
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह अभिनेत्री सेलिना जेटली के भाई मेजर (रिटायर्ड) विक्रांत कुमार जेटली को कानूनी मदद उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाए। विक्रांत पिछले साल सितंबर से यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) में एक कथित “राष्ट्रीय सुरक्षा मामले” में हिरासत में हैं।
न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने सेलिना की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र से जवाब मांगा और यह भी निर्देश दिया कि सेलिना और उनके भाई के बीच संपर्क स्थापित करने की कोशिश की जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि एक नोडल अधिकारी (समन्वय अधिकारी) नियुक्त किया जाए, जो यूएई के अधिकारियों के साथ संपर्क में रहे।
सेलिना, जो अपने वकीलों राघव कक्कर, रिभव पांडे और माधव अग्रवाल के माध्यम से कोर्ट पहुंची हैं, ने कहा कि उनके भाई को 6 सितंबर 2024 को यूएई में गैरकानूनी तरीके से अगवा कर हिरासत में लिया गया। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल से वह अपने भाई की स्थिति या उनके स्वास्थ्य और कानूनी हालात के बारे में कोई जानकारी नहीं जुटा पा रही हैं, जबकि उन्होंने भारत सरकार से कई बार मदद मांगी।
केंद्र सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि विक्रांत को यूएई में “राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले” में गिरफ्तार किया गया है और भारतीय अधिकारियों ने उनकी पत्नी से संपर्क किया है तथा विक्रांत को कांसुलर एक्सेस (राजनयिक पहुंच) भी दी गई है। हालांकि, सेलिना के वकील ने बताया कि विक्रांत अपनी पत्नी से अलग रह रहे हैं।
विक्रांत 2016 से यूएई में रह रहे थे और वहां की मातीती ग्रुप नाम की कंपनी में काम कर रहे थे, जो ट्रेडिंग, कंसल्टेंसी और रिस्क मैनेजमेंट का काम करती है। सेलिना ने बताया कि पिछले एक साल में उनके भाई से मई, जून, अगस्त और सितंबर 2025 में सिर्फ चार बार दूतावास अधिकारियों ने मुलाकात की। उन्हें अपने भाई की गिरफ्तारी के बारे में भी तीन हफ्ते बाद, उनकी पत्नी से ही पता चला।
सेलिना का कहना है कि उनके भाई को लंबे समय तक हिरासत में रखे जाने से मानसिक पीड़ा हुई है और अब वे संज्ञानात्मक कमजोरी (याददाश्त और सोचने की क्षमता में कमी) और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिनका इलाज नहीं हो रहा।
अपनी याचिका में सेलिना ने कोर्ट से अपील की है कि उनके भाई को प्रभावी कानूनी सहायता दी जाए, कानूनी खर्च का प्रबंध किया जाए, और भारत सरकार को निर्देश दिया जाए कि वे भाई-बहन के बीच नियमित संपर्क और बातचीत सुनिश्चित करें। अब यह मामला 6 दिसंबर को फिर से अदालत में सुना जाएगा।
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