Narak Chaturdashi Ki Hindi Katha: छोटी दिवाली पर कैसे शुरू हुई दीप जलाने की परंपरा? जानें नरक चतुर्दशी की कथा

Narak Chaturdashi Katha: छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी आज यानी 19 अक्टूबर को मनाई जा रही है। इस दिन यम दीप जलाने और हनुमानजी की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार की रक्षा होती है और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश मिलता है। 

Priya Shandilya
पब्लिश्ड19 Oct 2025, 04:49 PM IST
छोटी दिवाली पर जानें नरकासुर वध की कथा
छोटी दिवाली पर जानें नरकासुर वध की कथा

Choti Diwali Katha: दीपों का त्योहार सिर्फ दीवाली तक सीमित नहीं है, इसकी शुरुआत होती है नरक चतुर्दशी से, जिसे हम छोटी दिवाली भी कहते हैं। आज 19 अक्टूबर को देशभर में छोटी दिवाली मनाई जा रही है। इस दिन तेल से स्नान, हनुमानजी की पूजा और यम दीप जलाने की परंपरा निभाई जाती है। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।

क्यों मनाई जाती है नरक चतुर्दशी?

इस दिन की कहानी जुड़ी है एक राक्षस से नरकासुर, जो बहुत ताकतवर और घमंडी था। कहा जाता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से राक्षस नरकासुर का वध किया था। नरकासुर ने तीनों लोकों में आतंक फैला रखा था और 16 हजार से ज्यादा कन्याओं को बंदी बना लिया था। भगवान कृष्ण ने बुराई का अंत कर उन कन्याओं को मुक्त कराया था। इसी कारण यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।

चलिए नरक चतुर्दशी की कथा विस्तार से जानें।

नरकासुर वध की कथा (Narak Chaturdashi Katha)

बहुत पुराने समय की बात है। एक राक्षस था नरकासुर। ताकतवर था, लेकिन उससे भी ज्यादा घमंडी। उसने देवताओं से रत्न लूट लिए, इंद्र के कुंडल छीन लिए, और पृथ्वी की करीब 16,000 कन्याओं को बंदी बना लिया। उसका आतंक तीनों लोकों में फैल गया था।

नरकासुर के अत्याचारों से परेशान होकर देवताओं के राजा इंद्र ने भगवान कृष्ण से मदद मांगी। भगवान विष्णु ने कृष्ण का रूप लेकर नरकासुर को खत्म करने का फैसला किया। लेकिन नरकासुर को वरदान मिला था कि उसे कोई स्त्री ही मार सकती है। इसलिए भगवान कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा को साथ लिया। युद्ध हुआ, और सत्यभामा की मदद से नरकासुर का वध हुआ। इसके बाद भगवान कृष्ण ने 16,100 कन्याओं को मुक्त कराया, जो नरकासुर की कैद में थीं।

ऐसे शुरू हुई डीप जलाने की परंपरा

नरकासुर के अंत के बाद लोगों ने दीप जलाकर जश्न मनाया। कहा जाता है कि युद्ध के बाद भगवान कृष्ण ने तेल से स्नान किया था, इसलिए आज भी नरक चतुर्दशी पर तेल स्नान और उबटन लगाने की परंपरा निभाई जाती है।

यम दीपक जलाने का सही समय (Yam Deepak Muhurat)

छोटी दिवाली पर यमराज के नाम का दीपक जलाने की परंपरा भी है, जिसे यम दीपक कहा जाता है। इसे घर की दक्षिण दिशा में रखा जाता है। इस वर्ष यम दीपक जलाने का शुभ समय शाम 5:47 से 7:03 बजे तक रहेगा। माना जाता है कि इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

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