Deepfake Video Alert: डीपफेक के बढ़ते खतरों के बीच आम यूजर्स को समझ नहीं आ पा रहा है कि कौन‑सा वीडियो असली है और कौन‑सा नकली, और इसी कन्फ्यूजन का फायदा साइबर ठग उठा रहे हैं। फर्जी AI‑जनरेटेड वीडियो और ऑडियो के ज़रिये न केवल लोगों की छवि खराब की जा रही है, बल्कि लाखों रुपये तक की ठगी के मामले भी सामने आ चुके हैं। ऐसे में जरूरत है कि हर यूजर बुनियादी डिजिटल सेफ्टी अपनाए, ताकि वह खुद डीपफेक का शिकार बनने से बच सके।
वीडियो या तस्वीर पर तुरंत न करें भरोसा
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे किसी भी तस्वीर और वीडियो पर तुरंत भरोसा न करें। खासकर जब उसमें पैसे, राजनीति, सेक्स या विवादित बयान की बात हो। इसके अलावा वीडियो में सबसे पहले होंठों की मूवमेंट पर ध्यान देना चाहिए और चेहरे के हावभाव, त्वचा की रंगत, आंखों की नेचुरल ब्लिंकिंग, बैकग्राउंड लाइट पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि डीपफेक में अक्सर इनमें हल्की गड़बड़ होती है।
कैसे करें वीडियो की जांच?
इसके अलावा वीडियो पर संदेह होने पर रिवर्स इमेज सर्च (Google Images वगैरह) से फ्रेम या फोटो की जांच करें कि वो फोटो पहले कहीं और तो नहीं इस्तेमाल हुई। इसके अलावा फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट्स और डीपफेक डिटेक्शन टूल्स/वेबसाइट्स का इस्तेमाल करें, कई AI-आधारित टूल वीडियो/ऑडियो की क्वालिटी, मेटाडेटा और पैटर्न देखकर डीपफेक पकड़ने में मदद करते हैं। इसके अलावा एक से ज्यादा टूल से जांच करना बेहतर है, ताकि एक टूल की गलती को दूसरा कवर कर सके।