CBSE New Language Rule: अब 9वीं क्लास के छात्रों को पढ़नी होंगी 3 भाषाएं, 1 जुलाई से लागू होगा नया नियम

CBSE New Language Rule: CBSE ने कक्षा 9 के छात्रों के लिए भाषा पढ़ाई को लेकर बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत छात्रों को अब अतिरिक्त भाषा अध्ययन से जुड़ी नई प्रक्रिया का पालन करना होगा। बोर्ड ने इसके लिए स्कूलों को भी जरूरी निर्देश दिए हैं।

Priya Shandilya( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
पब्लिश्ड17 May 2026, 02:35 PM IST
अब 9वीं के छात्रों को पढ़नी होंगी 3 भाषाएं, CBSE ने लागू किया नया नियम (सांकेतिक तस्वीर)
अब 9वीं के छात्रों को पढ़नी होंगी 3 भाषाएं, CBSE ने लागू किया नया नियम (सांकेतिक तस्वीर)

CBSE New Language Rule: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने 1 जुलाई 2026 से कक्षा नौवीं के छात्रों के लिए तीन भाषाओं को पढ़ना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया है। बोर्ड द्वारा जारी एक आधिकारिक लेटर (सर्कुलर) से यह जानकारी सामने आई है। दरअसल, यह नया बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या प्रारूप (NCF-SE) 2023 के नियमों को ध्यान में रखकर किया गया है।

क्या है 'तीन भाषाओं' का नया नियम?

15 मई को जारी हुए इस सर्कुलर के मुताबिक, 1 जुलाई से कक्षा 9 के छात्रों को जो तीन भाषाएं (जिन्हें तकनीकी रूप से R1, R2 और R3 नाम दिया गया है) पढ़नी होंगी, उनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी चाहिए।

10वीं में नहीं होगा बोर्ड एग्जाम

सीबीएसई जानता है कि अचानक से तीन भाषाएं अनिवार्य करने से बच्चों पर पढ़ाई का बोझ बढ़ सकता है। इसीलिए बोर्ड ने छात्रों को एक बहुत बड़ी राहत भी दी है। सीबीएसई ने साफ किया है कि कक्षा 10वीं में इस तीसरी भाषा (R3) के लिए कोई मुख्य बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। इसका पूरा मूल्यांकन और परीक्षा स्कूल के स्तर पर ही होगी, जिसे इंटरनल असेसमेंट कहा जाता है।

इस परीक्षा में छात्र का जो भी प्रदर्शन होगा, उसे सीबीएसई के फाइनल सर्टिफिकेट में दिखाया जाएगा। बोर्ड ने यह भी साफ कर दिया है कि इस तीसरी भाषा के नंबरों या प्रदर्शन के कारण किसी भी छात्र को 10वीं की बोर्ड परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा। इसके लिए सैंपल पेपर जल्द ही जारी किए जाएंगे।

स्कूलों को क्या निर्देश दिए गए?

बोर्ड ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे 30 जून 2026 तक अपने ओएएसआईएस (OASIS) पोर्टल पर कक्षा 6 से 9 तक के तीसरी भाषा के कोर्सेज की जानकारी को अपडेट कर दें।

शिक्षक नहीं होने पर क्या होगा?

इसके साथ ही, सीबीएसई ने उन स्कूलों की चिंता भी दूर की है जहां भारतीय भाषाओं को पढ़ाने वाले क्वालिफाइड टीचर्स की कमी है। बोर्ड ने कहा है कि स्कूल इसके लिए कुछ समय का इंतजाम कर सकते हैं। जैसे दो स्कूल आपस में टीचर्स शेयर कर सकते हैं, कंप्यूटर या ऑनलाइन क्लास की मदद ली जा सकती है, या फिर रिटायर्ड भाषा शिक्षकों और योग्य पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षकों की मदद ली जा सकती है।

किन छात्रों को मिलेगी इसमें छूट?

इस नए नियम में कुछ खास परिस्थितियों में छूट भी दी गई है। 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' के नियमों के तहत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWNSN) को इस नियम से छूट मिलेगी। इसके अलावा, जो विदेशी छात्र या एनआरआई बच्चे भारत वापस लौट रहे हैं, उन्हें दो मूल भारतीय भाषाएं पढ़ने के नियम से मामले के आधार पर राहत मिल सकती है।

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