Maharashtra Local Body Poll Politics: महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों के नतीजों के बाद एक अजीबोगरीब राजनीतिक स्थिति पैदा हो गई है। राज्य में एक-दूसरे के धुर विरोधी दल भाजपा, कांग्रेस और एआईएमआईएम (AIMIM) सत्ता के लिए एक साथ आ गए। इस घटनाक्रम ने न केवल महायुति गठबंधन में दरार डाल दी, बल्कि राज्य की राजनीति में नैतिकता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सख्त रुख अपनाते हुए इन अप्राकृतिक गठबंधनों को तुरंत खत्म करने का निर्देश दिया है। वहीं, कांग्रेस ने गठबंधन के दम पर जीते अपने 12 पार्षदों को निलंबित कर दिया।
अंबरनाथ में शिवसेना को रोकने के लिए 'अनोखा' मेल
ठाणे जिले की अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी गठबंधन महायुति की घटक शिवसेना 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, लेकिन बहुमत के लिए जरूरी 31 सीट से चार कदम दूर रह गई। यहां भाजपा से जीते 14 पार्षदों ने मुख्य प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस (12 सीट) और अजित पवार की राकांपा (4 सीट) के साथ मिलकर 'अंबरनाथ विकास आघाड़ी' बना ली। इस गठबंधन ने 31 का आंकड़ा पार कर सत्ता हथिया ली और भाजपा की तेजश्री करंजुले पाटिल अध्यक्ष बन गईं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने इसे 'अनैतिक और मौकापरस्त' राजनीति करार दिया है।
अकोट में एआईएमआईएम के साथ गलबहियां
अकोला की अकोट नगर परिषद में कहानी और भी दिलचस्प है। यहां भाजपा ने 'अकोट विकास मंच' बनाया, जिसमें एआईएमआईएम के अलावा उद्धव ठाकरे की शिवसेना और शरद पवार की राकांपा जैसे धुर विरोधी दल भी शामिल हो गए। 35 सदस्यीय परिषद में भाजपा की माया धुले को महापौर चुना गया। हालांकि, भाजपा नेताओं का दावा है कि एआईएमआईएम के पार्षदों ने अपनी पार्टी की विचारधारा छोड़कर भाजपा का साथ दिया है, इसे औपचारिक गठबंधन न माना जाए।
मुख्यमंत्री फडणवीस की सख्त चेतावनी
इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'कांग्रेस या एआईएमआईएम के साथ किसी भी तरह का गठबंधन स्वीकार्य नहीं है। स्थानीय नेताओं के ये फैसले पार्टी अनुशासन के खिलाफ हैं और इन्हें तुरंत तोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।' फडणवीस ने यह भी साफ किया कि जिन्होंने पार्टी लाइन से हटकर काम किया है, उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कांग्रेस ने अपने 12 पार्षदों को किया बाहर
भाजपा के साथ हाथ मिलाने की कीमत अंबरनाथ के कांग्रेस पार्षदों को चुकानी पड़ी है। कांग्रेस आलाकमान ने भाजपा के साथ गठबंधन करने वाले अपने सभी 12 नवनिर्वाचित पार्षदों और ब्लॉक अध्यक्ष को तुरंत प्रभाव से पार्टी से निलंबित कर दिया है। प्रदेश नेतृत्व का कहना है कि यह फैसला उनकी जानकारी के बिना लिया गया था, इसलिए ब्लॉक इकाई को भी भंग कर दिया गया है।
विपक्ष का तंज- सत्ता के लिए दोमुंहा केंचुआ बनी भाजपा
इस गठबंधन पर शिवसेना (उबाठा) के नेता संजय राउत और सचिन अहीर ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। राउत ने भाजपा को 'दोमुंहा केंचुआ' बताते हुए कहा कि यह पार्टी सत्ता के लिए किसी का भी समर्थन ले सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने मीरा-भयंदर में भी एआईएमआईएम का परोक्ष समर्थन लिया है। विपक्ष का कहना है कि यह भाजपा के 'कांग्रेस-मुक्त भारत' के नारे और उनकी विचारधारा के दोहरे मापदंड को उजागर करता है।