
कभी-कभी रात में चांद अचानक सफेद की जगह गहरा, तांबे जैसा या लाल दिखाई देता है। लोग तस्वीरें खींचते हैं और आसमान की ओर देखने लगते हैं। इस खूबसूरत घटना को चंद्र ग्रहण कहा जाता है। दिखने में यह रहस्यमय लगता है, लेकिन इसका कारण बहुत सरल विज्ञान है।
चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी बीच में आकर सूर्य की रोशनी को चंद्रमा तक पहुंचने से रोक देती है। आम तौर पर सूर्य की किरणें चंद्रमा पर पड़ती हैं और वह रोशनी हमें दिखाई देती है।
लेकिन ग्रहण के समय पृथ्वी अपनी बड़ी छाया अंतरिक्ष में डालती है। जब चंद्रमा इस छाया से गुजरता है, तो वह धीरे-धीरे धुंधला और कभी-कभी लाल दिखाई देने लगता है। सीधे शब्दों में कहा जाए तो जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक ही लाइन में होते हैं तब चंद्र ग्रहण होता है।
चंद्रमा हर महीने पृथ्वी का चक्कर लगाता है, फिर भी हर महीने ग्रहण नहीं होता। इसका कारण है कक्षाओं का झुकाव। चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की कक्षा से लगभग 5 डिग्री झुकी हुई है। इसलिए अधिकतर समय चंद्रमा पृथ्वी की छाया के ऊपर या नीचे से निकल जाता है। चंद्र ग्रहण तभी होता है जब:
पृथ्वी की छाया दो भागों में होती है:
1. पेनुम्ब्रा (हल्की छाया) – इसमें चंद्रमा थोड़ा धुंधला दिखता है, लेकिन बदलाव बहुत हल्का होता है।
2. उम्ब्रा (गहरी छाया) – यह बीच की गहरी छाया है, जहां चंद्रमा का रंग स्पष्ट रूप से बदलता है।
पेनुम्ब्रल चंद्र ग्रहण – चंद्रमा केवल हल्की छाया में जाता है। बदलाव कम दिखाई देता है।
आंशिक चंद्र ग्रहण – चंद्रमा का कुछ हिस्सा गहरी छाया में जाता है। ऐसा लगता है जैसे चंद्रमा का एक टुकड़ा गायब हो गया हो।
पूर्ण चंद्र ग्रहण – पूरा चंद्रमा उम्ब्रा में चला जाता है और लाल या तांबे जैसा दिखता है।
पूर्ण चंद्र ग्रहण के समय चंद्रमा लाल दिखता है, जिसे कभी-कभी “ब्लड मून” भी कहा जाता है। जब सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वातावरण से होकर गुजरती है, तो नीली किरणें बिखर जाती हैं। लाल और नारंगी किरणें मुड़कर चंद्रमा तक पहुंचती हैं। इस समय चंद्रमा पर पृथ्वी के सभी सूर्योदय और सूर्यास्त की लाल रोशनी एक साथ पड़ती है। यही वजह है कि वह लाल दिखता है।
हां, चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना पूरी तरह सुरक्षित है। सूर्य ग्रहण की तरह इसमें किसी खास चश्मे की जरूरत नहीं होती। आप आराम से बाहर जाकर इसे देख सकते हैं। दूरबीन या छोटे टेलीस्कोप से रंग और सतह के विवरण और स्पष्ट दिख सकते हैं। पूर्ण चंद्र ग्रहण कई घंटों तक चल सकता है। लाल अवस्था लगभग एक घंटे या उससे अधिक समय तक रह सकती है।
पृथ्वी की छाया बहुत बड़ी होती है, इसलिए चंद्रमा धीरे-धीरे उसमें से गुजरता है। यही कारण है कि यह घटना आराम से देखने लायक होती है। पुराने समय में लोग ग्रहण को शुभ या अशुभ संकेत मानते थे। भारत में इसे राहु और केतु की कथा से जोड़ा गया। अन्य संस्कृतियों में भी इसे भविष्य या संकेत माना जाता था।
आज विज्ञान ने इन मान्यताओं की जगह ले ली है, लेकिन ग्रहण देखने का रोमांच अब भी वैसा ही है। चंद्र ग्रहण हमें एक अद्भुत संतुलन की याद दिलाता है। सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगातार गति में रहते हुए एक पल के लिए पूरी तरह एक सीध में आ जाते हैं।
यह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि प्रकृति का नियम है। फिर भी जब अंधेरे आकाश में लाल चांद चमकता है, तो वह जादुई अनुभव देता है। अगली बार जब चंद्र ग्रहण हो, तो बस बाहर निकलें, आसमान की ओर देखें और इस सुंदर खगोलीय घटना का आनंद लें। यह याद दिलाता है कि साधारण प्राकृतिक नियम भी असाधारण दृश्य बना सकते हैं।
(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)
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