इस साल सरस्वती पूजा शुक्रवार, 23 जनवरी को मनाई जा रही है। यह दिन विद्या, संगीत और रचनात्मकता की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। देशभर में छात्र, शिक्षक और कलाकार इस दिन विशेष पूजा करते हैं। पंचमी तिथि 23 जनवरी को सुबह 2:28 बजे शुरू होकर 24 जनवरी को 1:46 बजे समाप्त होगी, इसलिए पूजा के लिए 23 जनवरी ही सही दिन है।
अक्सर लोग सोचते हैं कि पूरे देश में पूजा का एक ही समय होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। सरस्वती पूजा का मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय और स्थानीय मध्याह्न (दोपहर) के अनुसार तय किया जाता है। इसी वजह से अलग-अलग शहरों में पूजा का समय अलग होता है, खासकर पूर्वी और पश्चिमी भारत में।
पूजा मुहूर्त: सुबह 06:18 बजे से 11:48 बजे तक
पूजा मुहूर्त: सुबह 06:46 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक
पूजा मुहूर्त: सुबह 06:05 बजे से 11:35 बजे तक
पूजा मुहूर्त: सुबह 06:45 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक
पूजा मुहूर्त: सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक
पूजा मुहूर्त: सुबह 07:15 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक
पूजा मुहूर्त: सुबह 06:36 बजे से दोपहर 12:21 बजे तक
पूजा मुहूर्त: सुबह 06:50 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक
पूजा मुहूर्त: सुबह 07:22 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक
पूजा मुहूर्त: सुबह 07:16 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक
पूजा मुहूर्त: सुबह 07:19 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक
पूजा मुहूर्त: सुबह 07:08 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक
पूजा मुहूर्त: सुबह 06:54 बजे से दोपहर 12:16 बजे तक
सरस्वती पूजा मुहूर्त को आसान भाषा में समझें
सरल शब्दों में कहें तो सरस्वती पूजा सुबह सूर्योदय से लेकर दोपहर (मध्याह्न) तक करना सबसे अच्छा माना जाता है। यही कारण है कि कोलकाता और गुवाहाटी जैसे पूर्वी शहरों में पूजा जल्दी समाप्त हो जाती है, जबकि पश्चिमी शहरों में समय थोड़ा लंबा होता है। ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है बस अपने शहर के सुबह से दोपहर के बीच पूजा कर लें, यही परंपरा के अनुसार सही माना जाता है।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)