Kharna: छठ पर्व का दूसरा दिन, आज खरना की पूजा से शुरू होगा 36 घंटे का निर्जला व्रत, जानिए कब है अर्घ्य का समय

Chhath Day 2 Kharna: आज छठ पूजा का दूसरा दिन खरना है जो लोक आस्था और भक्ति का प्रतीक है। इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रख शाम को पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करती हैं। इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है। खरना से सप्तमी तक सूर्यदेव और छठी मैया की विशेष कृपा बरसती है।

Priya Shandilya
अपडेटेड26 Oct 2025, 07:34 AM IST
छठ पूजा का दूसरा दिन खरना (सांकेतिक तस्वीर)
छठ पूजा का दूसरा दिन खरना (सांकेतिक तस्वीर)

Kharna: भक्ति, आस्था और शुद्धता का प्रतीक छठ महापर्व देशभर में बड़ी श्रद्धा से मनाया जा रहा है। चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व अब अपने दूसरे दिन यानी खरना पर पहुंच गया है। नहाय-खाय से शुरुआत करने वाले व्रती अब 36 घंटे के निर्जला उपवास की ओर बढ़ चुके हैं।

नहाय-खाय से शुरू हुआ पर्व

शनिवार को सर्वार्थ सिद्धि और शोभन योग में छठ व्रत की शुरुआत ‘नहाय-खाय’ से हुई। अहले सुबह व्रतियों ने गंगाजल से स्नान कर अरवा चावल, चना दाल, लौकी की सब्जी और आंवले की चटनी का प्रसाद ग्रहण किया। यही इस व्रत की पवित्र शुरुआत मानी जाती है।

खरना का महत्व और पूजा विधि

आज रविवार को छठ व्रती खरना मना रही हैं। इस दिन व्रती पूरे दिन बिना अन्न-जल के उपवास रखती हैं और शाम में मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से खीर और रोटी बनाकर पूजा करती हैं। इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे के कठोर निर्जला व्रत का संकल्प लिया जाता है। खरना का प्रसाद ही व्रती का अंतिम सात्विक भोजन माना जाता है, जो शरीर और मन दोनों को तपस्या के लिए तैयार करता है।

पूजा और अर्घ्य का शुभ मुहूर्त

खरना पूजा: शाम 5:35 बजे से 8:22 बजे तक

अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य: शाम 5:34 बजे तक

उदयीमान सूर्य को अर्घ्य: सुबह 6:27 बजे के बाद

सूर्यदेव को अर्घ्य और सप्तमी का पारण

सोमवार की शाम व्रती अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देंगी, जबकि मंगलवार की सुबह उदयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करेंगी। इस दौरान व्रती तांबे या पीतल के पात्र में जल भरकर सूर्यदेव की पूजा करती हैं। ऐसा करने से आरोग्यता और ऊर्जा का आशीर्वाद मिलता है।

खरना से पारण तक बरसती है छठी मैया की कृपा

धार्मिक मान्यता है कि खरना से लेकर पारण तक व्रतियों पर छठी मैया की विशेष कृपा बरसती है। यह पर्व शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। खरना के प्रसाद में मौजूद ईख का रस और गुड़ त्वचा व आंखों के रोगों को दूर करता है और शरीर को निरोग बनाता है।

छठ लोकगीत और प्रसाद की परंपरा

छठ पूजा का हर दृश्य भक्ति से सराबोर होता है। व्रती जब प्रसाद तैयार करती हैं, तो लोकगीतों की गूंज पूरे घर-आंगन में फैल जाती है। पूजा में सिंदूर, चावल, बांस की टोकरी, दीपक, नारियल, शकरकंद, पान, गंगाजल, और ठेकुआ जैसे पारंपरिक प्रसाद का खास महत्व होता है।

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