वंदे मातरम् से समझौता पड़ा देश को भारी, लोकसभा में कांग्रेस पर PM मोदी का सबसे तीखा प्रहार

लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के दबाव में वंदे मातरम् के साथ समझौता किया, जिसका परिणाम आगे चलकर देश के बंटवारे के रूप में सामने आया। 

Rishabh Shukla
अपडेटेड8 Dec 2025, 02:15 PM IST
लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

लोकसभा में आज राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर चर्चा की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर ऐतिहासिक आरोप लगाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब वंदे मातरम् देश की स्वतंत्रता चेतना का केंद्र था, उसी समय कांग्रेस मुस्लिम लीग के दबाव में इसके मूल स्वरूप से पीछे हट गई। पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने सामाजिक सद्भाव का मुखौटा पहनाकर वंदे मातरम् के टुकड़े किए, लेकिन सच यह है कि यह तुष्टिकरण की राजनीति का नतीजा था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिसने वंदे मातरम् पर समझौता किया, वही पार्टी आगे चलकर भारत के बंटवारे के लिए भी मजबूर हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र के इस बयान से सदन में सियासी माहौल और गरमा गया।

नेहरू-जिन्ना प्रसंग और मुस्लिम लीग का दबाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में ऐतिहासिक संदर्भ रखते हुए कहा कि जब मोहम्मद अली जिन्ना ने वंदे मातरम् का विरोध शुरू किया, तब तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को पत्र लिखकर जिन्ना की भावनाओं से सहमति जताई। मोदी के मुताबिक, नेहरू ने आनंद मठ की पृष्ठभूमि को मुसलमानों के लिए इरिटेटिंग बताया था। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक दिए और उसी के दबाव में वंदे मातरम् को कमजोर किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इसे सामाजिक सौहार्द का नाम जरूर दिया लेकिन इतिहास इस बात का गवाह है कि यह तुष्टिकरण की राजनीति थी, जिसने देश की एकता को नुकसान पहुंचाया।

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आपातकाल, संविधान और वंदे मातरम्

प्रधानमंत्री मोदी ने 1975 में लगाए गए आपातकाल को याद करते हुए कहा कि जब वंदे मातरम् के 100 वर्ष पूरे हुए थे, तब देश लोकतंत्र की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि उस दौर में संविधान का गला घोंटा गया, आजादी के लिए लड़ने वाले लोग जेलों में बंद किए गए और राष्ट्रवाद को कुचलने की कोशिश हुई। लेकिन उसी समय वंदे मातरम् देश के लिए ऊर्जा और प्रेरणा का स्रोत बना। मोदी ने कहा कि जब-जब संविधान और लोकतंत्र पर हमला हुआ, वंदे मातरम् ने देश को फिर से खड़ा होने की शक्ति दी। उन्होंने इसे भारत की आत्मा बताते हुए कहा कि वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या और संघर्ष का प्रतीक है।

2047 का विकसित भारत और आत्मनिर्भरता का संकल्प

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वंदे मातरम् की यात्रा 1875 में बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा शुरू की गई थी, जब अंग्रेज 1857 के बाद बौखलाए हुए थे। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों ने बांटो और राज करो की नीति अपनाई और बंगाल को इसकी प्रयोगशाला बनाया। मोदी ने कहा कि आजादी से पहले महापुरुषों का सपना स्वतंत्र भारत था और आज की पीढ़ी का सपना समृद्ध और विकसित भारत है। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत की इस यात्रा में वंदे मातरम् हमारी सबसे बड़ी प्रेरणा है और यह देश को जोड़ने वाला सबसे मजबूत सूत्र बना रहेगा।

1875 में बंकिम चंद्र ने लिखा था वंदे मातरम्

भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम् गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। उस सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम थीं।

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