Chandra Grahan 2026: कब है साल का पहले चंद्र ग्रहण? डिटेल जानें ग्रहण की तिथि, समय और सूतक काल से जुड़े नियम

3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा पर वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा, जो भारत में दिखाई देगा। सूतक सुबह 6 बजकर 20 मिनट से शुरू होगा। इस दौरान पूजा, मंत्र जप और दान का विशेष महत्व है। भोजन, शुभ कार्य और बाहर जाना वर्जित माना गया है।

Manali Rastogi
अपडेटेड24 Feb 2026, 12:13 PM IST
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चंद्र ग्रहण
चंद्र ग्रहण(Pexels)

Chandra Grahan 2026: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण आने वाला है। हिंदू पंचांग को मानने वाले लोगों के लिए यह केवल एक खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि धार्मिक आस्था और परंपराओं से जुड़ा विशेष समय है। चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन ही होता है और इस बार यह फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर पड़ रहा है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन घरों में शांति रहती है, मंदिरों के समय में बदलाव होता है और लोग अपनी दिनचर्या ग्रहण के अनुसार तय करते हैं।

चंद्र ग्रहण 2026 की तिथि और समय

चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को होगा। यह दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा और शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। इसकी कुल अवधि लगभग 3 घंटे 27 मिनट होगी, जो इसे वर्ष का सबसे लंबा ग्रहण बनाती है। यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए यहां इसके नियमों का पालन किया जाएगा।

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ज्योतिष के अनुसार यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लग रहा है। इसे भावनाओं, मानसिक स्थिति, स्वास्थ्य और धन से जुड़े मामलों के लिए संवेदनशील माना जाता है।

सूतक काल और नियम

शास्त्रों के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। इस आधार पर सूतक 3 मार्च की सुबह 6 बजकर 20 मिनट से आरंभ होगा और ग्रहण समाप्त होने तक रहेगा।

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सूतक के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। मूर्तियों को स्पर्श नहीं किया जाता और शुभ कार्य टाल दिए जाते हैं। इस समय को आत्मचिंतन और साधना के लिए उपयुक्त माना जाता है। मंत्र जप, ध्यान और प्रार्थना करना लाभकारी समझा जाता है।

ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें

ग्रहण से पहले दूध, दही और पके हुए भोजन में तुलसी के पत्ते डालने की परंपरा है। माना जाता है कि इससे भोजन शुद्ध बना रहता है। सूतक लगने के बाद खाना बनाना और भोजन करना वर्जित माना जाता है। ग्रहण के समय सोने से भी बचने की सलाह दी जाती है।

गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर के अंदर रहने की सलाह दी जाती है। चाकू, कैंची जैसी नुकीली वस्तुओं का प्रयोग नहीं किया जाता, क्योंकि परंपरा के अनुसार इससे गर्भस्थ शिशु पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

दान का महत्व

चंद्र ग्रहण के दिन दान का विशेष महत्व बताया गया है। इसे महादान का समय माना जाता है। माना जाता है कि इससे जन्म कुंडली में चंद्र दोष कम होता है। चंद्रमा का संबंध सफेद रंग से है, इसलिए चावल, चीनी, दूध या सफेद वस्त्र दान करना शुभ माना जाता है।

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जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा पर राहु, केतु या शनि का प्रभाव हो, उन्हें चांदी या मोती दान करने की सलाह दी जाती है। जरूरतमंदों को भोजन कराना, घर में दीप जलाना और देवी लक्ष्मी की आराधना करना मानसिक शांति और सुख समृद्धि के लिए लाभकारी माना गया है।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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