Chaitra Purnima 2026: साल में 12 पूर्णिमा होती हैं और हर एक का अपना अलग महत्व होता है। लेकिन चैत्र पूर्णिमा को थोड़ा खास माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा से जुड़ा होता है और हिंदू मान्यताओं में इसका विशेष स्थान है।
मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ था। इसलिए चैत्र पूर्णिमा के दिन ही हनुमान जयंती मनाई जाती है। इस वजह से इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है। लोग इस दिन व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और अच्छे जीवन, सुख-शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।
चैत्र पूर्णिमा 2026 की तारीख और समय
द्रिक पंचांग के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल 2026 को सुबह 07:06 बजे शुरू होगी और 2 अप्रैल 2026 को सुबह 07:42 बजे समाप्त होगी।
पूर्णिमा व्रत और चंद्रमा की पूजा 1 अप्रैल को की जाएगी, जबकि स्नान-दान 2 अप्रैल को होगा। इसी दिन हनुमान जयंती भी मनाई जाएगी।
पूर्णिमा पर स्नान-दान का महत्व
पूर्णिमा के दिन स्नान-दान करना बहुत शुभ माना जाता है। यह परंपरा काफी समय से चली आ रही है, जिसमें लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और दान करते हैं।
चैत्र पूर्णिमा पर पूजा और व्रत के साथ-साथ रात में कुछ विशेष काम भी किए जाते हैं, जिनसे घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आने की मान्यता है।
चैत्र पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी की कृपा पाने के उपाय
- ईशान कोण में दीपक जलाएं: प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा करें और घर के उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा में दीपक जलाएं। माना जाता है कि इससे माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में समृद्धि आती है।
- श्री सूक्त का पाठ करें: माता लक्ष्मी के सामने बैठकर दीपक जलाएं और श्री सूक्त का पाठ करें।
- चंद्रमा को अर्घ्य दें: पूर्णिमा की रात चंद्रमा को कच्चे दूध, चीनी और चावल मिलाकर अर्घ्य दें।
ये सभी उपाय बहुत आसान हैं। इन्हें लोग इस विश्वास के साथ करते हैं कि इससे जीवन में शांति, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)