई दूज व्रत कथा (Bhai Dooj Vrat Katha In Hindi)

स्वर्ग लोक में सूर्य देव अपनी पत्नी संज्ञा के साथ रहते थे। उनके दो प्यारे बच्चे थे यमराज (जो मृत्यु के देवता थे) और उनकी बहन यमुना। दोनों भाई-बहन का रिश्ता बहुत ही खास था। वे एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे और सच्चे मित्र भी थे।

यमुना हमेशा अपने भाई से मिलने की इच्छा रखती थीं और अक्सर उन्हें अपने घर आने का निमंत्रण देती थीं। लेकिन यमराज अपने काम में बहुत व्यस्त रहते थे, इसलिए वे अक्सर नहीं आ पाते थे।

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एक दिन कुछ अद्भुत हुआ। वह दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया का था, जो हिंदू पंचांग में बहुत पवित्र माना जाता है। उस दिन यमराज ने अपनी जिम्मेदारियों से थोड़ी छुट्टी ली और अपनी बहन यमुना से मिलने का निर्णय किया। यह देखकर देवता भी आश्चर्यचकित रह गए। यमराज ने अपनी दयालुता दिखाते हुए नरक के द्वार खोल दिए और वहां फंसे आत्माओं को मुक्त कर दिया।

जब यमराज यमुना के घर पहुंचे, तो यमुना ने उनका बड़े प्रेम और आदर के साथ स्वागत किया। उन्होंने अपने भाई के लिए स्वादिष्ट व्यंजनों से भरा भव्य भोजन तैयार किया। भोजन के बाद यमुना ने प्रेमपूर्वक अपने भाई के माथे पर तिलक लगाया, जो उनके स्नेह और आदर का प्रतीक था।

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जब यमराज जाने लगे, तो वे अपनी बहन के प्रेम से बहुत भावुक हो गए। उन्होंने यमुना से कहा कि वह कोई वरदान मांग लें। यमुना मुस्कुराकर बोलीं, “भैया, वचन दीजिए कि आप हर वर्ष इसी दिन मुझसे मिलने आएंगे। और जो भी भाई इस दिन अपनी बहन के घर आएगा और बहन उसके माथे पर तिलक लगाएगी, उसे कभी आपके क्रोध का भय नहीं रहेगा।”

यमराज ने खुशी-खुशी यह वरदान दे दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो भाई-बहन इस दिन यमुना नदी में स्नान करेंगे, वे सदैव सुखी रहेंगे और उन पर कभी यमराज का कोप नहीं पड़ेगा।

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