
Sulakshana Pandit Love story: बॉलीवुड की जानी-मानी सिंगर और एक्ट्रेस सुलक्षणा पंडित अब हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन उनकी जिंदगी सिर्फ अभिनय और सुरों तक सीमित नहीं थी। वो प्यार, दर्द और तन्हाई की एक अधूरी कहानी भी थी। 70 और 80 के दशक में अपने गानों और अभिनय से लोगों का दिल जीतने वाली सुलक्षणा ने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी।
साल 1954 में जन्मीं सुलक्षणा एक संगीतमय परिवार से ताल्लुक रखती थीं। उनके चाचा पंडित जसराज भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान गायक थे, जबकि उनके भाई जतिन-ललित ने बॉलीवुड को कई सुपरहिट गाने दिए। सुलक्षणा ने मात्र नौ साल की उम्र में गाना शुरू कर दिया था। शुरुआत में वह स्टेज शो करती थीं। फिल्मों में सुलक्षणा का सिंगिंग करियर वर्ष 1967 में प्रदर्शित फिल्म 'तकदीर' से शुरू हुआ। इस फिल्म में उन्होंने लता मंगेशकर के साथ 'सात संमदर पार से..' गाना गाया था।
उनकी आवाज ने फिल्म इंडस्ट्री में पहचान दिलाई, और जल्द ही एक्टिंग के ऑफर आने लगे। 1975 की फिल्म उलझन से उन्होंने एक्टिंग डेब्यू किया और फिर संकल्प, अपनापन, हेरा फेरी, धरमकांटा जैसी फिल्मों में छा गईं। 1976 में संकल्प के गाने “तू सागर है…” के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। उन्होंने उस दौर के लगभग सभी बड़े एक्टर्स के साथ स्क्रीन शेयर की थी।
लेकिन सुलक्षणा की असली कहानी पर्दे के पीछे छिपी रही, उनका प्यार संजीव कुमार से। कहा जाता है कि सुलक्षणा उन्हें दिल से चाहती थीं और शादी का प्रस्ताव भी दिया, लेकिन संजीव कुमार ने उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया। संजीव कुमार के इनकार के बाद सुलक्षणा पंडित टूट गईं। उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का फैसला किया और अपना जीवन अकेलेपन में बिताया।
कहते हैं कुछ रिश्ते वक्त को भी मात दे देते हैं, ऐसा ही हुआ सुलक्षणा और संजीव कुमार के बीच। 6 नवंबर 1985 को बॉलीवुड के महान अभिनेता संजीव कुमार ने दुनिया को अलविदा कहा था। ठीक 40 साल बाद, उसी तारीख पर, 6 नवंबर 2025 को सुलक्षणा ने अंतिम सांस ली। 71 वर्षीय सुलक्षणा का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। यह संयोग उनके अधूरे प्यार की गहराई को और भी मार्मिक बना देता है।
संजीव कुमार को उनके दमदार अभिनय के लिए याद किया जाता है। शिकार, खिलौना, दस्तक, कोशिश और शोले जैसी फिल्मों में उन्होंने किरदारों को जीवंत बना दिया था। दस्तक और कोशिश के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, जबकि शिकार के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड।
सुलक्षणा ने आखिरी बार 1996 की फिल्म खामोशी: द म्यूजिकल के लिए गाया। इसके बाद वो धीरे-धीरे सबकी नजरों से ओझल हो गईं। ललित पंडित ने उनके निधन की पुष्टि की और बताया कि वह लंबे समय से बीमार थीं।
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