Delhi Cloud Seeding: दिल्ली में 1.2 करोड़ रुपये का क्लाउड सीडिंग ट्रायल फेल, AAP ने कसा तंज

Delhi Cloud Seeding: दिल्ली में प्रदूषण को कम करने के लिए क्लाउड सीडिंग का दूसरा और तीसरा ट्रायल मंगलवार को हुआ। यह ट्रायल फेल रहा है। दिल्ली क्लाउड सीडिंग के लिए सरकार ने करीब एक करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए हैं।

Jitendra Singh
अपडेटेड29 Oct 2025, 11:03 AM IST
Delhi Cloud Seeding: दिल्ली सरकार ने पश्चिमी विक्षोभ के बीच क्लाउड सीडिंग के दो परीक्षण किए।
Delhi Cloud Seeding: दिल्ली सरकार ने पश्चिमी विक्षोभ के बीच क्लाउड सीडिंग के दो परीक्षण किए। (Livemint)

Delhi Cloud Seeding: दिल्ली में प्रदूषण से राहत पाने के लिए सरकार ने कृत्रिम बारिश (क्लाउड सीडिंग) का ट्रायल किया गया था, लेकिन यह प्रक्रिया असफल रही। कई घंटे बीत जाने के बाद भी राजस्थान में बारिश नहीं हुई। आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट में कारण बताया गया है कि नमी की कमी की वजह से दिल्ली-एनसीआर में क्लाउड सीडिंग का असर नहीं हो पाया है। IIT कानपुर की टीम ने कहा कि कुल 14 फ्लेयर्स बादलों में छोड़े गए। हालांकि, बादलों में नमी (moisture) बहुत कम, लगभग 10 से 15 प्रतिशत होने की वजह से बारिश नहीं हो सकी।

मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को एनसीआर में केवल 0.1 मिमी बारिश नोएडा में दर्ज की गई। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इतनी कम नमी के साथ क्लाउड सीडिंग से बारिश होना लगभग असंभव था। बता दें कि दिवाली के बाद से लगातार एयर क्वालिटी में तेजी से गिरावट आई है। राजधानी की हवा की गुणवत्ता 'बेहद खराब' बनी हुई है।

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IIT कानपुर की ओर से ऑपरेट किए जाने वाले इस ट्रायल में मंगलवार को एयरक्राफ्ट उत्तर-पश्चिम दिल्ली और नेशनल कैपिटल रीजन के कुछ हिस्सों के ऊपर मंडरा रहा था। इसने क्लाउड सीडिंग के दो ट्रायल में सिल्वर आयोडाइड फ्लेयर्स छोड़े। बारिश नहीं हुई। हालांकि दिल्ली के पर्यावरण मंत्री ने फिर भी इस कोशिश को "सफल" बताया है।

इन इलाकों में हुआ था ट्रायल

आईआईटी कानपुर की विशेषज्ञ टीम द्वारा प्रबंधित दोनों उड़ानें आईआईटी कानपुर और मेरठ हवाई अड्डों से शुरू हुईं और खेकड़ा, बुराड़ी, उत्तरी करोल बाग, मयूर विहार, सादकपुर, भोजपुर और आसपास के क्षेत्रों को कवर किया। AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने वीडियो बनाकर दिल्ली सरकार के इस ट्रायल का मजाक उड़ाया। हंसते हुए कहा, " 4:30 बज चुके हैं, बारिश नहीं है। उन्होंने कहा, 'बारिश में भी फर्जीवाड़ा, कृत्रिम वर्षा का कोई नामोनिशान नहीं दिख रहा है। इन्होंने सोचा होगा देवता इंद्र करेंगे वर्षा, सरकार दिखाएगी खर्चा।'

ट्रायल डेटा से बड़े प्लान की तैयारी

दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि सर्दियों से पहले वायु गुणवत्ता में सुधार हो सके, जब प्रदूषण सबसे ज्यादा होता है। यह कोशिश एन्वायर्नमेंट एक्शन प्लान 2025 का हिस्सा है। ट्रायल से जो डेटा मिलेगा, वह भविष्य में क्लाउड सीडिंग को बड़े पैमाने पर लागू करने में मदद करेगा। भारत में इससे पहले भी कई बार ऐसे क्लाउड सीडिंग हो चुकी हैं।

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भारत में 1983, 1987 में इसका पहली बार इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा तमिलनाडु सरकार ने 1993-94 में ऐसा किया गया था। इसे सूखे की समस्या को खत्म करने के लिए किया गया था। साल 2003 में कर्नाटक सरकार ने भी क्लाउड सीडिंग करवाई थी। इसके अलावा महाराष्ट्र में भी ऐसा किया जा चुका है।

जानिए दिल्ली में क्लाउड सीडिंग में कितने रुपये खर्च हुए

दिल्ली कैबिनेट ने 7 मई को क्लाउड सीडिंग प्रोजेक्ट को मंज़ूरी दी, जिसके लिए पांच ट्रायल के लिए 3.21 करोड़ का बजट रखा गया। यानी हर कोशिश पर लगभग 64 लाख। IIT कानपुर के साथ मिलकर प्लान किए गए ये ट्रायल शुरू में मई के आखिर और जून की शुरुआत में होने थे, लेकिन दो बार टाल दिए गए। मंगलवार को हुए दोनों ट्रायल में कुल मिलाकर लगभग 1.28 करोड़ का खर्च आया है।

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