
Chandra Grahan 2026 LIVE: चंद्र ग्रहण शुरू हो गया है। यह समय भारत में कई लोगों के लिए धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। सूतक काल के दौरान आमतौर पर मंदिर बंद रहते हैं और श्रद्धालु ग्रहण समाप्त होने तक कुछ विशेष नियमों का पालन करते हैं।
यह चंद्र ग्रहण कई चरणों में होगा, जिसमें उपछाया (पेनुम्ब्रल), आंशिक और पूर्ण ग्रहण शामिल हैं। इस कारण श्रद्धालुओं के साथ-साथ आकाश देखने के शौकीनों में भी उत्सुकता बनी हुई है। लोग चंद्र ग्रहण के सही समय को लेकर लगातार जानकारी ले रहे हैं।
धार्मिक महत्व के अलावा यह ग्रहण एक शानदार खगोलीय घटना भी है। चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे (IST) शुरू होगा और शाम लगभग 6:46 बजे (IST) समाप्त होगा।
सूतक काल शुरू होने के बाद घरों और मंदिरों में तैयारियां और सावधानियां बरती जा रही हैं। कई लोग इस दौरान कुछ कामों से परहेज करते हैं और ग्रहण खत्म होने के बाद पूजा-पाठ या अन्य धार्मिक कार्य करते हैं।
खगोल वैज्ञानिकों का कहना है कि अलग-अलग जगहों पर ग्रहण की दृश्यता मौसम और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। जो लोग बाहर जाकर ग्रहण देखने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए प्रशासन ने सुरक्षित तरीके से देखने की सलाह भी जारी की है।
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शाम 06:47 PM पर ग्रहण के मोक्ष के बाद अब चंद्रमा अपनी पूरी रोशनी के साथ आसमान में है। मंदिर के पट खुल गए हैं। देशभर के मंदिरों में 'शुद्धिकरण' के बाद विशेष आरती संपन्न हो चुकी है। अब सूतक का कोई भी प्रभाव मान्य नहीं है।
साल का पहला चंद्र ग्रहण खत्म हो चुका है। अब इसके बाद स्नान दान जरूर करना चाहिए। इसके साथ ही घर पर और पूजा स्थल में गंगा जल जरूर छिड़कना चाहिए। इससे ग्रहण की नकारात्मक ऊर्जा चली जाती है।
चंद्र ग्रहण का प्रभाव सूतक काल से लेकर मोक्ष काल तक रहता है। मोक्ष काल में ही चंद्रमा को ग्रहण से पूर्ण रूप से मोक्ष मिलता है। इस ग्रहण का मोक्ष काल शाम 7.53 बजे तक है। इस वक्त चंद्रमा पूर्ण रूप से ग्रहण की छाया से बाहर आएंगे। लेकिन वो आम इंसानों पर लागू नहीं होता है। लिहाजा स्नान करके घर को गंगाजल से शुद्ध कर सकते हैं। ग्रहण के बाद दान-दक्षिणा करने से भी बड़ा लाभ मिलता है।
यह 2026 का पहला चंद्र ग्रहण है। करीब 2-3 हफ्ते पहले, एक सूर्य ग्रहण भी हुआ था... कहते हैं कि जब भी सूर्य ग्रहण होता है, तो उसके बाद चंद्र ग्रहण भी जरूर होता है। तो, आज, 3 मार्च को चंद्र ग्रहण है। पेनम्ब्रल फेज दोपहर करीब 2.15 बजे शुरू हुआ। दिल्ली की खास बात करें तो, हम इसे पीक टाइम पर शाम करीब 6.30 बजे देख पाएंगे। दिल्ली में सनसेट शाम करीब 6.22 बजे होता है और उसी समय चांद निकलेगा। तो, जैसे ही सूरज डूबेगा, चांद जल्दी निकल आएगा। लेकिन उसकी ऊंचाई इतनी कम होगी कि हम उसे देख नहीं पाएंगे, दिल्ली में उसे देखना बहुत मुश्किल होगा। भारत में, हम गुवाहाटी, अरुणाचल प्रदेश, आइजोल, मिजोरम में पार्शियल चंद्र ग्रहण देख पाएंगे, क्योंकि वहां सूरज जल्दी डूब जाता है और पहाड़ों की वजह से ऊंचाई है। फुल चंद्र ग्रहण दुनिया के वेस्टर्न हिस्से अमेरिका, अलास्का और दूसरे देशों में दिखेगा। भारत में केवल आंशिक चंद्र ग्रहण दिखाई देगा।- ऋषभ जैन, सीनियर साइंस एजुकेटर, नेहरू प्लेनेटेरियम, दिल्ली
शाम 5 बजकर 03 मिनट पर चंद्र ग्रहण अपने परमग्रास चरण में प्रवेश कर चुका है। यह ग्रहण का मध्य काल है।
ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण का समय गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सतर्क रहना चाहिए। ग्रहण के दौरान चंद्रमा से निकलने वाली किरणों को अशुद्ध माना गया है, जिसका असर संवेदनशील अवस्था में हो सकता है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ग्रहण का समय बेहद संवेदनशील माना जाता है। इस दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक रहता है। ग्रहण काल में सोने से मानसिक और शारीरिक ऊर्जा प्रभावित हो सकती है। ऐसे में ग्रहण काल के दौरान सोने से बचना चाहिए। इसके अलावा ग्रहण काल के दौरान नाखून काटना, अनावश्यक खान-पान से भी परहेज करना चाहिए।
आज 3 मार्च के लगने वाला चंद्रग्रहण दोपहर 3.20 बजे शुरू हो गया है। चंद्रग्रहण कुल 3 घंटे 27 मिनट का होगा। वहीं खग्रास कुल 59 मिनट का जो 4 बजकर 34 मिनट से शुरू होगा। चंद्रग्रहण शाम् 6.47 बजे खत्म होगा और इसके साथ ही चंद्रग्रहण भी समाप्त हो जाएगा।
ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण को बेहद महत्वपूर्ण घटना माना जाता है। यह जापान (टोक्यो), दक्षिण कोरिया, चीन और वियतनाम में यह शाम के समय उदय होते चंद्रमा के साथ दिखाई देगा। प्रशांत महासागर के द्वीपों पर यह ग्रहण अपनी पूरी अवधि (लगभग 5 घंटे 39 मिनट) के लिए रात भर दिखाई देगा। वहीं ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में दिखाई देगा। इसके अलावा भारत के कई शहरों में देख सकेंगे। इसमें दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद और पटना जैसे बड़े शहरों के नाम शामिल हैं।
दिल्ली- शाम 6.26 बजे।
नोएडा, शाम 6.26 बजे।
गुरुग्राम- शाम 6.02 बजे।
गाजियाबाद- शाम 6.25 बजे।
चंद्रग्रहण को आज सबसे पहले अरुणाचल प्रदेश देखा जा सकेगा। दरअसल, यहां के तेजू नगर में चंद्रोदय शाम 5 बजकर 3 मिनट पर होगा। ऐसे में सबसे पहले चंद्र ग्रहण यहां देखा जा सकेगा।
चंद्र ग्रहण को आध्यात्मिक रूप से संवेदनशील समय माना जाता है। इस दौरान मंत्र जाप करने से मन शांत, भावनाएं संतुलित और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा मिलती है। महामृत्युंजय, गायत्री, ॐ नमः शिवाय, चंद्र मंत्र और हरे कृष्ण महामंत्र का जप सकारात्मकता और आंतरिक शक्ति बढ़ाने में सहायक माना गया है। पढ़िए पूरी खबर विस्तार से
चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। पूर्ण ग्रहण में चंद्रमा लाल दिखाई देता है क्योंकि सूर्य की लाल किरणें पृथ्वी के वातावरण से मुड़कर उस तक पहुंचती हैं। इसे नंगी आंखों से देखना सुरक्षित है। पढ़िए पूरी डिटेल
चंद्र ग्रहण का सूतक काल 3 मार्च सुबह 6:20 बजे से शुरू हुआ। ग्रहण शाम 6:26 बजे चंद्रमा उदय के बाद दिखाई देगा और लगभग 6:46 बजे तक रह सकता है। सूतक में शुभ कार्य नहीं किए जाते। पूर्ण ग्रहण में चंद्रमा लाल दिखाई देता है, जिसे ब्लड मून कहते हैं। यहां पढ़िए पूरी खबर विस्तार से
आज यानी 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण शुरू हो गया हैा यह शाम 6:46 बजे तक चलेगा। भारत में अधिकतर जगहों पर केवल अंतिम चरण दिखाई देगा। इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखेगा, जिसे ब्लड मून कहा जाता है। सूतक काल सुबह से शुरू होगा। यहां देखिए पूरी डिटेल
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ग्रहण का समय बेहद संवेदनशील माना जाता है। इस दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक रहता है। ग्रहण काल में सोने से मानसिक और शारीरिक ऊर्जा प्रभावित हो सकती है। ऐसे में ग्रहण काल के दौरान सोने से बचना चाहिए। इसके अलावा ग्रहण काल के दौरान नाखून काटना, अनावश्यक खान-पान से भी दूर रहना चाहिए।
भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में सबसे अच्छा दृश्य मिलेगा, क्योंकि वहां सूर्यास्त जल्दी होता है। यहां लोग चंद्रमा की गहरी लाल चमक साफ देख सकते हैं।
उत्तर-पूर्व के प्रमुख शहर (लगभग 5:15 PM – 5:24 PM):
शहरों के अनुसार चंद्र उदय का समय:
भारत में लोग लगभग 15 से 45 मिनट तक लाल चंद्रमा की झलक देख पाएंगे। थोड़ी देर की यह झलक भी जीवनभर की याद बन सकती है।
ग्रहण के दौरान मंत्र जाप करना बहुत फलदायी माना गया है। जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा की स्थिति कमजोर है, वे चंद्र मंत्र का जाप कर सकते हैं- 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः.' इसके अलावा 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। महामृत्युंजय मंत्र और गायत्री मंत्र का जाप भी इस समय लाभकारी माना जाता है। वहीं अगर आपके पास गुरु मंत्र है तो इसका भी जाप कर सकते हैं। इतना ही नहीं आप नाम मंत्र का भी जाप कर सकते हैं।
दिल्ली में शाम 6 बजकर 21 मिनट से
जालंधर में शाम 6 बजकर 29 मिनट से
देहरादून में शाम 6 बजकर 27 मिनट से
वाराणसी में शाम 6 बजकर 2 मिनट से
चंडीगढ में शाम 6 बजकर 22 मिनट से
जम्मू में शाम 6 बजकर 31 मिनट से
इम्फाल में शाम 5 बजकर 13 मिनट से परमग्रास
1. तुलसी पत्र और कुशा घास मिलाएं
ग्रहण के समय खाने की चीजों में तुलसी पत्र और कुशा घास डालना शुभ माना जाता है। इससे भोजन को शुद्ध माना जाता है।
2. मंत्र जाप करें
ग्रहण के समय मंत्रों का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है। भक्त भगवद गीता, रामचरितमानस या सुंदरकांड के मंत्रों का पाठ कर सकते हैं।
3. धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें
चंद्र ग्रहण के दौरान धार्मिक किताबें पढ़ना मानसिक शांति और आध्यात्मिक सुरक्षा देता है।
4. ग्रहण से पहले और बाद में स्नान करें
ग्रहण शुरू होने से पहले और समाप्त होने के बाद स्नान करना शरीर और मन को शुद्ध करने के लिए अच्छा माना जाता है।
5. मूर्तियों और तस्वीरों को ढक दें
ग्रहण के समय देवी-देवताओं की मूर्तियों और तस्वीरों को कपड़े से ढक देना चाहिए, ताकि उन पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
6. गंगाजल का छिड़काव करें
ग्रहण खत्म होने के बाद घर में गंगाजल छिड़कना वातावरण को पवित्र करने के लिए अच्छा माना जाता है।
7. हनुमान चालीसा का पाठ करें
ग्रहण के समय हनुमान चालीसा पढ़ना सुरक्षा और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है।
8. ब्रह्मचर्य का पालन करें
ग्रहण के दौरान किसी भी तरह की शारीरिक निकटता से बचना चाहिए।
9. भोजन न करें
चंद्र ग्रहण के समय खाना नहीं खाना चाहिए। भोजन ग्रहण समाप्त होने के बाद ही करें।
10. सोने से बचें
ग्रहण के समय सोना अशुभ माना जाता है, इसलिए इस दौरान जागते रहें।
11. कोई शुभ काम शुरू न करें
ग्रहण के समय नया व्यापार, नई नौकरी या कोई भी शुभ कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।
12. तेज धार वाले औजारों का उपयोग न करें
ग्रहण के दौरान चाकू, कैंची, सुई या किसी भी तेज वस्तु का उपयोग नहीं करना चाहिए।
13. मूर्तियों को स्पर्श न करें
ग्रहण के समय देवी-देवताओं की मूर्तियों या पवित्र तस्वीरों को छूने से बचें।
14. तुलसी को न छुएं
तुलसी को पृथ्वी पर देवी का रूप माना जाता है, इसलिए चंद्र ग्रहण के दौरान तुलसी के पौधे को छूना नहीं चाहिए।
इस साल चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा के दिन पड़ रहा है। फाल्गुन पूर्णिमा वही तिथि है, जिस दिन परंपरागत रूप से होलिका दहन किया जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान किसी भी शुभ कार्य या पूजा-पाठ को करना उचित नहीं माना जाता। इसलिए ग्रहण की अवधि में होलिका दहन जैसे धार्मिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।
हालांकि, ग्रहण का कोई स्थायी या लंबे समय तक रहने वाला नकारात्मक प्रभाव नहीं होता। जैसे ही ग्रहण समाप्त हो जाता है, उसका प्रभाव भी खत्म माना जाता है।3 मार्च को लगने वाला चंद्र ग्रहण शाम 6:46 बजे समाप्त होगा। इस समय के बाद न तो ग्रहण का प्रभाव रहेगा और न ही भद्रा का दोष। जो लोग 3 मार्च को होलिका दहन करना चाहते हैं, वे ग्रहण समाप्त होने के बाद यह पूजा कर सकते हैं। 4 मार्च को रंगों वाली होली बिना किसी चिंता या हिचकिचाहट के खुशी-खुशी मनाई जा सकती है।
कुछ ज्योतिषी 3 मार्च के चंद्र ग्रहण को कर्मों का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बता रहे हैं। उनका मानना है कि इस दिन चंद्रमा की स्थिति केतु के साथ होने से पारंपरिक ज्योतिष में जिम्मेदारी, वैराग्य और नैतिक स्पष्टता जैसे विषयों पर ध्यान जाता है। केतु को अक्सर पिछले कर्मों और अधूरे मामलों से जोड़ा जाता है, जबकि चंद्रमा मन और भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है।
इस नजरिए से देखा जाए तो यह ग्रहण रुककर आत्मचिंतन करने का समय माना जा रहा है। अगर आप अपने मूल्यों और कर्मों के साथ संतुलन में हैं, तो यह समय आपको राहत और शांति का एहसास करा सकता है या धीरे-धीरे सकारात्मक प्रगति दिखा सकता है।
लेकिन अगर मन में कोई अधूरा विवाद, अपराधबोध या गलत फैसलों की टीस बाकी है, तो यह समय उन्हें स्वीकार करने और सही दिशा में कदम बढ़ाने का अवसर हो सकता है। आध्यात्मिक रूप से देखें तो यह डर का नहीं, बल्कि जागरूकता और समझ का समय है।
भारत में 3 मार्च को चंद्रमा का उदय शाम करीब 6:26 बजे होने की संभावना है। इसका मतलब है कि चंद्र ग्रहण देश के कई हिस्सों में चंद्रमा के क्षितिज के ऊपर आते ही दिखाई देना शुरू हो सकता है।
अनुमानित समय के अनुसार, ग्रहण शाम लगभग 6:26 बजे से दिखाई देना शुरू होगा और करीब 6:46 बजे तक चल सकता है। हालांकि, ग्रहण की सही अवधि और उसकी स्पष्टता स्थान और स्थानीय मौसम की स्थिति के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है।
चंद्र ग्रहण भारत के कई बड़े शहरों में दिखाई देगा, जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग इस खगोलीय घटना को देख सकेंगे। शुरुआती अनुमान के अनुसार यह चंद्र ग्रहण दिल्ली-एनसीआर, कोलकाता, चेन्नई, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, अहमदाबाद, पटना, भुवनेश्वर, गुवाहाटी, इम्फाल, शिलॉन्ग, कोहिमा और ईटानगर में देखा जा सकेगा। हालांकि, यह स्थानीय मौसम पर निर्भर करेगा।
विशेषज्ञों की सलाह है कि इन शहरों के लोग अपने क्षेत्र के अनुसार ग्रहण के शुरू होने और चरम समय की सही जानकारी जरूर जांच लें, क्योंकि अलग-अलग जगहों पर समय में थोड़ा फर्क हो सकता है। साफ आसमान होने पर लोग चंद्र ग्रहण के विभिन्न चरणों को अच्छी तरह देख पाएंगे।
साल 2026 में चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे (IST) शुरू होगा और शाम लगभग 6:46 बजे (IST) समाप्त होगा।
चंद्र ग्रहण प्रारंभ - दोपहर 3:20 बजे
चंद्र ग्रहण समाप्त - शाम 6:46 बजे
पूर्ण चंद्र ग्रहण- शाम 4:34 बजे से शाम 5:33 बजे तक
बच्चों, बुजुर्गों, बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं के लिए सूतक के नियम अलग माने जाते हैं। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार इन लोगों के लिए सख्त नियमों में थोड़ी छूट दी जाती है, क्योंकि उनकी सेहत और आराम को सबसे पहले रखा जाता है।
ये लोग दिन के समय जरूरत के अनुसार खाना खा सकते हैं, पानी पी सकते हैं या दवाइयाँ ले सकते हैं। उनके लिए कड़ा सूतक नियम चंद्र ग्रहण समाप्त होने से लगभग साढ़े तीन घंटे पहले से माना जाता है। आज के अनुसार यह समय दोपहर 3:16 बजे से शुरू माना गया है। फिर भी, किसी भी स्थिति में स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें और डॉक्टर की सलाह को धार्मिक नियमों से ज्यादा महत्व दिया जाता है।
ग्रहण का समय कई धार्मिक परंपराओं में आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है। इसे आत्मचिंतन और मन की शांति के लिए अच्छा समय माना जाता है। इस दौरान लोग सामान्य कामों में व्यस्त रहने के बजाय अपने भीतर ध्यान लगाने की कोशिश करते हैं।
ग्रहण के समय आमतौर पर मंत्र जाप, पूजा-पाठ, धार्मिक ग्रंथों का पाठ और ध्यान करने की सलाह दी जाती है। कुछ लोग इस समय मौन रखते हैं और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की कोशिश करते हैं। माना जाता है कि यह समय मन को शुद्ध और अनुशासित बनाने का अवसर देता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के समय रोजमर्रा के घरेलू काम जैसे कपड़े धोना, खाना बनाना, झाड़ू-पोंछा करना आदि करने से बचा जाता है। इस समय चाकू, कैंची या अन्य धारदार और मशीन से चलने वाले उपकरणों का उपयोग भी शुभ नहीं माना जाता।
मान्यता है कि ग्रहण का समय सामान्य घरेलू कार्यों के लिए अनुकूल नहीं होता। इसलिए लोगों को सलाह दी जाती है कि जरूरी काम सूतक काल शुरू होने से पहले पूरा कर लें या फिर ग्रहण समाप्त होने के बाद ही ऐसे काम दोबारा शुरू करें।
सूतक 3 मार्च सुबह 6:20 बजे से शुरू हो गया है और यह चंद्र ग्रहण के साथ शाम 6:46 बजे समाप्त होगा। इस दौरान परंपरागत मान्यताओं के अनुसार होली की तैयारियां, जैसे खाना बनाना या त्योहार की व्यवस्था करना, नहीं करनी चाहिए।
ग्रहण खत्म होने के बाद लोगों को स्नान करने और घर को शुद्ध करने की सलाह दी जाती है। इसके लिए घर में गंगाजल या पवित्र जल छिड़का जाता है। इसके बाद ही होली के पकवान बनाना शुरू करना चाहिए।
मान्यता है कि ग्रहण के समय बनाया गया भोजन अशुद्ध या नकारात्मक प्रभाव वाला हो सकता है। इसलिए कई घरों में रखे हुए खाने में तुलसी के पत्ते या कुश घास रख दी जाती है, ताकि वह सुरक्षित और शुद्ध बना रहे।
ज्योतिष के अनुसार यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि में लग रहा है, इसलिए इसका सबसे अधिक प्रभाव सिंह राशि वालों पर पड़ सकता है। सिंह के ठीक सामने कुंभ राशि होती है, इसलिए कुंभ राशि के लोगों को भी इस ग्रहण का असर अधिक माना जाता है।
सिंह और कुंभ राशि के लोगों को आज थोड़ा सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। बड़े आर्थिक फैसले लेने या कोई महत्वपूर्ण सौदा करने से बचना बेहतर रहेगा। बेवजह के विवाद और बहस से दूर रहें। वाहन चलाते समय विशेष सावधानी रखें और अपने जीवनसाथी तथा सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाए रखें।
ग्रहण समाप्त होने के बाद सभी राशियों के लोगों को स्नान करने, घर में गंगाजल या पवित्र जल का छिड़काव करने और अपने इष्ट देवता की पूजा करने की परंपरागत सलाह दी जाती है।
चंद्र ग्रहण के दौरान कई श्रद्धालु मानसिक शांति और आध्यात्मिक सुकून के लिए पूजा-पाठ और मंत्र जाप करते हैं। इस समय हनुमान चालीसा का पाठ करना बेहद शुभ और प्रभावशाली माना जाता है। मान्यता है कि इससे मन शांत रहता है और ग्रहण के समय मानी जाने वाली नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है।
हनुमान चालीसा के साथ कुछ भक्त सुंदरकांड का पाठ भी करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे आध्यात्मिक शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है। ये सभी परंपराएं आस्था पर आधारित हैं और लोग ग्रहण के दौरान सकारात्मकता और शांति पाने के लिए इन्हें अपनाते हैं।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा केतु के साथ स्थित है और उस पर सूर्य, बुध और मंगल का भी प्रभाव पड़ रहा है। यह ग्रहण सिंह राशि में हो रहा है, जो अग्नि तत्व की राशि मानी जाती है। परंपरागत ज्योतिष में चंद्र-केतु की युति और उस पर मंगल व राहु का प्रभाव अग्नि तत्व को मजबूत करता है। ऐसी स्थिति को अक्सर तनाव, अस्थिरता या दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में विवाद और टकराव बढ़ने के संकेत के रूप में देखा जाता है।
NASA के अनुसार 3 मार्च को होने वाला पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा गहरे लाल रंग का दिखाई देगा। इस घटना को “ब्लड मून” कहा जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उस समय पृथ्वी की छाया पूरी तरह चंद्रमा को ढक लेती है।
8 मार्च को रात के आकाश में शुक्र और शनि ग्रह एक-दूसरे के बहुत पास दिखाई देंगे। यह नज़ारा खगोल प्रेमियों के लिए खास होगा।
इसके बाद 20 मार्च को उत्तरी गोलार्ध में वसंत ऋतु की शुरुआत होगी। इस तरह मार्च 2026 का महीना आकाश देखने वालों के लिए काफी खास और रोमांचक रहने वाला है।