ऑस्ट्रेलिया में रविवार को लोगों ने एक व्यक्ति की जमकर तारीफ की, जिसे “हीरो” बताया जा रहा है। यह घटना सिडनी के बॉन्डी बीच पर हुई सामूहिक गोलीबारी के दौरान सामने आई, जो पिछले कई वर्षों में देश का सबसे घातक हमला माना जा रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में दिखा कि एक निहत्था व्यक्ति गोलियां चलने के बीच एक हमलावर को पकड़कर काबू कर लेता है। माना जा रहा है कि उसकी इस बहादुरी से कई लोगों की जान बच गई।
करीब 15 सेकंड के वीडियो में देखा जा सकता है कि वह व्यक्ति पहले खड़ी कारों के पीछे छिपता है और फिर पीछे से दौड़कर हमलावर पर झपटता है। वह हमलावर की गर्दन पकड़ता है, उसके हाथ से राइफल छीन लेता है और उसे जमीन पर गिरा देता है।
इसके बाद वह उसी हथियार को हमलावर की ओर तान देता है। स्थानीय चैनल 7न्यूज़ ने इस व्यक्ति की पहचान 43 वर्षीय अहमद अल अहमद के रूप में की है, जो पेशे से फल विक्रेता हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हमले में उन्हें दो गोलियां लगीं।
7न्यूज़ ने मुस्तफा नाम के एक व्यक्ति से बात की, जिन्होंने खुद को अहमद का चचेरा भाई बताया। उन्होंने कहा, “वह अस्पताल में है और हमें अभी ठीक से नहीं पता कि अंदर क्या स्थिति है। हमें उम्मीद है कि वह ठीक हो जाएगा। वह 100 प्रतिशत हीरो है।” बताया गया कि अहमद की उसी रात सर्जरी होनी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें हथियार चलाने का कोई अनुभव नहीं था और वे सिर्फ वहां से गुजर रहे थे, तभी उन्होंने दखल देने का फैसला किया।
ऑनलाइन लोग उनकी बहादुरी और तेज प्रतिक्रिया की खूब सराहना कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने भी अहमद को “हीरो” बताया। पुलिस के अनुसार, इस गोलीबारी में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई। यह हमला बॉन्डी बीच पर हनुक्का के एक कार्यक्रम के दौरान यहूदी समुदाय को निशाना बनाकर किया गया। 29 लोगों को अस्पताल ले जाया गया, जिनमें एक बच्चा भी शामिल है।
पुलिस ने बताया कि दो संदिग्धों की पहचान हुई है। इनमें से एक की मौत हो चुकी है, जबकि दूसरा अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि पास में खड़ी एक गाड़ी से विस्फोटक उपकरण बरामद कर उन्हें सुरक्षित रूप से हटा लिया गया है।
न्यू साउथ वेल्स पुलिस के अनुसार, यह हमला उस समय हुआ जब हनुक्का के पहले दिन को मनाने के लिए सैकड़ों लोग जमा हुए थे। इस घटना को आतंकवादी हमला घोषित किया गया है। इज़राइल के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मरने वालों में एक इज़राइली नागरिक भी शामिल है।
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि हमले के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की तुरंत बैठक बुलाई गई। उन्होंने कहा, “हनुक्का बाय द सी कार्यक्रम के दौरान बॉन्डी में एक बेहद भयावह आतंकवादी हमला हुआ है। यह हनुक्का के पहले दिन यहूदी ऑस्ट्रेलियाइयों को निशाना बनाकर किया गया हमला है, जो खुशी और आस्था का दिन होना चाहिए था। यह बुराई, यहूदी विरोध और आतंकवाद का कृत्य है, जिसने हमारे देश के दिल पर वार किया है।”
उन्होंने आगे कहा, “यहूदी ऑस्ट्रेलियाइयों पर हमला हर ऑस्ट्रेलियाई पर हमला है। हमारे देश में नफरत, हिंसा और आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं है। मैं साफ कहना चाहता हूं कि हम इसे खत्म करेंगे।”
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमले से पहले ऑस्ट्रेलिया सरकार पर यहूदी विरोध बढ़ने में योगदान देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “तीन महीने पहले मैंने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था कि आपकी नीतियां यहूदी विरोध की आग में घी डाल रही हैं।” वह अगस्त में भेजे गए उस पत्र का जिक्र कर रहे थे, जब कैनबरा ने फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने की घोषणा की थी।
नेतन्याहू ने दक्षिणी इज़राइल में एक कार्यक्रम के दौरान टीवी संबोधन में कहा, “यहूदी विरोध एक कैंसर है, जो तब फैलता है जब नेता चुप रहते हैं और कार्रवाई नहीं करते।”