Bondi Beach Shooting: तेलंगाना पुलिस का बड़ा खुलासा! भारत से ताल्लुक रखते हैं दोनों हमलावर, 27 साल पहले छोड़ा था हैदराबाद

तेलंगाना पुलिस ने मंगलवार को बताया कि हमले के दौरान ऑस्ट्रेलियाई पुलिस की गोली से मारे गए अक़रम मूल रूप से हैदराबाद के रहने वाले थे।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड17 Dec 2025, 07:09 AM IST
Bondi Beach Shooting: भारत से ताल्लुक रखता है बॉन्डी बीच हमलावर, 27 साल पहले छोड़ा था हैदराबाद
Bondi Beach Shooting: भारत से ताल्लुक रखता है बॉन्डी बीच हमलावर, 27 साल पहले छोड़ा था हैदराबाद

सिडनी के बॉन्डी बीच पर रविवार को हुए सामूहिक गोलीकांड, जिसमें यहूदी त्योहार हनुक्का के दौरान 15 लोगों की मौत हो गई, के दो आरोपियों में से एक व्यक्ति मूल रूप से हैदराबाद का रहने वाला था और ऑस्ट्रेलिया में लगभग तीन दशक से रहने के बावजूद उसके पास अब भी भारतीय पासपोर्ट था।

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इस हमले के मुख्य आरोपी साजिद अकरम (50 वर्ष) को पुलिस ने घटनास्थल पर ही गोली मार दी। उसका बेटा नावेद अकरम (24 वर्ष), जिस पर उनके साथ मिलकर हमला करने का आरोप है, जीवित बच गया और फिलहाल पुलिस पहरे में अस्पताल में भर्ती है। ऑस्ट्रेलियाई जांच एजेंसियों ने इस हमले को तथाकथित इस्लामिक स्टेट से प्रेरित एक आतंकी हमला बताया है।

साजिद अकरम कौन था

तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक के अनुसार, साजिद अकरम हैदराबाद का मूल निवासी था। वह नवंबर 1998 में छात्र वीज़ा पर ऑस्ट्रेलिया गया था। पुलिस ने बताया कि उसने भारत में कॉमर्स (बी.कॉम) की पढ़ाई पूरी की थी और नौकरी की तलाश में विदेश गया था। साजिद अकरम लगभग 27 वर्षों तक ऑस्ट्रेलिया में रहा। इस दौरान उसका हैदराबाद में अपने परिवार से बहुत कम संपर्क था।

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तेलंगाना पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ किया कि अकरम के कथित कट्टरपंथी बनने और भारत के बीच किसी तरह के वैचारिक या संचालन संबंध का कोई संकेत नहीं मिला है। अकरम आखिरी बार 2022 में हैदराबाद आया था। उसके पास अब भी भारतीय पासपोर्ट था, जबकि उसके दोनों बच्चे एक बेटा और एक बेटी ऑस्ट्रेलिया में जन्मे थे और वे ऑस्ट्रेलियाई नागरिक हैं।

जांच अधिकारियों के अनुसार, पारिवारिक विवादों के कारण साजिद अकरम का अपने रिश्तेदारों से वर्षों पहले ही रिश्ता टूट चुका था। परिवार के लोगों ने उससे लंबे समय पहले ही नाता तोड़ लिया था।

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पुलिस के मुताबिक, 2017 में अपने पिता की मौत पर भी वह अंतिम संस्कार की नमाज़ में शामिल नहीं हुआ था। ऑस्ट्रेलिया जाने के बाद साजिद अकरम ने वेनेरा ग्रोसो नाम की एक महिला से शादी की, जिन्हें पुलिस ने यूरोपीय मूल की बताया है। दंपति के दो बच्चे थे नावेद और एक बेटी। यह परिवार स्थायी रूप से ऑस्ट्रेलिया में ही बस गया था।

बॉन्डी बीच हमला

रविवार को बॉन्डी बीच पर हनुक्का उत्सव के दौरान यह हमला हुआ। यह जगह ऑस्ट्रेलिया की सबसे मशहूर सार्वजनिक जगहों में से एक है। कार्यक्रम में शामिल परिवारों और समुदाय के लोगों के बीच अचानक गोलीबारी शुरू हो गई, जिसमें 15 लोगों की जान चली गई। मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया की संघीय पुलिस आयुक्त क्रिसी बैरेट ने कहा कि यह हमला इस्लामिक स्टेट से प्रेरित एक आतंकी हमला था।

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उन्होंने कहा, “जिस तरह से आरोपियों ने इस हमले को अंजाम दिया, उससे साफ है कि उन्हें पीड़ितों की उम्र या हालत से कोई फर्क नहीं पड़ा। ऐसा लगता है कि उनका मकसद सिर्फ ज्यादा से ज्यादा लोगों की हत्या करना था।” अधिकारियों के अनुसार, आरोपी पिता और बेटा थे, जिनकी उम्र 50 और 24 साल थी। साजिद अकरम को मौके पर ही मार दिया गया, जबकि नावेद अकरम घायल हो गया और अस्पताल में है।

हमले में इस्तेमाल की गई एक गाड़ी, जो बेटे के नाम पर पंजीकृत थी, पुलिस ने जब्त कर ली है। जांच के दौरान उसमें से देसी विस्फोटक उपकरण और तथाकथित इस्लामिक स्टेट से जुड़े दो झंडे बरामद किए गए।

हाल में की थी फिलीपींस यात्रा

ऑस्ट्रेलियाई पुलिस दोनों आरोपियों की उस यात्रा की भी जांच कर रही है, जो उन्होंने हमले से एक महीने पहले फिलीपींस की थी। फिलीपींस के इमिग्रेशन ब्यूरो ने बीबीसी को बताया कि साजिद अकरम और उसका बेटा 1 नवंबर को देश में दाखिल हुए थे और 28 नवंबर को वहां से लौट गए थे।

इमिग्रेशन विभाग की प्रवक्ता डाना सैंडोवल के अनुसार, साजिद अकरम भारतीय पासपोर्ट पर यात्रा कर रहा था, जबकि नावेद अकरम के पास ऑस्ट्रेलियाई पासपोर्ट था। दोनों ने फिलीपींस के दक्षिणी शहर दावाओ को अपनी अंतिम मंज़िल बताया था और सिडनी लौटने की टिकटें भी पहले से बुक थीं।

दावाओ शहर मिंडानाओ द्वीप पर स्थित है, जो लंबे समय से गरीबी से जूझ रहे इलाकों में सक्रिय इस्लामी उग्रवादी समूहों के लिए जाना जाता रहा है। अबू सय्याफ जैसे संगठनों ने अतीत में इस्लामिक स्टेट के प्रति निष्ठा जताई थी और कुछ विदेशी आतंकियों को पनाह दी थी।

हालांकि, फिलीपींस की सेना ने फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं की है कि दोनों आरोपियों ने वहां किसी तरह का सैन्य प्रशिक्षण लिया था। सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि पिछले कई दशकों में सैन्य अभियानों के कारण वहां के उग्रवादी संगठन काफी कमजोर हो चुके हैं और हाल के वर्षों में विदेशी आतंकियों की मौजूदगी के कोई ठोस संकेत नहीं मिले हैं। ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों का कहना है कि फिलीपींस यात्रा का असली मकसद और वहां जिन जगहों पर दोनों गए, उनकी जांच अभी जारी है।

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