
Chhath Puja 2025: चार दिनों के महापर्व छठ की शुरुआत हो गई है। नहाय खाय के बाद खरना का दिन आता है। खरना छठ पर्व का काफी अहम दिन होता है, क्योंकि इस दिन के प्रसाद का विशेष महत्व है। इसके साथ ही खरना का प्रसाद बड़े ही ध्यान से बनाना होता है। आइए जानते हैं खरना का प्रसाद बनाते हुए क्या नहीं करना चाहिए।
छठ पूजा के खरना व्रत में प्रसाद बनाते समय एल्युमिनियम के बर्तन का प्रयोग वर्जित माना जाता है। इसके पीछे धार्मिक, पारंपरिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण हैं। दरअसल छठ पूजा में प्रसाद को अत्यंत पवित्र माना जाता है। एल्युमिनियम को पारंपरिक रूप से अशुद्ध धातु माना गया है, इसलिए पूजा में इसका प्रयोग नहीं होता। एल्युमिनियम गर्म होने पर भोजन में रासायनिक तत्व छोड़ सकता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। छठ का प्रसाद मिट्टी, पीतल, कांसा या स्टील के बर्तनों में बनाना शुभ माना जाता है।
खरना के प्रसाद में मुख्य रूप से गुड़ की खीर, बिना नमक के गेंहू की रोटी, और सात्विक फल जैसे केला, सेब, नारियल आदि शामिल होते हैं। यह प्रसाद पूरी तरह शुद्ध और सात्विक होता है, जिसमें लहसुन, प्याज, मसाले या पैकेज्ड सामग्री का प्रयोग नहीं किया जाता। खरना का प्रसाद बनाकर उसे सूर्य देव व छठी मैया को अर्पित किया जाता है। उसके बाद व्रती इसे ग्रहण करते हैं, जिससे 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।
पंचांग के अनुसार, सूर्योदय सुबह 6 बजकर 29 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 41 मिनट पर होगा। ऐसे में आप खरना पूजा और प्रसाद अर्पण शाम 5:41 के बाद कर सकते हैं। इस समय प्रसाद चढ़ाकर आप छठी मैया का आशीर्वाद ले सकते हैं।
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