Blind Women T20 Cricket champion: मां ने गिरवी रखे जेवर तब खुला इंदौर का रास्ता, विश्व विजेता बनी बैतूल की दुर्गा येवले

महिला ब्लाइंड क्रिकेट T20 वर्ल्डकप में भारतीय टीम ने जीत का परचम लहराया, जिसमें बैतूल की दुर्गा येवले ने अपनी शानदार छाप छोड़ी। लेकिन ब्लाइंड क्रिकेट टीम में शामिल होने से लेकर वर्ल्डकप जीतने तक दुर्गा का बहुत ही कठिनाइयों भरा सफर रहा है। जिसे सुनकर हर भारतीय उनको सलाम कर रहा है।

Rajkumar Singh
अपडेटेड6 Dec 2025, 03:06 PM IST
महिला ब्लाइंड क्रिकेट T20 विश्वविजेता टीम के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
महिला ब्लाइंड क्रिकेट T20 विश्वविजेता टीम के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(HT)

ब्लाइंड टी-20 क्रिकेट में भारत को विश्व चैंपियन बनाने वाली विकेटकीपर बल्लेबाज मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की दुर्गा येवले की सफलता जितनी चमकदार है, उसके पीछे उतने ही गहरे संघर्ष छिपे हैं। भैंसदेही के राक्सी गांव की साधारण किसान परिवार में जन्मी दुर्गा आज अंतरराष्ट्रीय पहचान पा चुकी हैं, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था।

मां ने गिरवी रखे गहने और बदली जिंदगी

दुर्गा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव और बैतूल के ब्लाइंड स्कूल में पूरी की। आगे की उच्च शिक्षा और बेहतर प्रशिक्षण के लिए जब उन्हें इंदौर भेजने की जरूरत पड़ी, तब परिवार की आर्थिक स्थिति सबसे बड़ी दीवार बनकर खड़ी हो गई। इसी समय उनकी मां ने बिना देर किए अपने गहने गिरवी रख दिए, ताकि बेटी के सपने रुक न जाए। मां के इस त्याग ने ही दुर्गा की किस्मत मोड़ने का काम किया। गहने गिरवी रखने से मिले पैसों से दुर्गा इंदौर के दृष्टिबाधित स्कूल पहुंच सकीं, जहां से उनकी जिंदगी ने नई दिशा पकड़ी।

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दुर्गा ने संघर्ष से हर चुनौती को दी मात

इंदौर में ही वर्ष 2021 में आयोजित एक कैंप के दौरान उनका चयन जिला स्तरीय टीम में हुआ और यही उनकी असली क्रिकेट यात्रा की शुरुआत थी। जिले से राष्ट्रीय स्तर और फिर विश्व कप टीम तक पहुंचने में दुर्गा ने अपनी लगन, अनुशासन और अदम्य इच्छा शक्ति से हर चुनौती को मात दी।

विकेट कीपिंग ने बदली जिंदगी

दुर्गा बताती हैं कि विकेटकीपर के रूप में उनकी जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्हें बी1 और बी2 प्लेयर्स को गेंद की दिशा लगातार बतानी होती है। कई मैचों में उनकी विकेट कीपिंग इतनी शानदार रही कि बल्लेबाजी की बारी तक नहीं आई।

अजेय रही ब्लाइंड महिला क्रिकेट टीम

इस 2025 में हुए ब्लाइंड महिला क्रिकेट वर्ल्डकप में भारतीय महिला ब्लाइंड टीम ने विश्व कप में सातों मैच जीतकर खिताब अपने नाम किया। जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात को दुर्गा अपने जीवन का सबसे भावुक पल बताती हैं। दुर्गा बताती हैं कि ऐसा लगा जैसे अपने पिता से मिल रही हूं। जो सम्मान और प्यार मिला वो अविस्मरणीय है।

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सफलता का श्रेय माता-पिता कोः दुर्गा

दुर्गा अपनी हर उपलब्धि का श्रेय माता-पिता के त्याग और समर्थन को देती हैं। वे कहती हैं कि अगर मां ने गहने गिरवी न रखे होते तो मैं इंदौर पहुंच ही नहीं पाती, उनके लिए पढ़ाई और क्रिकेट दोनों रास्ते वहीं से खुले। इसके बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परिचय देने का मौका मिला

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