Chitragupta Maharaj ki Aarti in Hindi: आरती के बिना अधूरी है चित्रगुप्त भगवान की पूजा, हिंदी में पढ़िए संपूर्ण आरती

Chitragupta Maharaj ki Aarti Hindi Lyrics: दिवाली के बाद कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले भगवान चित्रगुप्त की पूजा भी जाती है। इस दिन पूजा के बाद आरती करना शुभ माना जाता है। इसलिए अगर आप भगवान चित्रगुप्त की पूजा कर रहे हैं, तो उनकी आरती जरूर पढ़ें।

Anuj Shrivastava
पब्लिश्ड22 Oct 2025, 04:04 PM IST
चित्रगुप्त भगवान की आरती
चित्रगुप्त भगवान की आरती

Chitragupta Maharaj ki Aarti in Hindi: दिवाली के दो दिन बाद चित्रगुप्त भगवान की पूजा की जाती है। यमराज के सहायक और सभी के कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले चित्रगुप्त महाराज की पूजा करने से सारे पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन सुबह उठकर शुभ मुहूर्त में भगवान चित्रगुप्त की पूजा होती है। उनकी कथा सुनी जाती है। उसके बाद आरती करके चित्रगुप्त भगवान का आशीर्वाद लिया जाता है। कहते हैं कि बिना आरती के चित्रगुप्त पूजा अधूरी मानी जाती है। आइए आपको बताते हैं कि चित्रगुप्त पूजा के बाद कौन सी आरती पढ़नी चाहिए।

चित्रगुप्त महाराज की आरती( Chitragupta Maharaj Aarti in Hindi)

ॐ जय चित्रगुप्त हरे, स्वामीजय चित्रगुप्त हरे।

भक्तजनों के इच्छित, फल को पूर्ण करे॥

॥ॐ जय चित्रगुप्त हरे॥

विघ्न विनाशक मंगलकर्ता, सन्तन सुखदायी।

भक्तन के प्रतिपालक, त्रिभुवन यशछायी॥

॥ॐ जय चित्रगुप्त हरे॥

रूप चतुर्भुज, श्यामल मूरत,पीताम्बर राजै।

मातु इरावती, दक्षिणा, वामअंग साजै॥

॥ॐ जय चित्रगुप्त हरे॥

कष्ट निवारक, दुष्ट संहारक, प्रभु अंतर्यामी।

सृष्टि सम्हारन, जन दुःखहारन, प्रकटभये स्वामी॥

॥ॐ जय चित्रगुप्त हरे॥

कलम, दवात, शंख, पत्रिका, कर में अति सोहै।

वैजयन्ती वनमाला, त्रिभुवन मनमोहै॥

॥ॐ जय चित्रगुप्त हरे॥

विश्व न्याय का कार्य सम्भाला, ब्रह्मा हर्षाये।

तैंतीस कोटि देवी देवता, तुम्हारे चरणन में धाये॥

॥ॐ जय चित्रगुप्त हरे॥

नृप सुदास अरू भीष्म पितामह, याद तुम्हें कीन्हा।

वेग विलम्ब न कीन्हौं, इच्छित फल दीन्हा॥

॥ॐ जय चित्रगुप्त हरे॥

दारा, सुत, भगिनी, सब अपने स्वास्थ के कर्ता।

जाऊँ कहाँ शरण में किसकी, तुम तज मैं भर्ता॥

॥ॐ जय चित्रगुप्त हरे॥

बन्धु, पिता तुम स्वामी, शरण गहूँ किसकी।

तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥

॥ॐ जय चित्रगुप्त हरे॥

जो जन चित्रगुप्त जी की आरती, प्रेम सहित गावैं।

चौरासी से निश्चित छूटैं, इच्छित फल पावैं॥

॥ॐ जय चित्रगुप्त हरे॥

न्यायाधीश बैंकुंठ निवासी, पाप पुण्य लिखते।

हम हैं शरण तिहारी, आस न दूजी करते॥

ॐ जय चित्रगुप्त हरे, स्वामीजय चित्रगुप्त हरे।

भक्तजनों के इच्छित, फल को पूर्ण करे॥

॥ॐ जय चित्रगुप्त हरे॥

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